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Year-ender 2025: भारत और दुनिया में प्राकृतिक आपदाओं का कहर; इस साल गर्मी, बारिश और भूकंप से मचा हाहाकार

साल 2025 में भारत और दुनिया भर में गर्मी, बारिश, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई।

Last Updated- December 07, 2025 | 5:54 PM IST
Myanmar Earthquake
Representative Image

साल 2025 में दुनिया भर में मौसम और भूकंपीय घटनाओं ने भयावह रूप लिया। तेज गर्मी की लहरों ने शहरों को झुलसा दिया, जबरदस्त बारिश और बाढ़ ने भूस्खलन और नदियों के किनारे बसे इलाकों को तबाह कर दिया, जबकि कई बड़े भूकंपों ने जान-माल का नुकसान किया। किसी भी क्षेत्र को राहत नहीं मिली।

भारत में भी आपदाओं का सीधा असर

भारत ने इस वैश्विक पैटर्न को बखूबी महसूस किया। अप्रत्याशित बिजली गिरना, रिकॉर्ड गर्मी, जोरदार बारिश और चक्रवातों ने पूरे देश के समुदायों, बुनियादी ढांचे और आपातकालीन सेवाओं की परीक्षा ली।

अप्रैल में बिजली का कहर:

ईस्टर्न नमी भरी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के असामान्य संगम के कारण अप्रैल में 12 राज्यों में बड़े पैमाने पर बिजली गिरने की घटनाएं हुईं। ‘डाउन टू अर्थ’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में कम से कम 162 लोगों की मौत हुई।

उत्तर भारत में हीट डोम (अप्रैल-जून):

उत्तर भारत में लगातार गर्मी का प्रभाव बना रहा। दिल्ली में तापमान बार-बार 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, जबकि कई बड़े शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री से ऊपर रहा। इससे लोगों में गंभीर गर्मी-संबंधी समस्याएं उत्पन्न हुईं।

पूर्वोत्तर में प्री-मॉनसून बारिश (मई):

असम, मणिपुर और मिजोरम में अभूतपूर्व प्री-मॉनसून बारिश ने बड़े पैमाने पर बाढ़ और भूस्खलन पैदा किया। मणिपुर में भूस्खलन ने प्रमुख राजमार्गों को काट दिया, जिससे आवागमन बाधित हुआ।

दिल्ली-एनसीआर में भूकंपीय गतिविधि (जुलाई):

10 जुलाई को झज्जर के पास 4.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके अगले दिन 3.7 तीव्रता का झटका महसूस हुआ। दिल्ली-एनसीआर में लोगों ने इन झटकों को व्यापक रूप से अनुभव किया, जिससे भूकंपीय जोखिम की चिंता बढ़ गई।

उत्तराखंड में धाराली क्लाउडबर्स्ट (5 अगस्त):

केहर गड़/धाराली क्षेत्र में अचानक हुई क्लाउडबर्स्ट से तेज बाढ़ और भूस्खलन हुआ। इस घटना में कई घर और बुनियादी ढांचे बह गए, दर्जनों लोग मारे गए या लापता हुए।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवार में क्लाउडबर्स्ट (14 अगस्त):

चोसीटी गांव के मचैल माता यात्रा शिविर में हुई अचानक बारिश और बाढ़ ने शिविर को पूरी तरह बहा दिया और भारी जनहानि हुई।

पंजाब में बाढ़ (अगस्त):

मॉनसून की तीव्र बारिश के कारण पंजाब और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में गंभीर बाढ़ आई। सूतलज और बीस नदियों के बांध टूटने से सैकड़ों गांव पानी में डूब गए। इस बाढ़ ने कृषि को भारी नुकसान पंहुचाया और मानव तथा पशुधन में भी काफी हानि हुई।

चक्रवात मोंथा (अक्टूबर):

मोंथा ने आंध्र प्रदेश तट पर जोरदार हवा और भारी बारिश के साथ दस्तक दी। इससे बड़े पैमाने पर लोगों का सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण किया गया और तटीय जीविकाओं को भारी नुकसान पहुंचा।

चक्रवात दित्वाह (नवंबर–दिसंबर):

तमिलनाडु में दित्वाह ने तेज बारिश और प्रचंड हवाओं से तबाही मचाई। चेन्नई में बाढ़ के कारण परिवहन, स्कूल और ऑफिस ठप्प हो गए।

वैश्विक आपदाएं

लॉस एंजेलिस जंगल की आग (जनवरी):

कैलिफ़ोर्निया के पालिसेड्स और ईटन में लगी जंगल की आग ने भारी आर्थिक नुकसान किया और वर्ष की शुरुआत में चरम मौसम की चेतावनी दी।

म्यांमार भूकंप (मार्च):

7.7 तीव्रता का भूकंप मंडले के पास आया, जिसमें 3,000 से ज्यादा लोग मारे गए और थाईलैंड, चीन व वियतनाम के कई हिस्सों में नुकसान हुआ। यह 2025 का सबसे घातक भूकंपीय आपदा था।

यूरोप में हीटवेव (अप्रैल–सितंबर):

दक्षिण और पश्चिम यूरोप में लगातार 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान रहा। कई हजार लोग गर्मी से मर गए और स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी दबाव पड़ा।

मोकवा बाढ़, नाइजीरिया (मई):

तीव्र बारिश और नालियों के फेल होने के कारण मोकवा में फ्लैश फ्लड्स आए, जिसमें सैकड़ों लोग मरे और कई लापता हुए।

पाकिस्तान में बाढ़ (जून–सितंबर):

तीव्र मॉनसून बाढ़ ने पाकिस्तान को बुरी तरह प्रभावित किया। लाखों लोग प्रभावित हुए और 1,000 से अधिक की मौत हुई। खैबर पख्तूनख्वा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा।

कामचटका भूकंप और सूनामी (29 जुलाई):

रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पास 8.8 तीव्रता का भूकंप आया। इसके साथ क्षेत्र में सात ज्वालामुखियों के एक साथ विस्फोट और पैसिफिक क्षेत्र में सूनामी अलर्ट जारी हुआ।

अफगानिस्तान में दो भूकंप (अगस्त और नवंबर):

31 अगस्त को कुनार प्रांत में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की मौत हुई। इसके बाद उत्तर में बल्ख प्रांत में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया।

दक्षिण-पूर्व एशिया में बाढ़ और टाइफून (अक्टूबर अंत):

वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और फिलीपींस में मॉनसून बाढ़ आई। इंडोनेशिया और थाईलैंड में साइक्लोन से भारी नुकसान हुआ, श्रीलंका में डिटवाह के कारण विस्थापन और मौतें हुईं, वहीं सुपर टाइफून फंग-वॉन्ग ने फिलीपींस, ताइवान और जापान को तहस-नहस किया।

2025 ने साबित कर दिया कि जलवायु बदलाव और प्राकृतिक आपदाएं अब वैश्विक स्तर पर गंभीर खतरा बन गई हैं, और तैयारी तथा आपातकालीन प्रबंधन की आवश्यकता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

First Published - December 7, 2025 | 5:54 PM IST

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