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सरकार इन दो कानूनों में करेगी संशोधन, भाजपा ने कहा- न्यायपालिका को भी ‘स्वच्छ’ बनाने का किया जा रहा प्रयास

विधेयक का उद्देश्य ‘अनावश्यक अधिनियमों’ की संख्या कम करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में ‘लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879’ की धारा 36 के प्रावधानों को शामिल करना है।

Last Updated- December 04, 2023 | 5:24 PM IST
Winter session of Parliament

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में ‘स्वच्छता’ अभियान शुरू किया है और इसी के क्रम में न्यायपालिका को भी ‘स्वच्छ’ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने सदन में अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2023 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि सरकार अपना औचित्य खो चुके ब्रिटिशकालीन कानूनों को निरस्त करने के प्रति वचनबद्ध है और यही वजह है कि उसने ‘लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879’ को निरस्त करने और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पुराने कानूनों को निरस्त करना मोदी के ‘पंच प्रण’ में शामिल था और इसी के अनुरूप यह संशोधन किया जाना है।

पाल ने कहा कि अदालतों में दलालों के चंगुल में सबसे अधिक गांव के अनपढ़, अशिक्षित लोग फंसते हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में भी ऐसा होता है कि रेलवे स्टेशन या बस अड्डों से ही दलाल मरीजों के पीछे लग जाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब प्रधानमंत्री ने ‘स्वच्छता’ अभियान चलाया है तो न्यायपालिका में भी इस तरह की स्वच्छता बनाए रखने की जरूरत है।’’

उन्होंने इस विधेयक को अदालत परिसरों में दलालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम करार दिया। विपक्ष की टोकाटोकी के बीच भाजपा सांसद ने कहा कि देश की जनता ने मोदी जी और उनकी गारंटी को मान लिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का नाम लेने से अगर इनको (विपक्ष को) चिढ़ हो रही है, तो अब तो देश की जनता ने प्रधानमंत्री को और उनकी गारंटी को मान लिया है… अब तो तीन राज्यों के चुनाव परिणाम को उन्हें (विपक्ष को) मान लेना चाहिए।’’

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के ही पी. पी. चौधरी ने कहा कि न्यायपालिका में दलालों की मौजूदगी का नुकसान समाज के अंतिम छोर के लोग उठाते हैं।

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने अपनी उपयोगिता खो चुके ‘सभी अप्रचलित कानूनों या स्वतंत्रता-पूर्व अधिनियमों’ को निरस्त करने के केंद्र सरकार के प्रयास के आलोक में लोकसभा में अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक विचार एवं पारित किये जाने के लिए पेश किया। यह विधेयक राज्य सभा से पहले ही पारित हो चुका है। सरकार ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के परामर्श से लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879 को निरस्त करने और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन करने का निर्णय लिया है।

विधेयक का उद्देश्य ‘अनावश्यक अधिनियमों’ की संख्या कम करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में ‘लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879’ की धारा 36 के प्रावधानों को शामिल करना है। यह धारा अदालतों में दलालों की सूची तैयार करने और प्रकाशित करने की शक्ति प्रदान करती है।

First Published - December 4, 2023 | 5:24 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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