एकल स्वास्थ्य बीमा कंपनी निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर में संशोधन के बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हटाने के कारण संयुक्त अनुपात पर 50-60 आधार अंक (बीपीएस) का प्रभाव पड़ने की संभावना दिख रही है। कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी विश्वनाथ महेंद्र ने कहा कि कंपनी कमीशन में संशोधन, व्यवसाय की मात्रा में वृद्धि और दवाओं के लिए जीएसटी दरों में कमी से इसके असर को कम करने में मदद मिलेगी।
आईएफआरएस अकाउंटिंग विधि के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के अंत में कंपनी का संयुक्त अनुपात 103 प्रतिशत था और इसमें वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में सुधार की उम्मीद है।
सितंबर की शुरुआत में जीएसटी परिषद ने सभी व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर पूरी तरह से कर छूट की घोषणा की थी। साथ ही 22 सितंबर, 2025 से बीमा की पैठ को बढ़ावा देने के लिए उनके पुनर्बीमा को भी छूट दी गई। बीमाकर्ता ने प्रभाव को कम करने के लिए वितरकों के कमीशन में पहले ही संशोधन कर दिया है।
महेंद्र ने कहा, ‘आईटीसी के लिए कमीशन ब्रोकरेज की वजह से इनपुट टैक्स क्रेडिट पर असर है। दूसरे, हमारे ओवरहेल्ड की वजह से है। हमने फैसला किया है कि 1 अक्टूबर और उसके बाद से सभी कमीशन ब्रोकरेज में जीएसटी शामिल होगा। हमारे ओवरहेल्ड के मामले में हम तमाम पहल कर रहे हैं, जिसमें वेंडरों पर ध्यान, यथासंभव मोलभाव, कांट्रैक्ट में बदलाव आदि शामिल है। अधिक मात्रा की वजह से मात्रा से जुड़ी अर्थव्यवस्था काम करेगी और दवाओं पर जीएसटी में कमी से भी हमें इसका असर कम करने में कुछ मदद मिलेगी।’