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वित्त मंत्रालय का बड़ा कदम: तंबाकू-सिगरेट पर 1 फरवरी से बढ़ेगा शुल्क

तंबाकू उन कुछ उत्पादों में से है जिस पर जीएसटी और उत्पाद शुल्क दोनों ही लग सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह व्यवस्था बरकरार रखी है

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मोनिका यादव   
Last Updated- January 01, 2026 | 10:40 PM IST

वित्त मंत्रालय ने बीते साल के अंतिम दिन केंद्रीय उत्पाद शुल्क से जुड़ी कई अधिसूचनाएं जारी की हैं जो 1 फरवरी से प्रभावी हो जाएंगी। इन अधिसूचनाओं में तंबाकू, सुगंधित तंबाकू और गुटखा के लिए एक नई क्षमता-आधारित शुल्क व्यवस्था शुरू की गई है। इसके अलावा सिगरेट जैसे अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए भी शुल्क दरें संशोधित की गई हैं। यह ऐसे अहितकर उत्पादों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत पहले लगाए गए मुआवजा उपकर की जगह लागू हुए हैं।

मुख्य बदलाव ‘चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026’अधिसूचना के रूप में सामने आया है। यह नया ढांचा उत्पादित वस्तुओं की वास्तविक मात्रा पर कर लगाने के बजाय कारखाने में पैकिंग मशीनों की स्थापित उत्पादन क्षमता पर आधारित है।

शुल्क की गणना एक सूत्र के आधार पर की जाएगी जो अधिकतम रेटेड गति (पाउच प्रति मिनट में मापी जाती है) और उत्पाद की खुदरा बिक्री मूल्य को ध्यान में रखता है। यह नजरिया उत्पादन की कम रिपोर्टिंग पर अंकुश लगाने और सरकारी खजाने के लिए राजस्व का पुख्ता इंतजाम करने के लिए अपनाया गया है।

इसके साथ ही सरकार ने एक अलग अधिसूचना के माध्यम से सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए उत्पाद शुल्क की दरों में संशोधन किया है। प्रमुख संशोधनों में सिगरेट पर विशिष्ट शुल्क वृद्धि शामिल है। इनके मुताबिक 65 मिलीमीटर तक लंबी बिना फिल्टर वाली सिगरेट पर अब 2,050 रुपये प्रति हजार नग शुल्क लगेगा जबकि 65 से 70 मिलीमीटर लंबी सिगरेट पर 3,600 प्रति हजार का शुल्क लगेगा।

फिल्टर युक्त सिगरेट के लिए लंबाई के अनुसार श्रेणियों में शुल्क दोबारा तय किए गए हैं। इसके अनुसार अब 65 मिलीमीटर तक लंबी सिगरेट पर शुल्क 2,100 रुपये प्रति हजार नग से लेकर अन्य फिल्टर सिगरेट के लिए 8,500 रुपये प्रति हजार तक है।

चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा के निर्माताओं के लिए नए नियम एक कठोर अनुपालन व्यवस्था का संदेश लेकर आए हैं। उन्हें 7 फरवरी 2026 तक या उत्पादन शुरू करने के सात दिनों के भीतर आधिकारिक पोर्टल पर सभी पैकिंग मशीनों का विस्तृत घोषणापत्र दाखिल करना होगा। इसका उत्पाद शुल्क अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जाएगा जिसमें कारखाने का निरीक्षण भी शामिल है।

नियमों में सभी पैकिंग क्षेत्रों को कवर करने वाले कार्यात्मक सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की स्थापना भी अनिवार्य है जिसमें रिकॉर्ड किए गए फुटेज 48 महीनों तक सुरक्षित रखने होंगे और मांगे जाने पर अधिकारियों को देना होगा। मशीनरी में किसी भी संशोधन की पूर्व सूचना देनी होगी और इससे शुल्क दायित्व का पुनर्मूल्यांकन हो सकता है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव के तहत विनिर्माताओं को केवल इनपुट के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाली अधिसूचित वस्तुओं के थोक पैक पर चुकाए गए शुल्क पर ही सेनवैट क्रेडिट का दावा करने की इजाजत होगी जबकि अन्य कच्चे माल या पूंजीगत वस्तुओं के लिए कोई क्रेडिट उपलब्ध नहीं होगा।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इन परिवर्तनों को जीएसटी कोष राजस्व निकासी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि संवैधानिक ढांचे के तहत तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने का अधिकार विशेष रूप से केंद्र की विधायी क्षमता के भीतर आता है। तंबाकू उन कुछ उत्पादों में से है जिस पर जीएसटी और उत्पाद शुल्क दोनों ही लग सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह व्यवस्था बरकरार रखी है।

First Published : January 1, 2026 | 10:37 PM IST