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अमीर भारतीयों के खाते बंद कर रहे विदेशी बैंक, जानें वजह

दो ब्रिटिश बैंकों, एक स्विस बैंक और एक प्रमुख एमिरेट्स लेंडर ने पिछले दो महीनों में हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों (HNI) के खाते बंद कर दिए हैं

Last Updated- December 29, 2023 | 5:15 PM IST
Foreign Banks

हाई मिनिमम बैलेंस की आवश्यकता और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लगाए गए सख्त नियमों के कारण विदेशी बैंक अमीर भारतीयों के खाते बंद कर रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो ब्रिटिश बैंकों, एक स्विस बैंक और एक प्रमुख एमिरेट्स लेंडर ने पिछले दो महीनों में हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों (HNI) के खाते बंद कर दिए हैं।

लोगों ने आरबीआई की उस योजना का उपयोग करके इन बैंकों को पैसा डिपॉजिट किया था जो उन्हें स्टॉक और संपत्तियों में हर साल $250,000 तक निवेश करने की अनुमति देता है। लेकिन कुछ विदेशी बैंकों में खाता रखने के लिए कम से कम $1 मिलियन की आवश्यकता होती है। यदि शेष राशि कम है, तो वे स्टॉक और ऋण में निवेश के लिए बैंक की वेल्थ मैनेजमेंट सेवा का उपयोग करने का सुझाव देते हैं।

लॉ फर्म खेतान एंड कंपनी के पार्टनर मोइन लाधा के अनुसार, बैंक कह रहे हैं कि वे कम बैलेंस वाले खाते रखने के लिए नुकसान नहीं उठाना चाहते हैं।

2013 तक LRS की सीमा $200,000 हुआ करती थी, फिर इसे घटाकर $75,000 प्रति वर्ष कर दिया गया। 2015 में इसे बढ़ाकर 250,000 डॉलर कर दिया गया था।

इसके अतिरिक्त, आरबीआई ने साफ किया है कि भारतीय ग्राहक 180 दिनों के भीतर इस फंड को निवेश करें या या वापस लाएं।

जैसा कि ईटी की रिपोर्ट में बताया गया है, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत उल्लंघन की राशि के बराबर भारत में संपत्ति जब्त कर सकता है। इससे अक्टूबर में LRS के तहत भारत से निकासी में 37% की कमी आई है।

First Published - December 29, 2023 | 5:15 PM IST

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