facebookmetapixel
Advertisement
सोने-चांदी में जारी रहेगी उठापटक, क्या अमेरिकी GDP और महंगाई के आंकड़े बिगाड़ेंगे बाजार का खेल?अप्रैल से लागू होगा भारत-यूके के बीच हुआ CETA समझौता, व्हिस्की और कारें होंगी सस्ती: रिपोर्टशेयर बाजार में बरसेगा पैसा! इस हफ्ते HAL और Coal India समेत 63 कंपनियां देने जा रही हैं तगड़ा डिविडेंडInd vs Pak, T20 WC 2026: भारत-पाकिस्तान मुकाबले से पहले फिर गरमाया ‘हैंडशेक’ विवाद, क्या बदलेगा भारत का रुख?Lodha Developers का बड़ा दांव, पुणे की कंपनी में ₹294 करोड़ का निवेश₹10 से ₹2 होगी फेस वैल्यू! बायोलॉजिकल प्रोडक्ट से जुड़ी कंपनी करेगी स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्तेइस हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की लगेगी लॉटरी, फ्री में मिलेंगे बोनस शेयर; चेक करें डिटेलशेयर बाजार में FPI का कमबैक: अमेरिका-भारत ट्रेड डील ने बदला माहौल, IT शेयरों में ‘एंथ्रोपिक शॉक’ का असरग्लोबल मार्केट में दोपहिया कंपनियों की टक्कर, कहीं तेज तो कहीं सुस्त निर्याततीन महीनों की बिकवाली के बाद FPI की दमदार वापसी, फरवरी में बरसे ₹19,675 करोड़

सरकारी बॉन्ड की कीमतें हुईं धराशायी, 5 महीने बाद अंडरराइटर्स के खाते में गया बॉन्ड का बड़ा हिस्सा

Advertisement
Last Updated- February 17, 2023 | 9:42 PM IST
Bonds

सरकारी बॉन्ड की कीमतें धराशायी हो गईं और 10 वर्षीय बेंचमार्क प्रतिभूतियों का प्रतिफल दो हफ्ते के उच्चस्तर पर आ गया क्योंकि तय सॉवरिन डेट की नीलामी का बड़ा हिस्सा अप्रत्याशित तौर पर अंडरराइटर्स के खातों में चला गया। यह बताता है कि मांग कमजोर थी। ट्रेडरों ने यह जानकारी दी।

सबसे ज्यादा लिक्विड 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 5 आधार अंक बढ़कर शुक्रवार को 7.39 फीसदी पर टिका, जो 30 जनवरी के बाद से बॉन्ड का सबसे ऊंचा क्लोजिंग प्रतिफल है।

बॉन्ड की कीमतें व प्रतिफल एक दूसरे के विपरीत दिशा में चलते हैं। 10 वर्षीय बॉन्ड के प्रतिफल में एक आधार अंक की बढ़ोतरी से उसकी कीमतों में मोटे तौर पर सात पैसे की गिरावट आती है।

शुक्रवार की प्राइमरी नीलामी में भारतीय रिजर्व बैंक ने 8,254.37 करोड़ रुपये के नए 10 वर्षीय बॉन्ड प्राइमरी डीलरों को हस्तांतरित किए, जबकि अधिसूचित रकम 12,000 करोड़ रुपये की है। सॉवरिन बॉन्ड की नीलामी का कुल आकार 28,000 करोड़ रुपये का है।

प्राइमरी डीलर वे इकाइयां होती हैं, जो सरकारी बॉन्ड को अंडरराइट करती हैं। प्राइमरी नीलामी में बॉन्ड का हस्तांतरण मोटे तौर पर उच्च प्रतिफल या कम कीमत को लेकर आरबीआई की असहजता को बताता है। बॉन्ड के निवेशक ज्यादा रिटर्न मांगते हैं जब डेट का परिदृश्य कई वजहों मसलन उच्च महंगाई या बॉन्ड की भारी आपूर्ति के कारण प्रतिकूल हो जाते हैं।

सरकार के डेट मैनेजर के नाते आरबीआई केंद्र सरकार के उधारी कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा कराने के लिए जवाबदेह होता है।
पिछली बार सॉवरिन बॉन्ड बिक्री का एख हिस्सा प्राइमरी डीलरों को 16 सितंबर, 2022 को हस्तांतरित किया गया था, वहीं 10 वर्षीय बॉन्ड का आखिरी उदाहरण 13 अप्रैल, 2022 का है।

ट्रेडरों ने कहा कि शुक्रवार की नीलामी में कमजोर मांग की वजह देसी व वैश्विक स्तर पर महंगाई के परिदृश्य में एकाएक आया बदलाव है। इस हफ्ते जारी आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी में भारत की महंगाई में अप्रत्याशित तौर पर तेज बढ़ोतरी हुई और यह पिछले महीने आरबीआई के सहज स्तर के पार चली गई।

अमेरिका में जारी हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि वहां नौकरियां बढ़ी हैं और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में महंगाई अनुमान से ज्यादा रही है।

देसी व वैश्विक आंकड़ों ने ब्याज दरों में और बढ़ोतरी को लेकर चिंता में इजाफा किया है और टर्मिनल रीपो दरों के पिछले अनुमान का तेजी से समायोजन हुआ है। 6.98 फीसदी पर भारत का एक साल का ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप रेट, रीपो दरों के बढ़कर 6.75 फीसदी पर पहुंचने की संभावना जता रहा है।

Advertisement
First Published - February 17, 2023 | 9:42 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement