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आर्टिफिशल इंटेलिजेंस में इनोवेशन और रेगुलेशन पर विचार, जरूरत पड़ने पर लाये जाएंगे कानूनी उपाय

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इंडियाएआई मिशन के तहत आईटी मंत्रालय द्वारा गठित एक उपसमिति ने बुधवार को भारत के एआई क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के संचालन संबंधी दिशानिर्देशों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की

Last Updated- November 05, 2025 | 10:58 PM IST
artificial intelligence

सरकार आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) में लगातार नवाचार सुनि​श्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर विनियमन अथवा कानूनी उपाय भी किए जा सकते हैं। वह इंडियाएआई के संचालन संबंधी दिशानिर्देश जारी करने के अवसर पर बोल रहे थे। कृष्णन ने कहा, ‘अगर हम मानते हैं कि नवाचार के लिए प्राथमिकता जरूरी है तो आज विनियमन प्राथमिकता नहीं है। मैं फिर कहना चाहता हूं कि अगर कानून या विनियमन की जरूरत पड़ी तो सरकार पीछे नहीं हटेगी।’

इंडियाएआई मिशन के तहत आईटी मंत्रालय द्वारा गठित एक उपसमिति ने बुधवार को भारत के एआई क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के संचालन संबंधी दिशानिर्देशों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। उपसमिति ने एआई के संचालन संबंधी सिद्धांतों की एक सूची प्रस्तावित की है जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही, सुरक्षा, गोपनीयता, निष्पक्षता, मानव केंद्रित मूल्य, समावेशी नवाचार और डिजिटल डिजाइन जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

उदाहरण के लिए, रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत में विकसित की जा रही एआई प्रणाली के साथ उसकी विकास प्रक्रिया और क्षमताओं एवं सीमाओं पर उपयोगकर्ताओं के लिए सार्थक जानकारी होनी चाहिए। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है, ‘एआई प्रणाली के डेवलपरों और उसका इस्तेमाल करने वालों को एआई सिस्टम के कामकाज और परिणामों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साथ ही उपयोगकर्ता अधिकारों, कानून के शासन और उपरोक्त सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए। स्पष्ट तौर पर जवाबदेही तय करने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए।’

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि सभी एआई प्रणाली मानव निरीक्षण, निर्णय और हस्तक्षेप के अधीन होने चाहिए ताकि एआई प्रणाली पर अनुचित निर्भरता को रोका जा सके।

कृष्णन ने कहा कि ये सुझाव एआई के विकास पर सरकार के दृ​ष्टिकोण के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा, ‘हम मानव को केंद्र में रखने पर ध्यान दे रहे हैं। इन महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों को एआई के संचालन संबंधी दिशानिर्देशों में शामिल किया गया है। मैं समझता हूं कि यह रिपोर्ट काफी महत्त्वपूर्ण होगी जो बताती है कि कि हमारा ध्यान मुख्य रूप से नवाचार पर है। हम इस अवसर को भुनाना चाहते हैं।’

सरकार ने डीपफेक और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के जरिये तैयार सामग्रियों की भरमार पर लगाम लगाने के लिए कुछ खास दिशानिर्देश जारी किए हैं। उपसमिति ने कहा है कि दुर्भावनापूर्ण मीडिया समग्री तैयार करने के लिए फाउंडेशन मॉडलों के दुरुपयोग से सुरक्षा के लिए कई कानूनी उपाय मौजूद हैं। उसने संकेत दिया है कि डीपफेक और दुर्भावनापूर्ण सामग्रियों की पहचान के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए सामग्री तैयार करने वालों, उसे प्रका​शित करने वालों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे विभिन्न प्रतिभागियों की वि​शिष्ट पहचान साझा की जानी चाहिए।

उपसमिति ने कहा, ‘इनका उपयोग जेनेरेटिव एआई टूल्स के इनपुट और आउटपुट को वॉटरमार्क करने के लिए किया जा सकता है। इनका उपयोग डीपफेक तैयार करने से लेकर उसके उपयोग तक पर नजर रखने और उसका विश्लेषण करने के लिए किया जा सकता है। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि बिना सहमति के अथवा कानून का उल्लंघन करते हुए सामग्री को कब तैयार किया गया।’

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर बी. रवींद्रन की अध्यक्षता वाली उपसमिति में इंडिया एआई मिशन के मुख्य कार्या​धिकारी अभिषेक सिंह, देवयानी घोष, एडवोकेट राहुल मत्थन और आई-स्पिरिट के शरद शर्मा सहित कई लोग भी शामिल थे।

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First Published - November 5, 2025 | 10:19 PM IST

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