facebookmetapixel
Advertisement
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, खुद अपने पोस्ट में लेटर जारी करके दी जानकारीफ्लैट खरीदने के बाद पुराने मेंटेनेंस बकाया का आ गया बिल? जानिए क्या कहता है कानून और क्या करें नए खरीदार360% का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सक्या ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले: हम ‘लॉक्ड एंड लोडेड’, पर बातचीत भी जारी‘उदारीकण के बाद अहसास हुआ कि हमें इनोवेशन करना होगा, न कि दिल्ली में इंतजार’, नारायण मूर्ति ने बयां की 1991 से पहले की दुश्वारियां1991 से अब तक का सफर: अविश्वास से निकलकर भरोसे पर आधारित आर्थिक नीति बनाने की जरूरत‘बंगाल को मिली तबाही और निराशा की विरासत’, बोले स्वप्न दासगुप्ता: निवेश लाने के लिए करेंगे अतिरिक्त प्रयासऑरिफ्लेम बेचेगी भारत में अपना विनिर्माण कारोबार, अकुम्स ड्रग्स की सहायक कंपनी प्योर एंड क्योर से हुआ समझौता₹9,200 करोड़ के IPO से कर्जमुक्त होगी मणिपाल हेल्थ, उत्तर भारत में विस्तार पर कंपनी का जोर: दिलीप जोसजून में लगातार दूसरे महीने क्रेडिट कार्ड खर्च ₹2 लाख करोड़ पार, HDFC Bank और SBI का दिखा दबदबा

ट्रस्ट बनाएं और वारिसों को झगड़े से बचाएं

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 3:17 AM IST

कोरोना महामारी के कारण रोजाना लोगों की जान जा रही हैं। ऐसे में जिन लोगों ने अपनी वसीयत के बारे में अभी तक नहीं सोचा है, उन्हें जल्द से जल्द इस पर ध्यान देना चाहिए ताकि उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित रहे। अगर परिवार छोटा हो और पैतृक संपत्ति में आम सामान शामिल हो तो वसीयत बनाने भर से काम चल जाएगा। इसमें खर्च भी ज्यादा नहीं होता। लेकिन कई बार यह भी देखा गया है कि वसीयत की असलियत को ही चुनौती दे दी जाती है और कई साल तक मुकदमेबाजी होती रहती है। अगर ट्रस्ट बना दिया जाए तो इस पचड़े से छुटकारा मिल सकता है।
प्रिवी लीगल सर्विस एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर मोइज रफीक कहते हैं, ‘ट्रस्ट में अदालत का कोई काम नहीं होता। इसीलिए मैं आपके परिवार की सुरक्षा के लिए आपको ट्रस्ट बनाने की ही सलाह दूंगा।’
ट्रस्ट एक कानूनी व्यवस्था होती है, जिसमें मालिक (जिसे सेटलर कहा जाता है) किसी अन्य पक्ष (जिसे ट्रस्टी कहते हैं) को अपनी संपत्ति की देखभाल करने का जिम्मा देता है। ट्रस्टी मालिक की ओर से संपत्ति उन लाभार्थियों के लिए संभालता है, जिन्हें ट्रस्ट डीड के जरिये पूरी संपत्ति सौंपी जानी है।

हर काम के लिए ट्रस्ट
ट्रस्ट सार्वजनिक भी हो सकता है और निजी भी। सेटलर यानी संपत्ति के मालिक के जीते जी जो ट्रस्ट बनाया और चलाया जाता है, उसे लिविंग ट्रस्ट कहते हैं। जो ट्रस्ट वसीयत के जरिये बनाया जाता है, उसे टेस्टामेंट्री ट्रस्ट कहते हैं और सेटलर यानी मालिक की मौत के बाद ही वह कारगर होता है। एक माइनर बेनीफिशियरी ट्रस्ट भी होता है, जो नाबालिग बच्चे के लाभ के लिए बनाया जाता है। लाइफ इंश्योरेंस ट्रस्ट को खत्म नहीं किया जा सकता और उसे पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद जीवन बीमा से मिली रकम लाभार्थियों के लिए निवेश करने के मकसद से बनाया जाता है।
ट्रस्ट आम तौर पर एक या अधिक लोगों के फायदे के लिए संपत्ति संभालने और संरक्षित करने के इरादे से बनाया जाता है मगर सेटलर और लाभार्थियों की खास जरूरतें पूरी करने के लिए खास मकसद वाले ट्रस्ट भी बनाए जा सकते हैं। मिसाल के तौर पर बच्चों की शिक्षा के लिए, परिवार के जीवनयापन के लिए और भावी पीढिय़ों की जरूरतें पूरी करने के लिए भी ट्रस्ट बनाए जा सकते हैं। अनंतलॉ के पार्टनर सुनील जैन कहते हैं, ‘परिजनों, संबंधियों और दोस्तों के लिए भी ट्रस्ट बनाए जा सकते हैं।’

अदालत का दखल नहीं
ट्रस्ट का एक फायदा यह है कि इसमें अदालती मुहर की कोई जरूरत नहीं होती। पीएसएल एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स के मैनेजिंग पार्टनर समीर जैन कहते हैं, ‘ट्रस्ट को आरंभ करने और चलाने में अदालती प्रक्रिया की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती।’ इतना ही नहीं, जैन बताते हैं कि वसीयत तो व्यक्ति की मौत के बाद ही लागू होती है मगर ट्रस्ट जिस दिन बनता है, उसी दिन से काम शुरू कर सकता है।
ट्रस्ट में ज्यादा लचीलापन होता है। बीडीओ कंसल्टिंग में पार्टनर सूरज मलिक बताते हैं, ‘ट्रस्ट लाभार्थियों को संपत्ति आवंटन के मामले में अधिक लचीला होता है। ट्रस्ट परिवार के विभिन्न सदस्यों की जरूरतों का खयाल रख सकता है। परिवार का आकार बढ़ता है तब भी ट्रस्ट उसे आसानी से संभाल सकता है।’ ट्रस्ट काम भी आसानी से करता है।

नियंत्रण खत्म होना
ट्रस्ट में यह समस्या जरूर होती है कि संपत्ति मालिक को अपनी संपत्तियां इसमें भेजनी होती हैं। लोगों को डर होता है कि उनके जीते-जी ही उनकी संपत्तियों का नियंत्रण ट्रस्टी के हाथ में जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञ समझाते हैं कि ट्रस्ट के दस्तावेज में कुछ जरूरी इंतजाम कर यह चिंता दूर की जा सकती है। ट्रस्ट चलाने में खर्च भी कुछ ज्यादा आता है।
ट्रस्ट बनाने वाले व्यक्ति को इसे बनाने में लगने वाले स्टांप शुल्क जैसे खर्च भरने के लिए तैयार रहना चाहिए। ट्रस्ट से होने वाली आय पर कर लाभार्थी की उम्र पर निर्भर करता है। मलिक समझाते हैं, ‘ट्रस्ट किसी नाबालिक के फायदे के लिए बनाया गया है तो उससे होने वाली आय पर कर नाबालिग के अभिभावक से वसूला जा सकता है।’
व्यक्ति के पास जो संपत्तियां बची रह जाती हैं या जो संपत्तियां ट्रस्ट में नहीं दी जा सकती हैं, उनके लिए वसीयत अवश्य की जानी चाहिए।

Advertisement
First Published - June 27, 2021 | 8:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement