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पीएम मोदी ने भारत-आसियान सहयोग को मजबूत करने के लिए 12 सूत्री प्रस्ताव पेश किया

मोदी ने कहा, ‘आज वैश्विक अनिश्चितताओं के माहौल में भी हमारे आपसी सहयोग में हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। यह हमारे संबंधों की मजबूती और लचीलेपन का प्रमाण है।’

Last Updated- September 07, 2023 | 11:11 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक मल्टी मोडल संपर्क और आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव रखा जो दक्षिण-पूर्वी एशिया को यूरोप से जोड़ेगा। यह गलियारा भारत और पश्चिम एशिया से होकर गुजरेगा। उन्होंने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित 20वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए डिजिटल संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया।

सन 2022 में भारत और आसियान के रिश्तों के व्यापक सामरिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचने के बाद यह पहला शिखर सम्मेलन है। सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों ने दो संयुक्त वक्तव्यों को भी अपनाया। ये वक्तव्य समुद्री सहयोग और खाद्य सुरक्षा से संबंधित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इस सम्मेलन में आपसी संपर्क, व्यापार और डिजिटल बदलाव जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए 12 सूत्री प्रस्ताव पेश किया।

उन्होंने कोविड महामारी के बाद बदले हुए परिदृश्य में एक नियम आधारित विश्व व्यवस्था बनाने का आह्वान भी किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण-पूर्वी एशिया-भारत-पश्चिमी एशिया-यूरोप को जोड़ने वाले एक मल्टी-मोडल संपर्क और आर्थिक गलियारे की स्थापना का आह्वान करते हुए आसियान देशों के साथ भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को साझा करने की पेशकश भी की।

दोनों पक्ष एक संयुक्त बयान में, शांति, प्रगति और साझा समृद्धि के लिए आसियान-भारत साझेदारी को लागू करने के लिए ‘कार्य योजना’ के व्यावहारिक कार्यान्वयन के माध्यम से ठोस कार्यों के साथ अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने पर सहमत हुए।

संयुक्त बयान में कहा गया ब्लू इकानॉमी, अंतरिक्ष और खाद्य सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के अलावा हिंद-प्रशांत में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में भारत की ओर से की गई पहल का समर्थन किया जाएगा।

खाद्य सुरक्षा पर एक अलग संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ावा देकर खाद्य सुरक्षा और पोषण पर सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में काम करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस 12 सूत्रीय प्रस्ताव में आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और साइबर दुष्प्रचार के खिलाफ सामूहिक लड़ाई और ग्लोबल साउथ यानी दुनिया के गरीब देशों की आवाज को बुलंद करने का भी आह्वान किया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि शिखर सम्मेलन में समुद्री सहयोग और खाद्य सुरक्षा पर दो संयुक्त बयानों को भी स्वीकार किया गया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रगति और ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करना सभी के साझा हित में है।’ ग्लोबल साउथ एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल अक्सर लैटिन अमेरिका, एशिया, अफ्रीका और ओशिनिया के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए किया जाता है। आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संगठन) को क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक माना जाता है।

भारत, अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देश इसके संवाद भागीदार हैं। अपने आरंभिक संबोधन में मोदी ने कहा कि आसियान भारत की हिंद-प्रशांत पहल में एक प्रमुख स्थान रखता है और नई दिल्ली इसके साथ ‘कंधे से कंधा’ मिलाकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘21वीं सदी एशिया की सदी है। यह हमारी सदी है।

इसके लिए कोविड-19 के बाद नियम आधारित विश्व व्यवस्था का निर्माण करना और मानव कल्याण के लिए सभी के प्रयासों की जरूरत है।’ प्रधानमंत्री ने इस बात की भी पुष्टि की कि आसियान भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का केंद्रीय स्तंभ है और यह आसियान की केंद्रीयता और हिंद-प्रशांत पर उसके दृष्टिकोण का पूरी तरह से समर्थन करता है।

उन्होंने कहा, ‘हमारा इतिहास और भूगोल भारत तथा आसियान को जोड़ता है। साझा मूल्यों के साथ-साथ क्षेत्रीय एकता, शांति, समृद्धि और बहुध्रुवीय दुनिया में साझा विश्वास भी हमें एक साथ बांधता है।’ उन्होंने कहा कि समूह भारत की हिंद-प्रशांत पहल में ‘प्रमुख स्थान’ रखता है। पिछले साल दोनों पक्षों के संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचे थे। उसके पश्चात दोनों पक्षों के बीच यह पहला शिखर सम्मेलन था।

मोदी ने कहा, ‘आज वैश्विक अनिश्चितताओं के माहौल में भी हमारे आपसी सहयोग में हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। यह हमारे संबंधों की मजबूती और लचीलेपन का प्रमाण है।’ अपने आरंभिक संबोधन में उन्होंने कहा, ‘आसियान मायने रखता है क्योंकि यहां हर किसी की आवाज सुनी जाती है और आसियान विकास का केंद्र है क्योंकि आसियान क्षेत्र वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।’

प्रधानमंत्री ने भारत-आसियान सहयोग को मजबूत करने के लिए पेश 12 सूत्री प्रस्ताव में संपर्क, डिजिटल बदलाव, व्यापार और आर्थिक भागीदारी, समकालीन चुनौतियों का समाधान, लोगों के बीच संपर्क और रणनीतिक भागीदारी को प्रगाढ़ करना शामिल है।

प्रस्ताव के तहत, भारत ने दक्षिण-पूर्वी एशिया-भारत-पश्चिमी एशिया-यूरोप को जोड़ने वाले एक मल्टी-मोडल संपर्क और आर्थिक गलियारे की स्थापना का आह्वान किया और आसियान देशों के साथ भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को साझा करने की पेशकश की।

प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल बदलाव और वित्तीय संपर्क में सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए डिजिटल भविष्य के लिए आसियान-भारत कोष की भी घोषणा की। प्रस्ताव के हिस्से के रूप में उन्होंने आसियान और पूर्वी एशिया के आर्थिक एवं अनुसंधान संस्थान (ईआरआईए) को समर्थन के नवीनीकरण की घोषणा की ताकि संबंधों को बढ़ाने के लिए ज्ञान भागीदार के रूप में कार्य किया जा सके।

मोदी ने आसियान देशों को भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा स्थापित किए जा रहे पारंपरिक दवाओं के वैश्विक केंद्र में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया और पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण के लिए व्यक्तिगत तथा सामुदायिक कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए भारत के नेतृत्व वाले वैश्विक जन आंदोलन ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली) पर मिलकर काम करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने जन-औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं प्रदान करने में भारत के अनुभव को साझा करने की भी पेशकश की। उन्होंने आसियान देशों को आपदा रोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया और आपदा प्रबंधन में सहयोग का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और खाद्य एवं दवाओं सहित आवश्यक वस्तुओं के लिए लचीली आपूर्ति श्रृंखला सहित वैश्विक चुनौतियों से निपटने और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक सहकारी दृष्टिकोण का भी आह्वान किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में भारत के कदमों और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, मिशन लाइफ और ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ जैसी पहलों पर प्रकाश डाला।

First Published - September 7, 2023 | 11:11 PM IST

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