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क्रेडिट ग्रोथ दिसंबर में 11.1% पर सिमटी; पर्सनल और अनसिक्योर्ड लोन में गिरावट, गोल्ड लोन ने दी राहत

पिछले दो सालों में 14% से 16% के बीच की ग्रोथ रेट देखने के बाद, ग्रॉस क्रेडिट ग्रोथ बीते कुछ महीनों से स्लो हो रही है और दिसंबर 2024 में यह घटकर 11.2% पर आ गई।

Last Updated- February 05, 2025 | 3:22 PM IST
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लगातार कई महीनों से बैंकों का क्रेडिट ऑफटेक (कर्ज वितरण) धीमा होता जा रहा है। दिसंबर 2024 में भी यह सिलसिला जारी रहा। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ साल-दर-साल (y-o-y) बेसिस पर घटकर 11.1% रह गई, जबकि दिसंबर 2023 में यह 20.1% (मर्जर के साथ) और 15.8% (मर्जर के बिना) थी।

केयर रेटिंग्स (Care Ratings) के मुताबिक, इस गिरावट की मुख्य वजहें हाई बेस इफेक्ट, RBI की सख्त पॉलिसी जैसे बढ़े हुए रिस्क वेट्स और प्रस्तावित LCR नॉर्म्स मानी जा रही हैं। इसके अलावा, बैंकों का फोकस क्रेडिट-टू-डिपॉजिट (C-D) रेश्यो को कंट्रोल करने पर है, जो अभी भी लगभग 80% के आसपास बना हुआ है।

दिसंबर 2024 में एग्रीकल्चर, MSMEs, गोल्ड लोन और हाउसिंग लोन (मॉर्गेज) जैसे सेक्टर्स ने क्रेडिट ग्रोथ में योगदान दिया, लेकिन बाकी क्षेत्रों में धीमी ग्रोथ के चलते कुल कर्ज वितरण पर असर पड़ा।

पिछले दो सालों में 14% से 16% के बीच की ग्रोथ रेट देखने के बाद, ग्रॉस क्रेडिट ग्रोथ बीते कुछ महीनों से स्लो हो रही है और दिसंबर 2024 में यह घटकर 11.2% पर आ गई। इस स्लोडाउन की वजह पर्सनल लोन और सर्विसेज सेगमेंट में गिरावट को माना जा रहा है, खासतौर पर अनसिक्योर्ड लोन और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को दिए गए लोन में कमी के कारण। दिसंबर 2024 में नॉन-फूड बैंक क्रेडिट की ग्रोथ सिर्फ 11.1% रही, जबकि पिछले साल इसी पीरियड में यह आंकड़ा 15.8% था।

पर्सनल लोन ग्रोथ घटी, दिसंबर में 12% की दर से दर्ज

दिसंबर 2024 में पर्सनल लोन की ग्रोथ घटकर 12% रही, जो पिछले साल इसी अवधि में 17.6% थी। इस गिरावट का कारण कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर लोन में कमी और पर्सनल लोन, व्हीकल लोन और क्रेडिट कार्ड बैलेंस की धीमी ग्रोथ को माना जा रहा है। इसके अलावा, आरबीआई के कड़े कदम और अनसिक्योर्ड लोन के क्षेत्र में स्ट्रेस भी इस कमी की वजह बने। हालांकि, हाउसिंग और गोल्ड लोन में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है, जिसने स्थिति को आंशिक रूप से संतुलित किया।

सर्विस सेक्टर में भी ग्रोथ धीमी रही और दिसंबर में यह 11.7% दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 20% थी। इस गिरावट की मुख्य वजह NBFCs और ट्रेड सेक्टर को दिए जाने वाले लोन में कमी है। हालांकि, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और प्रोफेशनल सर्विसेज सेगमेंट में क्रेडिट ग्रोथ तेज रही है।
इंडस्ट्री सेक्टर को दिए जाने वाले बैंक लोन की ग्रोथ मामूली गिरावट के साथ दिसंबर में 7.2% रही, जो पिछले साल 7.5% थी। ‘फूड प्रोसेसिंग’ और ‘पेट्रोलियम व कोल प्रोडक्ट्स’ जैसे क्षेत्रों में ग्रोथ देखने को मिली, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट में गिरावट रही।

इसके अलावा, MSMEs को दिया जाने वाला बैंक क्रेडिट बड़े एंटरप्राइजेज की तुलना में तेजी से बढ़ा है, जो इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है।

दिसंबर 2024 में गोल्ड लोन में जबरदस्त 71% की बढ़ोतरी, एग्री लोन भी तेजी पर

दिसंबर 2024 में गोल्ड के बदले इंडिविजुअल्स को दिए गए लोन में 71.3% की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़त पिछले साल इसी अवधि में 17% थी। बैंकों के अनुसार, इस तेज ग्रोथ का करीब आधा हिस्सा गोल्ड लोन को एग्री-गोल्ड लोन से रिटेल लोन में ट्रांसफर करने से हुआ है। रिटेल लोन में ज्यादा लिमिट मिलने के कारण बैंकों ने यह री-क्लासिफिकेशन किया। इसके साथ ही, गोल्ड की कीमतों में 22% की बढ़ोतरी भी इस ग्रोथ की बड़ी वजह रही है।

एग्री लोन बना सबसे तेज ग्रोथ वाला सेगमेंट

एग्रीकल्चर और इससे जुड़े सेक्टर में दिसंबर 2024 में 12.5% की ग्रोथ दर्ज हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 19.4% थी। अगर एग्री-गोल्ड लोन से रिटेल लोन में ट्रांसफर हुए लोन को वापस एग्री लोन में जोड़ा जाए, तो एग्री लोन की ग्रोथ करीब 2% ज्यादा होती।

पर्सनल और सर्विसेज लोन की ग्रोथ में गिरावट क्यों?

पर्सनल और सर्विसेज लोन में स्लोडाउन की मुख्य वजह RBI द्वारा कंज्यूमर क्रेडिट, क्रेडिट कार्ड और NBFCs पर रिस्क वेट बढ़ाना है। इसके अलावा, इन सेगमेंट्स में रिस्क बढ़ने और अनसिक्योर्ड लोन में डिफॉल्ट्स बढ़ने से भी इस ग्रोथ पर असर पड़ा है।

बैंकों द्वारा नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) को दिया जाने वाला कर्ज करीब छह साल के ग्रोथ ट्रेंड के बाद अब घटने लगा है। पहले यह बढ़त कोविड-19 के बाद अर्थव्यवस्था के दोबारा खुलने से तेज हुई थी, लेकिन दिसंबर 2024 तक इसमें बड़ा बदलाव देखा गया। बैंकों की NBFCs के प्रति आउटस्टैंडिंग क्रेडिट एक्सपोजर दिसंबर 2024 में ₹16.2 लाख करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 6.7% की ग्रोथ को दिखाता है। पिछले साल की तुलना में यह दर काफी कम है।

पिछले 12 महीनों में NBFCs को दिए जाने वाले कर्ज की ग्रोथ ओवरऑल बैंक क्रेडिट ग्रोथ से पिछड़ गई। इसका कारण रेगुलेटरी बदलाव, बेस इफेक्ट और पूंजी बाजार से बढ़ती उधारी है। हालांकि, दिसंबर 2024 में NBFCs को दिया गया कर्ज 2.9% महीने-दर-महीने बढ़ा, लेकिन कुल बैंक क्रेडिट में NBFCs का हिस्सा दिसंबर 2023 के 9.5% से घटकर दिसंबर 2024 में 9.1% पर आ गया।

क्रेडिट कार्ड पर बढ़ती रिस्क वेट का असर

क्रेडिट कार्ड के जरिए दिया जाने वाला कर्ज भी धीरे-धीरे घटने लगा है। इसका मुख्य कारण बढ़ते रिस्क वेट्स हैं। दिसंबर 2024 तक क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग में ग्रोथ की दर 15.6% रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 32.6% थी। डिफॉल्ट्स और नए रिस्क-वेट नॉर्म्स के कारण कार्ड इश्यू करने की रफ्तार धीमी हो गई है।

पर्सनल लोन सेगमेंट की ग्रोथ भी धीमी

दिसंबर 2024 में पर्सनल लोन सेगमेंट ₹14.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जिसमें 9.2% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई। हालांकि, यह दर पिछले साल की समान अवधि में दर्ज 23.2% की ग्रोथ से लगभग 2.5 गुना कम है। इसकी वजह आरबीआई द्वारा उपभोक्ता लोन पर बढ़ते रिस्क वेट्स और लोन पोर्टफोलियो में बढ़ते तनाव को माना जा रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर (जिसका इंडस्ट्री में 34.1% शेयर है) में दिसंबर 2024 में क्रेडिट ग्रोथ केवल 1.0% रही, जो दिसंबर 2023 में 5.8% थी। पावर सेगमेंट, जो 49.9% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा है, में इस दौरान 1.7% की ग्रोथ हुई, जबकि पिछले साल यही आंकड़ा 3.8% था।

सड़कों के लिए क्रेडिट दिसंबर 2024 में घटकर 2.8% y-o-y रह गया, जो दिसंबर 2023 में 5.9% था। वहीं, टेलीकॉम और पोर्ट्स सेक्टर में भी गिरावट देखी गई। इसके विपरीत, रेलवे (Indian Rail को छोड़कर) और एयरपोर्ट्स में क्रेडिट की मांग बढ़ी।

व्हीकल लोन की ग्रोथ रेट भी दिसंबर 2024 में घटकर 8.8% y-o-y पर आ गई, जो पिछले साल इसी समय 19.7% थी। यह कमी ऑटो सेल्स में गिरावट की वजह से हुई है।

मॉर्गेज, बड़े कॉरपोरेट लोन और कमर्शियल रियल एस्टेट लोन की ग्रोथ भी दिसंबर में धीमी पड़ गई। इस दौरान कमर्शियल रियल एस्टेट में 13.7% और हाउसिंग लोन में 11.1% y-o-y की ग्रोथ दर्ज हुई। इस गिरावट का मुख्य कारण मर्जर इफेक्ट और पिछले साल की हाई बेस इफेक्ट है।

हालांकि, हाउसिंग सेक्टर को अभी भी रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट्स, महंगे घरों की बिक्री और डेवलपर्स द्वारा दी जा रही स्कीम्स और इंसेंटिव्स का फायदा मिल रहा है।

First Published - February 5, 2025 | 3:11 PM IST

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