facebookmetapixel
IT शेयरों में कोहराम: AI के बढ़ते प्रभाव से हिला निवेशकों का भरोसा, एक हफ्ते में डूबे ₹6.4 लाख करोड़NBFCs के लिए RBI की बड़ी राहत: ₹1000 करोड़ से कम संपत्ति वाली कंपनियों को पंजीकरण से मिलेगी छूटRBI Monetary Policy: रीपो रेट 5.25% पर बरकरार, नई GDP सीरीज आने तक ‘तटस्थ’ रहेगा रुखट्रंप ने फिर किया दावा: मैंने रुकवाया भारत-पाकिस्तान के बीच ‘परमाणु युद्ध’, एक दिन में दो बार दोहरायाइस्लामाबाद में बड़ा आत्मघाती हमला: नमाज के दौरान शिया मस्जिद में विस्फोट, 31 की मौतखरगे का तीखा हमला: पीएम के 97 मिनट के भाषण में कोई तथ्य नहीं, सवालों से भाग रही है सरकारलोक सभा में गतिरोध बरकरार: चीन का मुद्दा व सांसदों के निलंबन पर अड़ा विपक्ष, बजट चर्चा में भी बाधाडिजिटल धोखाधड़ी पर RBI का ऐतिहासिक फैसला: अब पीड़ितों को मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजाPariksha Pe Charcha 2026: PM मोदी ने छात्रों को दी सलाह- नंबर नहीं, स्किल व बेहतर जीवन पर दें ध्याननागालैंड में क्षेत्रीय प्राधिकरण के गठन को मिली त्रिपक्षीय मंजूरी, PM मोदी ने बताया ‘ऐतिहासिक’

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से गतिरोध खत्म करे राज भवन: सुप्रीम कोर्ट

प्रधान न्यायाधीश ने संविधान के अनुच्छेद 200 का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल को पहली बार में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित रखना चाहिए।

Last Updated- December 01, 2023 | 11:10 PM IST
Supreme Court

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को व्यवस्था दी कि राज्य विधानसभा द्वारा पारित और पुन: अपनाए गए विधेयकों को राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए नहीं भेजा जा सकता। न्यायालय ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि से कहा कि मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के साथ बैठक करें और राज्य विधानसभा द्वारा पारित 10 लंबित विधेयकों पर बने गतिरोध को सुलझाएं। रवि और स्टालिन के बीच ऐसे अनेक मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा के पीठ ने राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी की दलीलों पर संज्ञान लिया कि राज्यपाल ने अब पुन: अपनाए गए विधेयकों को राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेज दिया है।

पीठ ने कहा, ‘हम चाहेंगे कि राज्यपाल गतिरोध को सुलझा लें। यदि राज्यपाल मुख्यमंत्री के साथ गतिरोध को सुलझा लेते हैं तो हम इसे सराहेंगे। मुझे लगता है कि राज्यपाल को मुख्यमंत्री को आमंत्रित करना चाहिए और वे बैठ कर इस बारे में चर्चा करें।’

राज्यपाल के कार्यालय पर ‘संवैधानिक हठ’ का आरोप लगाते हुए सिंघवी ने कहा कि राज भवन ने विधेयकों को लंबे समय तक लंबित रखने के बाद 28 नवंबर को राष्ट्रपति को भेजा जो संवैधानिक नियमों का उल्लंघन है।

राज्यपाल के कार्यालय की ओर से पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने दलील दी कि जब राज्यपाल किसी विधेयक को विधानसभा को वापस भेजते हैं तो वह मंजूरी को रोक नहीं रहे हैं बल्कि केवल सदन से उस पर पुनर्विचार करने को कह रहे हैं। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि जब विधानसभा कहती है कि वह विधेयक पर अपना रुख नहीं बदलेगी तो राज्यपाल इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेज सकते हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने संविधान के अनुच्छेद 200 का जिक्र करते हुए कहा, ‘राज्यपाल को पहली बार में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित रखना चाहिए। अगर उन्होंने इसे विधानसभा को वापस भेज दिया है और इसे पुन: अपनाया गया है तो राज्यपाल इसे राष्ट्रपति को नहीं भेज सकते।’

First Published - December 1, 2023 | 11:10 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट