गुडग़ांव अपने भव्य टावरों, चौड़ी सड़कों, शानदार मॉल और प्रमुख सीईओ के पेंटहाउस अपार्टमेंटों के साथ भारत का आकर्षक उपनगर बन सकता था। लेकिन करीब 6 दशक तक व्यवसाय का संचालन करने के बाद कुशल पाल सिंह का कहना है कि उन्हें सिर्फ इस बात का मलाल है कि गुडग़ांव अभी भी उस तरह का ड्रीम सिटी नहीं बन पाया है, जिसका उन्होंने सपना देखा था। कुशल पाल सिंह भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्घ प्रॉपर्टी कंपनी डीएलएफ के चेयरमैन पद से गुरुवार को सेवानिवृत हो गए हैं। 90 वर्षीय सिंह ने डीएलएफ में शामिल होने के लिए 1961 में सेना की नौकरी छोड़ दी थी। इस कंपनी को उनके ससुर द्वारा 1946 में शुरू किया गया था।
उन्होंने 1979 में दिल्ली से सटे गुडग़ांव के एक छोटे गांव में संपत्ति को विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। वह इस इलाके को सिंगापुर की तरह सैटेलाइट सिटी में तब्दील करना चाहते थे। वह चाहते थे कि यहां अपना परिचालन शुरू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियां आकर्षित हों। उन्होंने डीएलएफ सिटी का निर्माण करने के लिए अब गुरुग्राम बन चुके गुडग़ांव के आसपास 3,500 एकड़ भूमि खरीदी थी। उन्होंने कहा, ‘पूरी योजना एक दशक के लिए नहीं बल्कि सदियों के लिए थी। बड़ी सड़कें, बड़े नाले, सब कुछ मुख्य राजमार्ग से जुड़ा हो।’ सिंह ने एजेंसी के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘दुर्भाग्यवश उनका मिशन पूरा नहीं हो सका।’
16-लेन का राजमार्ग और विश्वस्तरीय सीवर तथा नाली व्यवस्थाएं सिंह के राष्ट्रीय राजधानी के उपनगर की योजनाओं का हिस्सा थीं। वह 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हैं। उस समय गुडग़ांव को विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ एक इंटिग्रेटेड सिटी के तौर पर विकसित किए जाने की योजना थी। गांधी ने सिंह से पूछा था कि भारत भी दुनिया में मलेशिया और दक्षिण कोरिया की तरह अच्छा क्यों नहीं बन सकता। इसके बाद सिंह ने इन दो देशों का दौरा किया और उनकी प्रणालियों को समझा। वह जैसे ही वापस आए, जल्द से जल्द परियोजना पर काम शुरू किया।
वह कहते हैं कि लेकिन बंसीलाल को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया गया और उधर राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। इससे पूरी तस्वीर बदल गई। राजनीतिक माहौल बदला और डीएलएफ के गुडग़ांव सपने के लिए सरकारी समर्थन कमजोर पड़ गया।