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चहुंमुखी विकास की रफ्तार: योगी सरकार के नेतृत्व में 1 ट्रिलियन डॉलर की ओर उत्तर प्रदेश

बुनियादी ढांचा, कानून व्यवस्था, उद्योग, एमएसएमई और निवेश अनुकूल नीतियों के जरिए योगी सरकार उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है

Last Updated- December 29, 2025 | 10:17 PM IST
UP Deputy CM Brajesh Pathak
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में बिज़नेस स्टैंडर्ड ‘समृद्धि’ कार्यक्रम के दौरान बताया कि निर्यात, विनिर्माण और छोटे उद्योगों के जरिये आ र्थिक वृद्धि तेज करने के लिए प्रदेश सरकार ने किस प्रकार कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किया

तकरीबन 24 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश इकलौता राज्य है, जहां 56 फीसदी आबादी कामकाजी उम्र की है और इस लिहाज से सबसे युवा आबादी वाला प्रदेश भी यही है। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार इसका भरपूर फायदा उठाने और प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद बनाते हुए लगातार ऐसी नीतियां ला रही है, जिनका असर वित्त, बुनियादी ढांचा, परिवहन, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नजर आ रहा है।

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बिज़नेस स्टैंडर्ड के समृद्धि कार्यक्रम में शिरकत करने आए प्रदेश सरकार के प्रमुख मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों का कहना था कि मजबूत कानून-व्यवस्था के साथ जनहितैषी नीतियों ने प्रदेश के चहुंमुखी विकास को रफ्तार दी है।

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ‘समृद्धि’ के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति पर खास जोर देते हुए कहा कि कानून व्यवस्था लचर हो तो कोई निवेशक या कारोबारी राज्य में नहीं झांकता।

उन्होंने कहा, ‘इस बात को समझते हुए योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहली चोट प्रदेश में वर्षों से चल रहे माफियाराज पर की गई। गुंडाराज का खात्मा होने पर बुनियादी ढांचे का विकास करना और राजस्व लाना बहुत मुश्किल नहीं रह गया। जैसे ही अराजकता खत्म की गई और उद्योगों के लिए माकूल बुनियादी ढांचा तथा नीतियां तैयार की गईं, देश-दुनिया की कंपनियां उत्तर प्रदेश की ओर आने लगीं। इसका पहला प्रमाण हमें वैश्विक निवेशक सम्मेलन में दिखा, जहां हजारों करोड़ रुपये के निवेश के वादे हमारे साथ किए गए और उनमें से कई परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी हैं।’

पुख्ता बुनियादी ढांचा

उत्तर प्रदेश में पिछले 8-9 साल में बुनियादी ढांचे का अच्छा विकास हुआ है। राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि सड़कों और खास तौर पर एक्सप्रेसवे के मामले में प्रदेश ने काफी तरक्की की है। लगभग 302 किलोमीटर लंबाई वाले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गिनती देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में होती है। निर्यात करने वाले प्रमुख केंद्रों और कॉरिडॉर को जोड़ते हुए बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे 603 किमी लंबा होगा और शायद देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे रहेगा। प्रदेश में बने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे ने पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के निर्यात केंद्रों से माल का आवाजाही बेहद आसान कर दी है।

इन सभी का जिक्र करते हुए पाठक ने कहा कि उनकी सरकार आने से पहले उत्तर प्रदेश में सड़कें खस्ताहाल थीं और बिजली गुल ही रहती थी। मगर आज देश के भीतर सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क उत्तर प्रदेश में ही है। उन्होंने बताया, ‘देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 37 फीसदी हिस्सा इस प्रदेश में है, जिसे बढ़ाकर 2047 तक 50 फीसदी करना हमारी सरकार का लक्ष्य है।’

प्रदेश में हवाई अड्डों के विकास की ओर ध्यान खींचते हुए पाठक ने कहा कि 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना कनेक्टिविटी के बगैर पूरा नहीं हो सकता। इसीलिए योगी सरकार जल-थल-आकाश तीनों रास्तों पर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इस समय 16 हवाई अड्डों के साथ उत्तर प्रदेश सबसे तेज दौड़ रहा है। यहां 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहले से हैं और जल्द ही पांचवां जेवर हवाई अड्डा भी शुरू होने वाला है। इसी तरह जलमार्ग (वाटरवेज) के मामले में भी उत्तर प्रदेश बहुत आगे है, जहां देश का पहला अंतर्देशीय जलमार्ग प्रयागराज से शुरू किया गया है और गंगा नदी के रास्ते पश्चिम बंगाल में हल्दिया बंदरगाह तक जाता है।

मंत्री ने बताया कि देश का पहला मल्टीमोडल टर्मिनल भी इसी जलमार्ग पर वाराणसी में बना है और दस नए जलमार्ग जल्द ही उत्तर प्रदेश की काया बदल देंगे। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल और जलमार्ग के जरिये कनेक्टिविटी इतनी तेजी से बढ़ने के कारण उत्तर प्रदेश में निवेश की भी बाढ़ आ गई है।

बिजली का जिक्र करते हए उप मुख्यमंत्री ने कहा, ‘एक समय था जब बिजली की जबरदस्त किल्लत से प्रदेश जूझता था। बाहर से आने वाले अक्सर पूछते थे कि अभी रात की बिजली कट रही है या दिन की। मगर हमारी सरकार ने ऐसी शर्मनाक स्थिति से उबरते हुए ऐसी स्थिति कर दी है कि लोगों को याद ही नहीं रहता कि पिछली बार बिजली कब गई थी।’

इससे आम जनता को ही नहीं उद्योग-धंधों को भी बहुत फायदा हुआ है, जिन्हें निर्बाध बिजली आपूर्ति की वजह से डीजल जेनसेट पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता। लागत में इस कमी से उनकी कमाई भी काफी बढ़ी है।

बड़ी आबादी से बड़ी ताकत

उत्तर प्रदेश बहुत सघन आबादी वाला राज्य है और यहां की आबादी करीब 24 करोड़ है। पाठक ने इसे प्रदेश की बहुत बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि यहां करीब 56 फीसदी आबादी कामकाजी उम्र की है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बहुत ताकत देने वाली है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आबादी की वजह से उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा उपभोक्ताओं वाला राज्य भी है और इसीलिए कंपनियों-कारोबारियों का सबसे चहेता भी है। इतनी बड़ी आबादी, पुख्ता कानून-व्यवस्था और बेहतरीन बुनियादी ढांचा देखकर कंपनियां यहां कारोबार और निवेश करने आ रही हैं, जिसका फायदा रोजगार के रूप में मिलेगा।

इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रदेश के आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने से पहले 14,000 करोड़ रुपये राजस्व कमाने वाले उनके विभाग ने 2024-25 में 52,573 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व दिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि 2025-26 के अंत तक राजस्व 63,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाएगा।

इसका सेहरा कानून-व्यवस्था की मजबूती और आबकारी विभाग की चुस्ती के सिर बांधते हुए अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश अब शीरा और एथनॉल उत्पादन में देश का अव्वल राज्य बन गया है।

उन्होंने कहा, ‘ऐसी तमाम पहलों और नीतियों ने ही उत्तर प्रदेश को देश का ‘ग्रोथ इंजन’ बना दिया है।  मगर 2017 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो चुनौतियों का अंबार लगा हुआ था। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) बहुत कम था, उत्पादन की स्थिति खराब थी, बुनियादी ढांचे की किल्लत थी, निवेश नहीं आ रहा था और कानून व्यवस्था दयनीय थी। मगर सरकार की मेहनत का ही नतीजा है कि 2017 में उत्तर प्रदेश का जो जीएसडीपी 13.30 लाख करोड़ रुपये था अब 30 लाख करोड़ रुपये हो गया है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक 35 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने की उम्मीद है।’

ठोस नीतियों का सहारा

उद्योगों पर जोर देने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीति किसी से छिपी नहीं है। देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य होने और देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8 फीसदी से ज्यादा योगदान देने के कारण उत्तर प्रदेश के लिए ऐसी नीतियां बनाना जरूरी भी है। आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश से निर्यात में सालाना 18 फीसदी इजाफा हो रहा है।

यहां से 2023-24 में 21 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था, जिसे 2029-30 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने के इरादे से योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्द्धन नीति 2025-30 बनाई और लागू की है। इसका मकसद उत्तर प्रदेश को पूरी दुनिया के लिए निर्यात का जाना-माना केंद्र बनाना है।

अग्रवाल ने इनका जिक्र करते हुए बताया कि 2017 में प्रदेश में उद्योगों की संख्या करीब 13,000 थी, जो अब 27,295 तक पहुंच चुकी है। दूसरे प्रदेशों और विदेश से उद्यमी यहां आ रहे हैं और प्रदेश के छोटे उद्यमियों समेत समूचे उद्योग को दूरदराज तक कारोबार करने का मौका मिल रहा है। उद्योग आने से रोजगार भी तेजी से बढ़ा है और 2017 में 6.8 फीसदी की बेरोजगारी दर 2025 में घटकर 2.4 फीसदी ही रह गई है। 90 लाख रोजगार तो एमएसएमई में ही मिले हैं।’

अग्रवाल ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लिए प्रदेश को विनिर्माण पर और भी जोर देना होगा। फिलहाल प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की 15 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे 2047 तक 35 फीसदी पर ले जाने का लक्ष्य सरकार का है। इसके लिए उद्योग को भी हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ाना होगा, जिसके लिए सरकार हरमुमकिन कोशिश कर रही है।

रोजगार में इजाफा

उत्तर प्रदेश सरकार के इन्वेस्ट यूपी पोर्टल से मिले आंकड़े बताते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर लगातार जोर दिए जाने के कारण नोएडा के आसपास सैमसंग, ओपो जैसी कंपनियों के कारखाने नजर आ रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इसी साल उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण नीति 2025 भी लागू की है। इसके अलावा केंद्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने भी सेमीकंडक्टर नीति लागू की है, जिसके तहत पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज पर सब्सिडी, जमीन पर छूट, स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफी जैसी तमाम रियायतें देकर सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को आकर्षित किया जा रहा है ताकि प्रदेश में उद्योग आएं और रोजगार बढ़े।

उन्होंने कहा, ‘पिछली सरकारों के जमाने में लोग उत्तर प्रदेश में आने से डरते थे और अब ब्रह्मोस मिसाइल भी इसी प्रदेश में बन रही है क्योंकि प्रदेश की सरकार ने डिफेंस क्लस्टर पर बहुत जोर दिया है।’ मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में लखनऊ और हरदोई के बीच टेक्सटाइल क्लस्टर बनाने का ऐलान किया है। इसी तरह के क्लस्टर लेदर, फुटवियर और हेल्थकेयर जैसे उद्योगों के लिए भी लाने की तैयारी है। इनसे न केवल निवेश आएगा बल्कि रोजगार भी तेजी से बढ़ेगा।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर आई हस्तियों ने प्रदेश सरकार की कुछ और उपलब्धियों और उनकी अहमियत पर बात की। मसलन कारोबारी सुगमता में उत्तर प्रदेश इस समय देश में दूसरे स्थान पर है और लगातार बेहतर करता जा रहा है। इसी तरह योगी आदित्यनाथ सरकार का शुरू किया निवेश मित्र पोर्टल एक ही स्थान पर सभी प्रकार की मंजूरियां देने (सिंगल विंडो क्लियरेंस) वाली सबसे बड़ी प्रणालियों में शुमार किया जाता है। सरकार ने बीस से अधिक क्षेत्रों के लिए नीतियां भी बनाई हैं, जिनका असर उन क्षेत्रों के विकास और निवेश की आवक में नजर आता है। देश के भीतर सबसे ज्यादा एमएसएमई उत्तर प्रदेश के भीतर ही हैं, जिसका श्रेय योगी सरकार द्वारा 2023 में शुरू की गई उद्यमी मित्र योजना को जाता है।

बदली परिवहन की सूरत

‘समृद्धि’ के दौरान उत्तर प्रदेश के तेजी से बढ़ते परिवहन और पर्यटन क्षेत्रों पर भी विस्तार से बातचीत हुई। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि किसी समय खस्ताहाल रहा उत्तर प्रदेश परिवहन निगम अब देश के उन चुनिंदा परिवहन निगमों में है, जो मुनाफे में चल रहा है और पिछले दो वित्त वर्ष से मुनाफा कमा रहा है। मंत्री ने कहा, ‘मेरी योजना है कि 2027 में जब इस सरकार का कार्यकाल समाप्त हो तो

हमारे परिवहन निगम के पास कम से कम 10,000 करोड़ रुपये की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) हो और माली हालत मजबूत हो ताकि आगे कोई संकट नहीं आए।’

उन्होंने बताया कि इस कायापलट के लिए सरकार निजी क्षेत्र की भी मदद ले रही है। चाहे बस डिपो का आधुनिकीकरण हो या लगभग 13,000 गांवों को नियमित बस सेवा से जोड़ना हो या इलेक्ट्रिक बसें चलाकर प्रदूषण के खिलाफ मुहिम में साथ देना हो, सभी में निजी क्षेत्र का साथ लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जिन इलाकों में बसों की समुचित कनेक्टिविटी नहीं है, वहां पर्याप्त बसें चलाने के लिए 1,540 नए मार्गों की निविदा जारी की गई है, जिसमें निजी क्षेत्र भी सक्रिय भागीदारी कर रहा है। 

दयाशंकर सिंह ने कहा, ‘परिवहन विभाग संभालने के बाद जब मैंने निजी कंपनियों के साथ बैठक की तो उनकी दिक्कतें पता चलीं। पिछली सरकार की नीतियों में उन्हें केवल तीन साल का पट्टा मिलता था जो बहुत कम था। साथ ही 2 फीसदी किराया लिया जाता था, जो उन्हें भारी पड़ता था। इसके अलावा उन्हें कर्ज भी नहीं लेने दिया जाता था।’ उन्होंने कहा कि बैठक के फौरन बाद नीतियां बदल दी गईं। अब निजी परिवहन कंपनियों को 90 साल का पट्टा दिया जाता है, केवल 0.5 फीसदी किराया लिया जाता है और कर्ज लेने दिया जाता है। इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने के लिए तो परिवहन विभाग मुनाफे का केवल 3 फीसदी अपने पास रखकर बाकी सब निजी कंपनी को दे देता है। लेकिन उन बसों में कंडक्टर सरकारी होता है, जिसके जरिये रूट और परिचालन पर सरकार का नियंत्रण रहता है।

पर्यटन में बड़ी छलांग

अयोध्या में राम मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडॉर बनने और लखनऊ, सोनभद्र जैसे कई धरोहर स्थल विकसित किए जाने से प्रदेश में देसी-विदेशी पर्यटकों की आमद काफी बढ़ी है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने एक सत्र के दौरान प्रदेश की सुधरी हुई कानून-व्यवस्था को पर्यटन क्षेत्र के कायापलट का बुनियादी कारण बताया। इसके अलावा उन्होंने पर्यटकों और कारोबारियों के अनुकूल पर्यटन नीतियों तथा लगातार बेहतर होती परिवहन सुविधाओं को भी इसका श्रेय दिया। जयवीर ने कहा कि पर्यटन ऐसे चुनिंदा उद्योगों में है, जहां एक रोजगार आता है तो उसके साथ होटल, भोजन, परिवहन जैसे दूसरे उद्योगों में छह रोजगार तैयार हो जाते हैं।

मंत्री ने उद्यमियों को बढ़ावा देने की अपने विभाग की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में पांच सितारा होटल के लिए ही नहीं बल्कि छोटे होमस्टे शुरू करने के लिए भी 25 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा जमीन पर सब्सिडी, नए निवेशकों को तय समय के भीतर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जैसी कई पहल इस क्षेत्र में नए लोगों को आने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश के बेहतर बुनियादी ढांचे, मजबूत कानून-व्यवस्था और लगातार बढ़ते पर्यटन स्थलों के दम पर उनका विभाग कुछ ही साल में राज्य के राजस्व में सबसे ज्यादा योगदान करने लगेगा।

समृद्धि कार्यक्रम के दौरान ‘नए औद्योगिक क्षेत्र व एमएसएमई के लिए संभावनाएं’ विषय पर पहली परिचर्चा में यह बात उभरकर सामने आई कि उत्तर प्रदेश सरकार उद्योगों के लिए जिस सक्रियता से काम कर रही है, उसी का नतीजा मजबूत वृद्धि और लगातार निवेश की शक्ल में दिख रहा है। मंच पर प्रदेश सरकार के आला अधिकारियों ने बताया कि मवेशियों और ग्रामीण लघु उद्योगों को विकास की नई कुंजी माना जा रहा है, जिसके लिए सरकार दुग्ध प्रसंस्करण, पोल्ट्री, मत्स्यपालन पर खास जोर दे रही है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र और लघु उद्योगों को सहारा देने के लिए ऋण आवंटन भी तेजी से बढ़ाया गया है।

‘इन्फ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संतुलन’ विषय पर दूसरी परिचर्चा में विशेषज्ञों ने पर्यावरण को दुरुस्त रखने के लिए ‘सर्कुलर इकॉनमी’ के सरकार के विचार की सराहना की और कहा कि उद्योग भी धीरे-धीरे खुद को इसके लिए ढाल रहा है। कृषि या किसी उद्योग से निकले कचरे को दूसरे उद्योग या गतिविधि में कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करना सर्कुलर इकॉनमी की खासियत है, जिससे प्रदूषण पर काफी अंकुश लग सकता है। पराली जलाने के बजाय उसके पेलेट बनाकर ताप बिजली संयंत्र में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करना या फ्लाई ऐश को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करना इसके कारगर उदाहरण हैं।

First Published - December 29, 2025 | 9:44 PM IST

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