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BS Poll: रीपो में बदलाव के आसार नहीं, RBI की MPC छठी मौद्रिक समीक्षा में भी बरकरार रख सकती है नीतिगत दरें

फरवरी की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सबसे अहम बात यह होगी कि बैंकिंग तंत्र में तरलता की कमी पर केंद्रीय बैंक का क्या रुख रहता है।

Last Updated- February 04, 2024 | 9:59 PM IST
RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति लगातार छठी मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरें जस की तस बनाए रख सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वेक्षण में शामिल सभी 10 प्रतिभागियों की यह राय है। आरबीआई 8 फरवरी को मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद अपना निर्णय सुनाएगा।

मौद्रिक नीति समिति ने मई, 2022 से फरवरी, 2023 के बीच 250 आधार अंक की बढ़ोतरी के साथ रीपो दर 6.5 फीसदी कर दी थी। उसके बाद अप्रैल, 2023 की बैठक में दर वृद्धि पर विराम लगा दिया गया था।

एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज में लीड अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘पिछली मौद्रिक नीति की बैठक के बाद से वैश्विक घटनाक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जिससे कोई वजह नहीं दिखती कि आरबीआई दरों में सख्ती करे।’

फरवरी की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सबसे अहम बात यह होगी कि बैंकिंग तंत्र में तरलता की कमी पर केंद्रीय बैंक का क्या रुख रहता है। सभी प्रतिभागियों ने एकमत से कहा कि तरलता बढ़ाने के लिए आरबीआई वेरिएबल रेट रीपो एक्शन (वीआरआर) जारी रखेगा और खुले बाजार से बॉन्ड खरीदेगा या नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) कम कर देगा।

भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘बैंकिंग तंत्र में नकदी की किल्लत सितंबर से ही बनी हुई है। तरलता में अस्थायी इजाफे के लिए वीआरआर सही तरीका है क्योंकि खुले बाजार में परिचालन के जरिये नकदी स्थायी तौर पर डाली जाती है। लेकिन लगातार नकदी डाले जाने से तंत्र में तरलता बफर बनाने की जरूरत है।’

सभी प्रतिभागी इस बात से सहमत थे कि मौद्रिक नीति समिति रीपो दर पर यथास्थिति बनाए रखेगी लेकिन रुख के बारे में उनकी राय अलग-अलग थी।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘अगर आरबीआई फरवरी में मौद्रिक नीति पर रुख बदलकर तटस्थ करता है तो वेटेड औसत कॉल दर को रीपो दर पर लाने के लिए तरलता बढ़ाने के बड़े उपाय करने होंगे। मौसमी तौर पर नकदी निकासी के कारण तरलता की स्थिति मार्च तक सख्त बनी रहेगी।’उनकी राय में आरबीआई फरवरी में अपने रुख में बदलाव नहीं करेगा। मगर अप्रैल में रुख तटस्थ किए जाने की उम्मीद है।’

कुछ प्रतिभागियों को लगता है कि वित्त वर्ष 2025 में कम उधारी से आरबीआई के पास मौद्रिक नीति को नरम बनाए रखने की गुंजाइश होगी।

पीएनबी गिल्ट्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विकास गोयल ने कहा, ‘सरकार ने उधारी कार्यक्रम में सूझबूझ दिखाई है। इससे आपूर्ति कम रहेगी, जिस कारण समिति को मौद्रिक नीति में थोड़ी ढील देनी चाहिए और इसके लिए आरबीआई को रुख बदलना होगा।’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक उदारता का अपना रुख पहले ही वापस ले रहा है। इसलिए उसे तटस्थ रुख अपनाना चाहिए।’

सरकार ने अगले वित्त वर्ष में दिनांकित बॉन्डों के जरिये 14.13 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का लक्ष्य रखा है। चालू वित्त वर्ष में कुल उधारी 15.43 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

अगले वित्त वर्ष में 11.75 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध उधारी का लक्ष्य रखा गया है। अधिकतर प्रतिभागियों को उम्मीद है कि मौद्रिक नीति समिति जून से अगस्त के बीच रीपो दर में कटौती शुरू कर सकती है। मगर दर में कटौती का समय देसी परिस्थितियों के साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति पर भी निर्भर करेगा।

एमके ग्लोबल के अरोड़ा ने कहा कि आरबीआई दर बढ़ाने का सिलसिला फेड से ज्यादा देर तक नहीं चलाएगा और वह फेड के रुख का ही अनुसरण करेगा।

First Published - February 4, 2024 | 9:59 PM IST

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