facebookmetapixel
जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेट कंपनी Eternal पर GST की मार, ₹3.7 करोड़ का डिमांड नोटिस मिलासरकार ने जारी किया पहला अग्रिम अनुमान, FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% की दर से बढ़ेगीDefence Stocks Rally: Budget 2026 से पहले डिफेंस शेयरों में हलचल, ये 5 स्टॉक्स दे सकते हैं 12% तक रिटर्नTyre Stock: 3-6 महीने में बनेगा अच्छा मुनाफा! ब्रोकरेज की सलाह- खरीदें, ₹4140 दिया टारगेटकमाई अच्छी फिर भी पैसा गायब? जानें 6 आसान मनी मैनेजमेंट टिप्सSmall-Cap Funds: 2025 में कराया बड़ा नुकसान, क्या 2026 में लौटेगी तेजी? एक्सपर्ट्स ने बताई निवेश की सही स्ट्रैटेजी85% रिटर्न देगा ये Gold Stock! ब्रोकरेज ने कहा – शादी के सीजन से ग्रोथ को मिलेगा बूस्ट, लगाएं दांवकीमतें 19% बढ़ीं, फिर भी घरों की मांग बरकरार, 2025 में बिक्री में मामूली गिरावटIndia-US ट्रेड डील क्यों अटकी हुई है? जानिए असली वजहस्टॉक स्प्लिट के बाद पहला डिविडेंड देने जा रही कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनी! जानें रिकॉर्ड डेट

भारत के 2,000 डॉक्टरों को नौकरी देगा ब्रिटेन, प्रतिभा पलायन का खतरा!

NHS पहले बैच के डॉक्टरों के लिए स्नातकोत्तर प्रशिक्षण शुरू करेगी और प्रशिक्षण पूरा करने के 6 से 12 महीने के बाद इनकी नियुक्ति अस्पतालों में की जाएगी।

Last Updated- March 17, 2024 | 10:53 PM IST
NEET UG Paper Leak

ब्रिटेन की नैशनल हेल्थ सर्विस (NHS) बहुत जल्दी ही 2,000 भारतीय डॉक्टरों की नियुक्ति करेगी। इस उद्योग के सूत्रों ने बताया कि ब्रिटेन में डॉक्टरों की अत्यधिक कमी होने के कारण यह कदम उठाया गया है।

एनएचएस पहले बैच के डॉक्टरों के लिए स्नातकोत्तर प्रशिक्षण शुरू करेगी और प्रशिक्षण पूरा करने के 6 से 12 महीने के बाद इनकी नियुक्ति अस्पतालों में की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि यह प्रशिक्षण पूरा करने पर डॉक्टरों को प्रोफेशनल ऐंड लिंग्विस्टिक असेसमेंट्स बोर्ड (पीएलएबी) परीक्षा से छूट मिलेगी। हालांकि इस पहल को एनएचएस में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के रूप में देखा जा रहा है जबकि कुछ अन्य इसे भारत के स्वास्थ्य सेवा में संभावित प्रतिभा पलायन के रूप में देखते हैं।

उजाला सिग्नस समूह अस्पताल के इंटरनल मेडिसन के डॉक्टर शुचिन बजाज ने कहा, ‘इस कदम का भारत पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह संख्या बेहद कम 2000 है। भारत में हर साल 1,10,000 डॉक्टर पढ़कर निकलते हैं। एनएचएस के इस कदम से वहां डॉक्टरों के स्थायी रूप से बसाए जाने की गारंटी नहीं है, लेकिन ऐसे डॉक्टरों को बहुमूल्य अनुभव हासिल हो सकता है।’ उन्होंने कहा कि ज्ञान और अनुभव के इस लेन-देन से भारत और ब्रिटेन दोनों देश लाभान्वित होंगे।

एनएचएस से बेहद करीबी रूप से जुड़े हुए डॉक्टर रवि बैज ने बताया कि एनएचएस का लंबे समय से विदेशी डॉक्टरों पर निर्भर रहने का इतिहास रहा है। एनएचएस में करीब 25 से 30 फीसदी डॉक्टर गैर यूके प्रशिक्षित डॉक्टर हैं। उन्होंने कहा, ‘एनएचएस दीर्घावधि में अपने डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए भी निवेश कर रही है। मेरे विचार से इस पहल से भारत से ज्यादा डॉक्टर ब्रिटेन आने के लिए प्रोत्साहित नहीं होंगे। इसका कारण यह है कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और वित्तीय रूप से अब ब्रिटेन का ज्यादा आकर्षण नहीं रह गया है। एनएचएस की नजर भविष्य में विदेश के डॉक्टरों की संख्या कम करने पर है।’

एनएचएस ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत भारत के प्रमुख शहरों के नामचीन अस्पतालों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किेए हैं। इस क्रम में दिल्ली, नागपुर, गुरुग्राम, कालीकट, बेंगलूरू, चेन्नई, इंदौर और मैसूर के प्रमुख अस्पतालों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किेए गए हैं।

डॉक्टर रवि ने कहा, ‘भारत के डॉक्टरों के ब्रिटेन जाने से प्रतिभा पलायन हो सकता है। लिहाजा यह भारत सरकार के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है कि इस सिलसिले में कदम उठाए। भारत अपने यहां प्रशिक्षत डॉक्टरों को देश में पर्याप्त अवसर मुहैया करवाए। इस क्रम में डॉक्टरों को उनके कौशल के अनुसार पर्याप्त वेतन पैकेज मुहैया करवाया जाए ताकि वे प्रोफेशनल मानदंडों का पालन करते हुए अपनी पसंद की जिंदगी जी सकें।’

इस पहल के बारे में जागरूकता कम है। हालांकि भारत के अस्पतालों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किेए गए हैं लेकिन इस पहल का प्रचार सीमित हुआ है। लिहाजा डॉक्टर समुदाय के कई लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है। बजाज के अनुसार इसका कारण ब्रिटिश संस्थानों का पारंपरिक नजरिया है।

हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ परामर्शदाता सर्जिकल ऑनकोलॉजिस्ट अजेश राज सक्सेना ने कहा कि यह पहल ब्रिटेन में डॉक्टरों की कमी को ही पूरा नहीं करेगा बल्कि भारत के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के कौशल को भी बढ़ाएगा।

First Published - March 17, 2024 | 10:53 PM IST

संबंधित पोस्ट