facebookmetapixel
Advertisement
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर RSS ने दिया पहला बयान, कहा: घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कड़ी सजाEditorial: दिल्ली की नई EV नीति सही दिशा में, लेकिन अभी भी कई बड़े सुधार की जरूरतभारत को अपना AI मॉडल बनाने का जरूरत नहीं, मजबूत AI इकोसिस्टम पर दांव लगाना सही कदमहिमाचल में 2027 की चुनावी बिसात: खस्ताहाल खजाना और गुटबाजी के बीच सुक्खू सरकार की बढ़ी बेचैनीविदेशी निवेशकों से रुपये में लिया जाएगा रेगुलेटरी शुल्क, FPI और FVCI के लिए SEBI बदलने जा रहा है नियमकॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में आई जबरदस्त रौनक, भारतीय कंपनियों ने एक ही दिन में जुटाए ₹15,960 करोड़Nifty IT इंडेक्स 30% टूटा, फिर भी पैसिव फंड्स का एयूएम 23% बढ़कर ₹5,800 करोड़ के पार‘विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू म्युचुअल फंड बने शेयर बाजार की ढाल’, SEBI का बड़ा दावाअल नीनो और महंगे ईंधन की दोहरी मार: होटलों की कमाई पर मंडराया संकट, पानी की कमी ने बढ़ाई मुश्किलेंईरान युद्ध के बीच IPO बाजार में म्युचुअल फंडों का जलवा, कई सालों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हिस्सेदारी

कर छूट के लिए पीएफ ट्रस्ट को करना पड़ेगा एक साल इंतजार

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 4:24 PM IST

वित्त मंत्रालय ने कॉरपोरेट भविष्य निधि(पीएफ) के तहत कर रियायत के मानदंडों को प्राप्त करने की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी है। ईपीएफ ऐंड एमपी कानून 1952 के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)को 31 मार्च 2009 तक लंबित पड़े आवेदनों पर वित्त बिल 2008 के अंतर्गत सोचने का समय दिया गया है। इस आवेदनों में कर रियायत की बात की जा रही थी।
यह पीएफ ट्रस्ट के समय में किया गया दूसरा विस्तार है। इससे पहले इसके पारित होने की समय सीमा 31 मार्च 2007 थी। कॉरपोरेट भविष्य निधि के तहत वे कर्मचारी आते हैं,जिनकe ा मासिक वेतन 6500 रुपये से अधिक हो और वे सरकार के भविष्य निधि योजना के दायरे से भी बाहर हों।
संशोधन के मुताबिक धारा 17 के तहत कॉरपोरेट पीएफ में कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रोविजन कानून के लिए कर में रियायत के दावे की बात शामिल है। इस तरह पीएफ ट्रस्ट का नियंत्रण आयकर आयुक्त और भविष्य निधि आयुक्त के जिम्मे आना चाहिए।
आयकर कानून 2006 के संशोधन के तहत पीएफ ट्रस्ट को कर में छूट के लिए श्रम मंत्रालय के तहत भविष्य निधि आयुक्त से प्रमाण लेना पड़ता है। संशोधन से पहले पीएफ ट्रस्ट के अंतर्गत निवेश के मानदंड की हीं अनुमति थी,हालांकि इसकी पहचान आयकर प्राधिकरण करती थी। लेकिन जैसे हीं इसमें संशोधन हुआ,पीएफ ट्रस्ट को इस बात की शिकायत होने लगी कि भविष्य निधि आयुक्त इसके क्रियान्वयन में विलंब कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इसक ी स्वीकृति के लिए काफी चक्कर भी काटने पड़ते थे। एक सूत्र के मुताबिक भविष्य निधि के तहत बकाये को नियंत्रित करने के संदर्भ में काफी शिकायतें आने लगी थी,जिसकी वजह से आयकर कानून में परिवर्तन की जरूरत पड़ी। आयकर विभाग ने भविष्य निधि के तहत कर रियायत को लेकर आयुक्त के बारे में मिल रही शिकायतों के कारण काफी कड़े नियम बनाए।

Advertisement
First Published - March 2, 2008 | 9:07 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement