facebookmetapixel
कमजोर तिमाही नतीजों से बाजार दबाव में, सेंसेक्स-निफ्टी 10 हफ्ते के निचले स्तर पर बंदपहले दिन 77% उछला भारत कोकिंग कोल, IPO निवेशकों की हुई जबरदस्त कमाईअमेरिकी यील्ड का असर: सरकारी बॉन्ड यील्ड 10 महीने के हाई पर, रुपया भी दबाव मेंअब एक ही स्टेटमेंट में दिखेगी कमाई से निवेश तक की पूरी तस्वीर!Stock Market: बिकवाली के दबाव में बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी फिसलेBudget 2026: क्यों टैक्स एक्सपर्ट न्यू टैक्स रिजीम में अभी और सुधार की मांग कर रहे हैं?Sugar Production: महाराष्ट्र की ‘मीठी’ बढ़त से चीनी उत्पादन में उछाल, देश में 22% ग्रोथGCC बना ग्रोथ इंजन, भारत का ऑफिस मार्केट नई ऊंचाइयों पर, 2026 तक आधे से ज्यादा हिस्सेदारी का अनुमानTata Capital Q3 Results: मुनाफा 16.9% उछलकर ₹1,256.87 करोड़ पर पहुंचा, NII में भी जबरदस्त ग्रोथSEBI का नया प्रस्ताव: ₹20,000 करोड़ AUM वाले इंडेक्स अब नियमों के दायरे में आएंगे

टीका विनिर्माताओं को सस्ते कर्ज पर विचार

Last Updated- December 14, 2022 | 11:41 PM IST

भारत में टीके बनाने के मुख्य उम्मीदवार तीसरे चरण के परीक्षणों (दिसंबर के आसपास संभावित) के नजदीक पहुंच गए हैं। ऐसे में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सरकार इन विनिर्माताओं को कम ब्याज दरों पर ऋण मुहैया करा सकती है ताकि उन्हें अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सके।
भारत में टीका उद्योग से जुड़े बहुत से सूत्रों ने कहा कि सरकार ने टीके खरीदने, अनुमानित शुरुआती मात्रा, वितरण योजनाओं को लेकर कोई वादा नहीं किया है। लेकिन इस बात की संभावना है कि जब उत्पादन बढ़ाने का समय आएगा तो इन विनिर्माता कंपनियों को कम ब्याज दर पर ऋण मुहैया कराए जा सकते हैं।
एक टीका कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस मामले को लेकर हम सरकार के संपर्क में हैं। ऐसा लगता है कि सरकार कोई वादा करने से पहले इस बात का इंतजार कर रही है कि कौनसा टीका उम्मीदवार सफल होता है। हमें यह कहा जा रहा है कि टीका प्रशासन पर विशेषज्ञ समिति प्रारूप योजना और वितरण एवं उपलब्धता के लिए औपचारिक दस्तावेज तैयार कर रही है।’ उन्होंने कहा कि सरकार उन विनिर्माताओं को कम ब्याज दरों पर ऋण मुहैया करा सकती है, जिन्हें विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए इसकी दरकार होगी।
सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के अधिकारी ने पिछले महीने संकेत दिया था कि टीके की अहमियत को देखते हुए टीका विनिर्माण को एक किफायती कारोबार के रूप में देखा जाता है, इसलिए धन आसानी से उबलब्ध होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले ही कम लागत पर धन मुहैया कराने पर काम चल रहा है। अधिकारी का मानना था कि टीका विनिर्माताओं पर कर्ज कम है, इसलिए बैंक उन्हें कर्ज मुहैया कराने में सहज होंगे।
कुछ दिनों पहले भारत की सबसे बड़ी टीका विनिर्माता कंपनी के सीईओ ने इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि अगले एक साल में टीका खरीदने और हर देश वासी को बांटने के लिए सरकार के पास 80,000 करोड़ रुपये जुट पाएंगे या नहीं। हालांकि उन्होंने अपना रुख बदल लिया और ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और सहयोग से यह साफ है कि भारत की व्यवस्थाओं से लोगों की सभी जरूरतें पूरी होंगी। भले ही टीके की खरीद और वितरण योजना पर अदर पूनावाला के ट्विटर पर बयान से विवाद खड़ा हो गया हो, लेकिन उनकी यह चिंता निश्चित रूप से गैर-वाजिब नहीं थी। टीका विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का दावा है कि कुछ दिन पहले विनिर्माताओं के साथ नई दिल्ली में पहली बैठक के बाद सरकार की तरफ से मुश्किल से ही कोई संवाद किया गया है। हालांकि सरकार विनिर्माताओं से पूछ रही है कि उनकी क्या जरूरतें हैं।
बर्नस्टीन के विश्लेेषकों का मानना है कि भारत सरकार के 68 करोड़ खुराक की खरीद करने की संभावना है, जिस पर 1.9 अरब डॉलर खर्च होंगे। अगर सरकार पूरी आबादी का टीकाकरण करने का फैसला लेती है तो उसे छह अरब डॉलर खर्च करने होंगे। अगर यह मानते हैं कि 60 फीसदी का टीकाकरण किया जाएगा और हर व्यक्ति को 3 डॉलर प्रति खुराक की दर पर दो खुराक दी जाती हैं तो 1.3 अरब डॉलर का खर्च आएगा। बर्नस्टीन के विश्लेषकों का अनुमान है कि 55 फीसदी खरीद सरकार और 45 फीसदी निजी बाजार करेगा।
एक बड़ी टीका विनिर्माता ने कहा कि वे सरकार की तरफ से स्थितियां साफ किए जाने का इंतजार करेंगे। हालांकि वे कुछ जोखिम भी उठाएंगे। सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, भारत बायोटेक, जाइडस कैडिला जैसी टीका विनिर्माता पहले ही क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही हैं। सेरम इंस्टीट्यूट वर्ष 2020 के आखिर तक अपनी क्षमता में 40 करोड़ खुराक की बढ़ोतरी करेगी। इससे उसकी कुल क्षमता 1.9 अरब खुराक प्रति वर्ष हो जाएगी। जाइडस कैडिला अपनी टीका उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 10 करोड़ खुराक करेगी।
रूस तकनीक विकसित करे
हैदराबाद की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने स्पूतनिक-5 के लिए रसियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के साथ वितरण करार किया है। मगर आरडीआईएफ के साथ बातचीत कर रहे भारतीय विनिर्माताओं ने कहा है कि यह तकनीक वाणिज्यिक उत्पादन के लिए कारगर नहीं है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में एक टीका विनिर्माता ने कहा कि उन्होंने आरडीआईएफ से कोई तकनीक विकसित करने और फिर आने को कहा है। एक व्यक्ति ने कहा, ‘उन्होंने हमें जो तकनीक दिखाई है, उससे अधिक से अधिक कुछ हजार खुराक बनाई जा सकती हैं। रूस को इस पर थोड़ा और काम करना चाहिए। हमने अभी उनके साथ विनिर्माण करार नहीं किया है।’ यह भी कहा जा रहा है कि इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (आईआईएल) जैसी कंपनियों ने यहां विनिर्माण की चर्चा बंद कर दी है। हालांकि कंपनी से इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी।

First Published - September 29, 2020 | 10:58 PM IST

संबंधित पोस्ट