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उत्तरकाशी टनल: सुरक्षा ऑडिट, टूटे ढांचे की मरम्मत के बाद फिर होगी शुरू सिलक्यारा सुरंग परियोजना

सिलक्यारा सुरंग केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी 900 किलोमीटर लंबी एवं सभी मौसम में इस्तेमाल में सक्षम 'चार धाम यात्रा रोड' का हिस्सा है।

Last Updated- November 29, 2023 | 10:35 PM IST
Members of rescue teams stand at the entrance of a tunnel where road workers are trapped after a portion of the tunnel collapsed in Uttarkashi
Representative Image

उत्तराखंड में 4.5 किलोमीटर लंबी सिलक्यारा सुरंग परियोजना जरूरी सुरक्षा ऑडिट और टूटे ढांचे की मरम्मत के बाद फिर से शुरू होगी। सड़क मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सिलक्यारा सुरंग केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी 900 किलोमीटर लंबी एवं सभी मौसम में इस्तेमाल में सक्षम ‘चार धाम यात्रा रोड’ का हिस्सा है। सरकार की 12 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वकांक्षी परियोजना का मकसद उत्तराखंड के चार धाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के बीच हर मौसम के अनुकूल आवागमन मुहैया कराना है।

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उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने की वजह से 41 मजदूर सुरंग के भीतर फंस गए थे, जिन्हें एक बचाव दल ने मंगलवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सुरंग के भीतर पिछले 17 दिनों से फंसे मजदूरों को तमाम कठनाइयों के बावजूद बाहर निकाल लिया गया।

बचाव दल का हिस्सा रहे अधिकारी ने बताया, ”सिलक्यारा सुरंग का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। इस बीच टूटे ढांचे की मरम्मत और उसे ठीक करने की कोशिश भी की जाएगी।”

उन्होंने कहा, ”सभी जरूरी एहतियात बरते जाएंगे और 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग परियोजना को फिर शुरू किया जाएगा।” जोजिला सुरंग परियोजना के प्रमुख हरपाल सिंह ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग के एक हिस्से के ढहने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, ”सुरंग के एक हिस्से के ढहने के पीछे खराब भूवैज्ञानिक जांच, ग्राउंड सपोर्ट प्रणालियों को सही तरीके से लागू न करना, निर्माण के दौरान गलतियां, खराब डेटा निगरानी और निर्माण के दौरान खराब शमन उपाय या खराब पर्यवेक्षण नियंत्रण जैसे कारण हो सकते हैं। ”

सिंह का विचार है कि सभी राजमार्ग और रेल सुरंगों की योजनाओं के तहत मुख्य सुरंग के समानांतर एक ‘एस्केप सुरंग’ (बाहर निकलने की सुरंग) भी योजना बनाई जानी चाहिए।

पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था में संतुलन की जरूरत: धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था में संतुलन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने सिलक्यारा सुरंग हादसे के बाद ऐसी सभी परियोजनाओं की समीक्षा का निर्णय लिया है । धामी ने बताया कि उनकी दीवाली मंगलवार को आई जब सुरंग के अंदर 16 दिन तक फंसे रहे 41 श्रमिकों को बाहर निकाला गया । उन्होंने कहा कि श्रमिकों के निकलने से वह उतने ही प्रसन्न हैं जितना कि उनके परिवारवाले हैं।

धामी ने कहा, ‘मेरी दीवाली, इगास या देव दीवाली कल हुई जब श्रमिक बाहर आए।’ उत्तराखंड में दीवाली के दस दिन बाद इगास मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि श्रमिक उनके परिवार की तरह हैं। उन्होंने कहा, ‘आखिरकार वे हमारे लिए काम करते हैं, देश के लिए काम करते हैं।’ मुख्यमंत्री ने सफल बचाव अभियान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों, देश विदेश के विशेषज्ञों तथा स्थानीय बौखनाग देवता का भी आभार जताया। उन्होंने कहा, ‘मैंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में कई चुनौतियों का सामना किया है लेकिन यह अब तक सबसे कड़ी चुनौती थी।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की दैनिक निगरानी और बचाव कार्यों के लिए बड़ी मशीनें उपलब्ध करवाकर दिए गए समर्थन ने उन्हें बहुत ताकत दी। उन्होंने सुरंग में फंसे रहने के दौरान जबरदस्त धैर्य का परिचय देने के लिए भी श्रमिकों की तारीफ की। धामी ने कहा कि श्रमिकों से मिले इस भरोसे कि वे ठीक हैं और बचाव दलों द्वारा कार्य पूरा किए जाने तक इंतजार करने के लिए तैयार हैं, से भी उनके संकल्प को और मजबूती मिली।

First Published - November 29, 2023 | 6:54 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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