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अगर बायो-डाटा में की छेड़खानी तो छोड़नी पड़ जाएगी नौकरी

Last Updated- December 05, 2022 | 6:59 PM IST

बेंगलुरु स्थित विप्रो टेक्नोलॉजीज, बायो-डाटा के साथ धोखाधड़ी कर नौकरी पाने वाले कर्मचारियों से सख्ती से निपट रही है।


फरवरी से लेकर अब तक यह आईटी कंपनी, विभिन्न जगहों पर लगभग 200 कर्मचारियों को पृष्ठभूमि जांच प्रक्रिया में दोषी पाए जाने के बाद सेवा से वंचित कर चुकी है। विप्रो ही नहीं कई अन्य कंपनियों ने भी ऐसे कर्मचारियों की खबर लेनी शुरू कर दी है।वैसे, विप्रो टेक्नोलॉजीज के उपाध्यक्ष प्रदीप बहिरवानी ने पुन: दोहराया है कि वित्तीय वर्ष 2008 की चौथी तिमाही में ऐसे आरोपों में कंपनी द्वारा 200 कर्मचारियों को निकाले जाने के बाद किसी कर्मचारी को नहीं निकाला गया है।


उन्होंने कहा कि मार्च में 2000 फ्रेशर कंपनी के साथ जुड़े हैं।  बायो-डाटा में गलत उम्र, योग्यता आदि से संबंधित गलत तथ्य पेश किए जाने के बारे में पूछे जाने पर बहिरवानी ने कहा, ‘ये छंटनी बायो-डाटा में गलत दावे पेश किए जाने के आधार पर की गई हैं। इन गलत दावों में से कुछ में पिछले अनुभव, पिछली कंपनी के वेतन संबंधी और अन्य तरह के झूठे दावे शामिल हैं।’


प्रमुख आईटी कंपनियों के लिए रिज्यूम में गड़बड़ियों का पता देर से चलने के कारण कर्मचारियों की छंटनी कोई नई बात नहीं है। अधिकारियों के अनुसार कुछ मामले तो ऐसे भी प्रकाश में आए हैं जब चार वर्षों तक नौकरी करने के बाद किसी कर्मचारी को कंपनी से निकाला गया है।विप्रो, टीसीएस, आईबीएम, याहू और ईडीएस जैसी प्रमुख आईटी कंपनियां वित्तीय वर्ष 2008 की जनवरी-मार्च की तिमाही में भारत में सामूहिक रूप से 1300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी हैं।


फरवरी के पहले सप्ताह में आईबीएम कंपनी ने भारत में अपने कई कार्यालयों से 600 कर्मचारियों को बाहर का दरवाजा दिखा दिया। इन कर्मचारियों को एक साल तक काम करने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया। भारत में आईबीएम के 73 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। आईबीएम के अधिकारियों ने बताया कि इन कर्मचारियों को अप्टीटयूड टेस्ट परफॉमेंस के आधार पर नौकरी छोड़ने को कहा गया था।


टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अक्षमता के कारण 500 कर्मचारियों की छंटनी की वहीं याहू ने भी ऐसा ही कदम उठाते हुए 45 कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटका दी।चेन्नई स्थित कॉग्नीजेंट टेक्नोलॉजीज के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हर वर्ष की जाने वाली नियुक्तियों में से लगभग 60-65 प्रतिशत फ्रेशर कैम्पस से होते हैं। कंपनी में नौकरी पर रखे जाने से पहले व्यक्ति के बारे में छानबीन आवश्यक है।’  उन्होंने कहा कि हमारी कंपनी नैसकॉम के नैशनल स्किल्स रजिस्ट्री के साथ पंजीकृत है।


जनवरी में भी बिजनेस स्टैंडर्ड के अंग्रेजी अखबार में यह खबर प्रकाशित हुई थी कि ईडीएस कंपनी ने खराब प्रदर्शन के आधार पर लगभग 130-200 कर्मचारियों की छंटनी की जिनमें से अधिकांश चेन्नई स्थित कार्यालय में कार्यरत थे।ईडीएस के एक कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनी द्वारा निकाले गए कर्मचारियों में से कुछ को 24 घंटें के अंदर नौकरी छोड़ने को कहा गया था। ईडीएस के अधिकारियों ने इन कर्मचारियों को इस छंटनी के बारे में किसी को नहीं बताने की चेतावनी दी थी। 


एक प्रमुख भर्ती कंपनी से जुड़े एक एचआर एग्जीक्यूटिव ने कहा, ‘एप्टीटयूड टेस्ट संचालन जरूरतों का एक हिस्सा और खंड है जिसे गंभीरता से लिया जाता है। इसके तहत सीवी में गलत तथ्य पाए जाने पर कर्मचारी मुश्किल में फंस सकता है। कंपनियां झूठे तथ्यों या अक्षमता के लिए कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए बाध्य करती हैं जिससे अन्य क्षेत्रों या कार्यालयों में भी ऐसे कर्मचारियों को नौकरी प्राप्त करना आसान नहीं रह जाता है।’


राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तकरीबन 160,000 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र की भागीदारी वित्तीय वर्ष 1997-98 में 1.2 फीसदी से बढ़ कर वित्तीय वर्ष 2007 में 5.2 फीसदी हो गई और वित्तीय वर्ष 2008 में इस क्षेत्र की भागीदारी 6.2 फीसदी हो जाने की संभावना है।

First Published - April 3, 2008 | 12:09 AM IST

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