facebookmetapixel
16वां वित्त आयोग: राज्यों की कर हिस्सेदारी 41% बरकरार, जीडीपी योगदान बना नया मानदंडBudget 2026: मजबूत आर्थिक बुनियाद पर विकास का रोडमैप, सुधारों के बावजूद बाजार को झटकाBudget 2026: TCS, TDS और LSR में बदलाव; धन प्रेषण, यात्रा पैकेज पर कर कटौती से नकदी प्रवाह आसानBudget 2026: खाद्य सब्सिडी में 12.1% का उछाल, 81 करोड़ लोगों को मिलता रहेगा मुफ्त राशनBudget 2026: पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ेगी खेती, काजू, नारियल और चंदन जैसी नकदी फसलों पर जोरBudget 2026: मुश्किल दौर से गुजर रहे SEZ को बड़ी राहत, अब घरेलू बाजार में सामान बेच सकेंगी इकाइयांBudget 2026: व्यक्तिगत करदाताओं के लिए जुर्माने और अ​भियोजन में ढील, विदेश परिसंपत्तियों की एकबार घोषणा की सुविधाBudget 2026: बुनियादी ढांचे को रफ्तार देने के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का आवंटन, कैपेक्स में भारी बढ़ोतरीBudget 2026: पहली बार ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंचा हेल्थ बजट, ‘मिशन बायोफार्मा शक्ति’ का आगाजविनिवेश की नई रणनीति: वित्त वर्ष 2027 में 80,000 करोड़ जुटाएगी सरकार, जानें क्या है पूरा रोडमैप

Mad Over Donuts: मैड ओवर डोनट्स के खिलाफ 50 करोड़ के नोटिस पर रोक

जीएसटी वर्गीकरण विवाद में कर्नाटक हाई कोर्ट ने डोनट्स और केक उत्पादों के लिए राहत दी

Last Updated- April 28, 2025 | 10:54 PM IST
Mad-Over-Donuts

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ‘मैड-ओवर-डोनट्स’ आउटलेट के खिलाफ 50 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी नोटिस पर शुक्रवार को अस्थायी तौर पर रोक लगा दी। यह नोटिस डोनट्स, केक और अन्य बेकरी उत्पादों के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित वर्गीकरण विवाद से जुड़ा हुआ है।

न्यायमूर्ति एसआर कृष्ण कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए सवाल उठाया कि क्या इन उत्पादों को रेस्तरां सेवाओं के तहत वर्गीकृत किया जाना चाहिए (जिन पर रियायती 5 प्रतिशत जीएसटी दर लागू है) या बेकरी सामान के रूप में अलग कर व्यवस्था लागू की जा सकती है। सोमवार को आदेश की एक प्रति अपलोड की गई।

हिमेश फूड्स (मैड ओवर डोनट्स) की ओर से अधिवक्ता अभिषेक ए रस्तोगी ने अदालत को बताया कि डोनट्स और केक जैसे खाद्य उत्पादों की आपूर्ति को सीजीएसटी अधिनियम के तहत सेवाओं की समग्र आपूर्ति माना जाता है। उन्होंने कहा कि रेस्तरां, भोजनालय, कैंटीन और मेस में भोजन की व्यवस्था (चाहे वह परिसर में ही खाया जाए या बाहर ले जाया जाए) रेस्तरां सेवाओं की श्रेणी में आती है और इस पर 5 फीसदी की दर से कम दर से जीएसटी लगाया जाता है।
उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय के हाल के अंतरिम आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें उनके तर्क का समर्थन करते हुए कहा गया था कि ऐसी आपूर्ति को जीएसटी कानून के तहत सेवाएं माना जा सकता है।

इन तर्क पर गौर करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि चूंकि कर अधिकारियों ने बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष वादा किया था कि वर्गीकरण मुद्दे पर विचार करने तक कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसलिए यही बात यहां भी लागू होनी चाहिए। अदालत ने न्यायिक निरंतरता के महत्व पर जोर दिया और सहमति जताई कि मामले के लंबित रहने के दौरान कर्नाटक के जीएसटी अधिकारी कोई भी जल्दबाजी या जबरन कदम नहीं उठाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 6 जून को होगी।

First Published - April 28, 2025 | 10:54 PM IST

संबंधित पोस्ट