उत्तर प्रदेश में उद्योगों को प्रोत्साहन देने का ढांचा व्यापक है, जो निवेशकों को आकर्षित करता है। यहां औद्योगिक विकास के लिए सेक्टोरल नीतियां काफी सहायक रही हैं। अब राज्य कई हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू करने के लिए शिलान्यास कार्यक्रम करने जा रहा है। सिद्धार्थ कलहंस के साथ साक्षात्कार में उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचा एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) दीपक कुमार ने भावी योजनाओं और नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। प्रमुख अंश-
उत्तर प्रदेश को बीते कुछ सालों में काफी मात्रा में निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसके चलते आज यूपी में औद्योगिक भूखंडों की भारी मांग है। क्या हमारे पास उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त ‘लैंड बैंक’ उपलब्ध है?
यह सच है कि वर्तमान समय में औद्योगिक भूखंडों की मांग बढ़ी है और बड़ी तादाद में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो रही हैं। हम इस मांग को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में हमारे पास पूरे राज्य में 50,000 एकड़ से अधिक का लैंड बैंक है। लेकिन ये बात भी सही है कि ‘रेडी टू मूव’ भूमि कम है और इन उपलब्ध ग्रीनफील्ड लैंड बैंकों में ‘ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर’ विकसित किया जा रहा है। लैंड बैंक तैयार करने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों को लक्ष्य दिया है। पिछले समय की तुलना में वर्तमान में लैंड बैंक का आकार काफी बढ़ा है। साथ ही, औद्योगिक भूखंडों का आवंटन अब पहले से अधिक पारदर्शी हो गया है।
सेक्टोरल यानी क्षेत्र विशेष के लिए तैयार नीतियों ने किस तरह निवेश आकर्षित करने में मदद की है?
औद्योगिक निवेश एवं रोजगार सृजन नीति के अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नीतियां लेकर आई है। ये नीतियां उन सेक्टरों के लिए जरूरत के आधार पर रियायतें, छूट और प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। वर्तमान में हमारे पास इस तरह की 34 नीतियां हैं और इन सभी ने निवेशकों को नीति आधारित प्रोत्साहन प्रदान करने में मदद की है। अन्य राज्यों के साथ तुलना करने पर पता चलता है कि हमारा प्रोत्साहन ढांचा बहुत व्यापक है। इस व्यवस्था ने विशिष्टसेक्टरों के कई उद्योगों की बड़ी मदद की है।
उत्तर प्रदेश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और ‘फॉर्च्यून 500’ कंपनियों के निवेश के लिए नीति शुरू की गई है। अब तक कैसा रिस्पांस रहा है?
उत्तर प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में से है, जिसने एफडीआई और फॉर्च्यून 500 कंपनियों के लिए एक अलग नीति बनाई और उसे लागू किया है। इसका उद्देश्य इन बड़ी कंपनियों के प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देना है। फॉर्च्यून 500 और एफडीआई नीति को लेकर रिस्पांस बेहद शानदार रहा है। हमारे पास एफडीआई और फॉर्च्यून 500 कंपनियों के द्वारा किए जाने वाले निवेश की एक बेहतर ‘पाइपलाइन’ मौजूद है। हम कई बड़ी विदेशी कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। हमारे कुल निवेश पोर्टफोलियो में एफडीआई और फॉर्च्यून 500 कंपनियों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे उद्योग-विहीन क्षेत्रों को भी आज की तारीख में बड़ी तादाद में निवेश प्रस्ताव मिल रहे हैं, इसके क्या कारण रहे हैं?
स्टील, सीमेंट, ब्रुअरीज, एफएमसीजी, ऊर्जा जैसे कुछ क्षेत्रों को पूर्वांचल और बुंदेलखंड में ‘फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज’ का साफ लाभ मिलता दिख रहा है। ये एक बड़ा कारण है कि अब हमें इन क्षेत्रों में खासा निवेश मिल रहा है। अगर आप देखें तो 2018 के इन्वेस्टर्स समिट और 2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में बड़ी संख्या में कंपनियों ने पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड क्षेत्र में निवेश करने में रुचि दिखाई थी। इसके अलावा जीएसटी प्रतिपूर्ति और जमीन पर सब्सिडी जैसे आकर्षक प्रोत्साहनों ने यूपी के इन क्षेत्रों में काफी मात्रा में निवेश को आकर्षित करने का काम किया है।
अगले ‘ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की क्या स्थिति है और तैयारियां क्या हैं?
अब तक उत्तर प्रदेश में चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) आयोजित की जा चुकी हैं। पहली जीबीसी से लेकर चौथी जीबीसी तक लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। यहां परियोजनाएं लगाने वाली कुछ कंपनियों ने तो उत्पादन भी शुरू कर दिया है। अब जीबीसी-5 की तैयारी चल रही है। हमें उम्मीद है कि यह एक बड़ा आयोजन होगा। पांचवी जीबीसी के लिए पहले ही लगभग 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। विभिन्न विभागों और जिलों को लक्ष्य दिए गए हैं। उनमें से कुछ ने समय से पहले ही इसे हासिल कर लिया है, जबकि अन्य इस पर काम कर रहे हैं। बहुत जल्द जीबीसी-5 का भव्य आयोजन किया जाएगा।