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ISRO की अंतरिक्ष में बड़ी छलांग, GSLV-F12 से नैविगेशन सैटेलाइट NVS-01 को उसकी ऑर्बिट में स्थापित किया

Last Updated- May 29, 2023 | 1:15 PM IST
ISRO's Big Leap into Space, GSLV-F12 Places Navigation Satellite NVS-01 in Its Orbit
PTI

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) के जरिए दूसरी पीढ़ी के नैविगेशन सैटेलाइट NVS-01 का सोमवार को सफल प्रक्षेपण किया। NVS-01 देश की क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली को मजबूत करेगा और सटीक एवं तात्कालिक नौवहन सेवाएं मुहैया कराएगा।

चेन्नई से करीब 130 किलोमीटर दूर यहां स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से 51.7 मीटर लंबे तीन चरणीय GSLV रॉकेट को 27.5 घंटे की उल्टी गिनती समाप्त होने पर प्रक्षेपित किया गया। यह पूर्व निर्धारित समय पूर्वाह्न 10 बजकर 42 मिनट पर साफ आसमान में अपने लक्ष्य की ओर रवाना हुआ।

दूसरी पीढ़ी की इस नौवहन उपग्रह श्रृंखला को अहम प्रक्षेपण माना जा रहा है क्योंकि इससे नाविक (जीपीएस की तरह भारत की स्वदेशी नौवहन प्रणाली) सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित होगी और यह उपग्रह भारत एवं मुख्य भूमि के आसपास लगभग 1,500 किलोमीटर के क्षेत्र में तात्कालिक स्थिति और समय संबंधी सेवाएं प्रदान करेगा।

ISRO ने बताया कि नाविक को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि संकेतों की मदद से उपयोगकर्ता की 20 मीटर के दायरे में स्थिति और 50 नैनोसेकंड के अंतराल में समय की सटीक जानकारी मिल सकती है। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने इस मिशन के ‘उत्कृष्ट परिणाम’ के लिए पूरी टीम को बधाई दी।

उन्होंने प्रक्षेपण के बाद ‘मिशन नियंत्रण केंद्र’ से कहा, ‘NVS-01 को GSLV ने उसकी कक्षा में सटीकता से स्थापित किया। इस मिशन को संभव बनाने के लिए ISRO की पूरी टीम को बधाई।’ उन्होंने अगस्त 2021 में प्रक्षेपण यान के क्रायोजेनिक चरण में पैदा हुई विसंगति का जिक्र करते हुए कहा कि आज की सफलता GSLV-F10 की ‘विफलता’ के बाद मिली है। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि ‘क्रायोजेनिक चरण में सुधार और सीखे गए सबक से वास्तव में लाभ हुआ है’। उन्होंने समस्या के समाधान का श्रेय ‘विफलता विश्लेषण समिति’ को दिया।

सोमनाथ ने कहा कि NVS-01 दूसरी पीढ़ी का उपग्रह है, जिसमें कई अतिरिक्त क्षमताएं है। उन्होंने कहा कि इससे मिलने वाले संकेत अधिक सुरक्षित होंगे और इसमें असैन्य फ्रिक्वेंसी बैंड उपलब्ध कराये गए हैं। यह इस प्रकार के पांच उपग्रहों में से एक है। प्रक्षेपण के 20 मिनट बाद रॉकेट ने 2,232 किलोग्राम वजनी NVS-01 नौवहन उपग्रह को लगभग 251 किमी की ऊंचाई पर भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO) में स्थापित किया।

NVS-01 अपने साथ L1, L5 और S बैंड उपकरण लेकर गया है। दूसरी पीढ़ी के उपग्रह में स्वदेशी रूप से विकसित रुबिडियम परमाणु घड़ी भी होगी। ISRO ने कहा कि यह पहली बार है जब स्वदेशी रूप से विकसित रुबिडियम परमाणु घड़ी का सोमवार के प्रक्षेपण में इस्तेमाल किया गया।

अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, वैज्ञानिक पहले तारीख और स्थान का निर्धारण करने के लिए आयातित रूबिडियम परमाणु घड़ियों का इस्तेमाल करते थे। अब, उपग्रह में अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा विकसित रूबिडियम परमाणु घड़ी लगी होगी। यह एक महत्वपूर्ण तकनीक है जो कुछ ही देशों के पास है।

ISRO ने विशेषकर नागरिक विमानन क्षेत्र और सैन्य आवश्यकताओं के संबंध में स्थिति, नौवहन और समय संबंधी जानकारी से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नाविक प्रणाली विकसित की है। नाविक को पहले भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) के नाम से जाना जाता था।

First Published - May 29, 2023 | 1:15 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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