facebookmetapixel
Advertisement
Editorial: जजों की कमी और बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझ रही न्यायिक प्रणाली, सुधार की जरूरतशेयर बाजार में मची हाहाकार! सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ लाल निशान पर हुए बंदTata Steel Q4 Results: मुनाफा 125% उछलकर ₹2,926 करोड़ पहुंचा, निवेशकों को मिलेगा ₹4 का डिविडेंडबच्चों के लिए PPF अकाउंट: खाता खोलने का तरीका और टैक्स के नियम बेहद आसान भाषा में समझेंITC Hotels Q4 Results: मुनाफा 23% बढ़कर ₹317.43 करोड़ पर पहुंचा, रेवेन्यू ₹1,253 करोड़ के पारUpcoming IPO: SEBI ने तीन फर्मों को दी हरी झंडी, बाजार से ₹1,200 करोड़ रुपये जुटाएंगी ये कंपनियांRupee at record low: रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 1 डॉलर की कीमत 96 के पारक्रेडिट स्कोर बढ़ाने का सीक्रेट: ये 3 आसान आदतें दिलाएंगी हर लोन की मंजूरी, एक्सपर्ट से समझें तरीका‘अमेरिका पर भरोसा नहीं, बातचीत तभी होगी जब वॉशिंगटन गंभीर हो’, दिल्ली में बोले ईरानी विदेश मंत्री26 मई तक केरल पहुंच सकता है मानसून; उत्तर भारत में भीषण लू का अलर्ट

राजनीतिक संपर्क रखने वाले व्यक्तियों के लिए KYC हुई बेहतर: RBI

Advertisement

धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 में PEP का उल्लेख नहीं है। इसलिए PEP को परिभाषित करना वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की सिफारिशों के अनुरूप भी है।

Last Updated- January 05, 2024 | 10:32 PM IST
RBI MPC Meet February 2026

भारतीय रिजर्व बैंक ने नियमन के तहत आने वाली इकाइयों (RE) के साथ लेनदेन में लगे राजनीतिक संपर्क रखने वाले व्यक्तियों (Politically Exposed Persons-PEP) की श्रेणी के लिए ‘अपने ग्राहकों को जानें’ (KYC) के मानदंड को बेहतर किया है। इसका उद्देश्य ऐसे ग्राहकों के बारे जानकारी को बेहतर करना है।

RBI ने कहा कि PEP ऐसे व्यक्ति हैं जो देशों सरकारों के प्रमुख, वरिष्ठ राजनेता, वरिष्ठ सरकारी या न्यायिक या सैन्य अधिकारी, राज्य के स्वामित्व वाले निगमों के वरिष्ठ अधिकारी और महत्वपूर्ण राजनीतिक दल के पदाधिकारी हैं या उन्हें इनके द्वारा प्रमुख सार्वजनिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

RBI ने नियमन के तहत आने वाली इकाइयों (RE) को भेजे संदेश में बताया कि इस कदम से ‘कस्टमर ड्यू डिलिजेंस’ (CDD) यानी ग्राहकों की जांच-पड़ताल के बारे में स्पष्टता की उम्मीद है।

RE के पास यह विकल्प होता है कि वे पीईसी के साथ संबंध (बतौर ग्राहक या लाभार्थी) रखें। RE को सामान्य तौर पर अपने ग्राहक को जानना होता है। इसके अलावा RE को RBI के मानदंड के तहत पीईपी से लेनदेन की स्थितियों को पूरा करना होता है।

इन अतिरिक्त स्थितियों में उचित जोखिम प्रबंधन प्रणाली की स्थापना भी करनी होती है। इसके तहत यह तय किया जाता है कि ग्राहक या लाभार्थी पीईपी है।

RE को कोष/संपदा के स्रोत को स्थापित करने के लिए उचित उपाय करने होते हैं। RE को PEP श्रेणी का खाता खोलने के लिए वरिष्ठ प्रबंधन से इजाजत की जरूरत होती है।

धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 में PEP का उल्लेख नहीं है। इसलिए PEP को परिभाषित करना वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की सिफारिशों के अनुरूप भी है। लिहाजा RBI का यह कदम FATF से जुड़े देशों के साथ नियामक कमी को दूर करेगा।

FATF ने अहम जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को PEP के तहत परिभाषित किया है। कई PEP ऐसे महत्त्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं जिनसे अवैध धन को वैध बनाने और अन्य अपराध जैसे भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी की जा सकती है।

FATF की वेबसाइट के मुताबिक, ‘FATF ने PEP से जोखिम जुड़ा होने के कारण सिफारिश की है। इसके तहत PEP से कारोबारी संबंध के मामले में AML/CFT की अतिरिक्त सिफारिशें की गई हैं। इन सिफारिशों की प्रकृत्ति निवारक (आपराधिक नहीं) है। इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि सभी PEP आपराधिक गतिविधियों में संलग्न हैं।’

Advertisement
First Published - January 5, 2024 | 10:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement