facebookmetapixel
Advertisement
भारत और UAE के बीच 6 ऐतिहासिक समझौते; अबू धाबी में PM मोदी की यात्रा के दौरान रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र पर बड़ा फैसलापश्चिम एशिया संकट का असर: चार साल में पहली बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, CNG भी हुई महंगीतेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर रुपये से शेयर बाजार बेदम; सेंसेक्स-निफ्टी में साप्ताहिक गिरावटApple पर CCI कसेगा शिकंजा, वैश्विक टर्नओवर के बजाय अब भारत के राजस्व पर मांगा जवाबरिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: ₹96.14 तक लुढ़का, क्या ₹100 प्रति डॉलर तक गिर जाएगा?IMD का पूर्वानुमान: केरल में जल्दी आएगा मॉनसून, लेकिन अल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंकानीट परीक्षा में बड़ा बदलाव: अगले साल से ऑनलाइन मोड में होगी परीक्षा, शिक्षा मंत्री ने किया ऐलानरक्षा क्षेत्र का नया हब बनेगा आंध्र प्रदेश, सत्य साईं जिले में रखी गई स्टेल्थ फाइटर जेट परियोजना की नींवभोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला, परिसर को बताया देवी सरस्वती का मंदिरनई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष पर नहीं बनी सहमति, बिना संयुक्त विज्ञप्ति के समाप्त हुई चर्चा

निवा बूपा अधिक बिक्री से करेगी नुकसान की भरपाई

Advertisement

आईएफआरएस अकाउंटिंग विधि के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के अंत में कंपनी का संयुक्त अनुपात 103 प्रतिशत था और इसमें वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में सुधार की उम्मीद

Last Updated- November 05, 2025 | 10:56 PM IST
Motor insurance STocks

एकल स्वास्थ्य बीमा कंपनी निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर में संशोधन के बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हटाने के कारण संयुक्त अनुपात पर 50-60 आधार अंक (बीपीएस) का प्रभाव पड़ने की संभावना दिख रही है। कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी विश्वनाथ महेंद्र ने कहा कि कंपनी कमीशन में संशोधन, व्यवसाय की मात्रा में वृद्धि और दवाओं के लिए जीएसटी दरों में कमी से इसके असर को कम करने में मदद मिलेगी।

आईएफआरएस अकाउंटिंग विधि के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के अंत में कंपनी का संयुक्त अनुपात 103 प्रतिशत था और इसमें वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में सुधार की उम्मीद है।

सितंबर की शुरुआत में जीएसटी परिषद ने सभी व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर पूरी तरह से कर छूट की घोषणा की थी। साथ ही 22 सितंबर, 2025 से बीमा की पैठ को बढ़ावा देने के लिए उनके पुनर्बीमा को भी छूट दी गई। बीमाकर्ता ने प्रभाव को कम करने के लिए वितरकों के कमीशन में पहले ही संशोधन कर दिया है।

महेंद्र ने कहा, ‘आईटीसी के लिए कमीशन ब्रोकरेज की वजह से इनपुट टैक्स क्रेडिट पर असर है। दूसरे, हमारे ओवरहेल्ड की वजह से है। हमने फैसला किया है कि 1 अक्टूबर और उसके बाद से सभी कमीशन ब्रोकरेज में जीएसटी शामिल होगा। हमारे ओवरहेल्ड के मामले में हम तमाम पहल कर रहे हैं, जिसमें वेंडरों पर ध्यान, यथासंभव मोलभाव, कांट्रैक्ट में बदलाव आदि शामिल है। अधिक मात्रा की वजह से मात्रा से जुड़ी अर्थव्यवस्था काम करेगी और दवाओं पर जीएसटी में कमी से भी हमें इसका असर कम करने में कुछ मदद मिलेगी।’

Advertisement
First Published - November 5, 2025 | 10:18 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement