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Banking Liquidity: बैंकिंग क्षेत्र में जमा पत्रों की बम्पर वसूली, कैसे जुटाए गए 1.17 लाख करोड़ रुपये?

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भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 7-21 मार्च के पखवाड़े में बैंक एवं वित्तीय संस्थानों ने जमा पत्र के जरिये 1.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाए।

Last Updated- March 31, 2025 | 11:03 PM IST
Bank
प्रतीकात्मक तस्वीर

नकदी प्रवाह में सख्ती के बावजूद बैंक एवं वित्तीय संस्थान जमा पत्र के जरिये रिकॉर्ड रकम जुटाने में कामयाब हुए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 7-21 मार्च के पखवाड़े में बैंक एवं वित्तीय संस्थानों ने जमा पत्र के जरिये 1.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। यह मई 2021 के बाद से किसी एक पखवाड़े में जमा पत्र के जरिये जुटाई गई सबसे अधिक रकम है।

इंडसइंड बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में अनियमितताओं के खुलासे के बाद उसके तरलता कवरेज अनुपात में गिरावट दर्ज की गई। मगर बैंक ने इस दौरान काफी आक्रामक तरीके से जमा पत्र के जरिये रकम जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया। बैंक का तरलता अनुपात 9 मार्च, 2025 तक 113 फीसदी तक घट गया था जबकि दिसंबर के आ​खिर में यह आंकड़ा 118 फीसदी रहा था।

जमा पत्र जारी करने में आई इस उछाल से बैंकिंग प्रणाली में जमा की सख्त ​​स्थिति का भी पता चलता है। ऐसे में बैंकों को ऋण की मांग पूरा करने के लिए काफी हद तक जमा पत्र पर निर्भर होना पड़ता है। ऐसा खास तौर पर वित्त वर्ष के आ​खिर में देखा जाता है जब ऋण मांग काफी बढ़ जाती है।

पखवाड़े के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नैशनल बैंक ने जमा पत्र के जरिये 28,140 करोड़ रुपये जुटाए। उसके बाद एचडीएफसी बैंक ने 18,140 करोड़ रुपये, इंडसइंड बैंक ने 15,850 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा ने 14,265 करोड़ रुपये जुटाए।

पंजाब नैशनल बैंक के जमा पत्र पर यील्ड 7.56 फीसदी से 7.58 फीसदी के दायरे में रहा। एचडीएफसी बैंक के जमा पत्र पर यील्ड का दायरा 7.50 फीसदी से 7.63 फीसदी के बीच रहा। बैंक ऑफ बड़ौदा के मामले में जमा पत्र पर यील्ड का दायरा 7.55 फीसदी से 7.60 फीसदी के बीच रहा। इंडसइंड बैंक के जमा पत्र पर 7.75 फीसदी से 7.90 फीसदी के दायरे में यील्ड रही। डेरिवेटिव नुकसान के बीच इंडसइंड बैंक की उधारी लागत में 15 आधार अंक की वृद्धि हुई है।

इक्रा के उपाध्यक्ष (वित्तीय क्षेत्र की रेटिंग) अनिल गुप्ता ने कहा, ‘साल के ​आ​खिर में ऋण वितरण संबंधी जरूरतों के अलावा निजी क्षेत्र के एक बड़े बैंक की तरलता जरूरतों के कारण भी जमा पत्रों को रफ्तार मिली। इस बैंक को जबरदस्त जमा निकासी का भी सामना करना पड़ा होगा।’

क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआईएल) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कुल 2.25 लाख करोड़ रुपये से अ​धिक के जमा पत्र जारी किए गए। पंजाब नैशनल बैंक ने सबसे अ​धिक 35,290 करोड़ रुपये से अधिक के जमा पत्र जारी किए। उसके बाद एचडीएफसी बैंक ने 31,465 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 26,040 करोड़ रुपये, केनरा बैंक ने 20,325 करोड़ रुपये और इंडसइंड बैंक ने 16,550 करोड़ रुपये के जमा पत्र जारी किए।

बैंकों द्वारा जारी जमा पत्रों की परिपक्वता अवधि न्यूनतम सात दिनों से लेकर अधिकतम एक वर्ष तक होती है। मगर वित्तीय संस्थान एक से तीन साल के बीच की परिपक्वता अवधि वाले जमा पत्र जारी कर सकते हैं। इन पत्रों को रेटिंग एजेंसियों द्वारा रेटिंग भी दी जाती है। इससे द्वितीयक बाजार में मांग के आधार पर इन पत्रों की व्यापार क्षमता बढ़ जाती है।

बैंकिंग प्रणाली में जमा पत्र के कई फायदे हैं और इसलिए बैंक उन पर काफी भरोसा करते हैं। इनके जरिये बैंकों को व्यापार अवसर, तरलता प्रबंधन और परिपक्वता अंतराल से निपटने में मदद मिलती है। जमा पत्र थोक साव​​धि जमा के लिए एक सस्ता विकल्प के रूप में भी काम करता है। इससे बैंक के पास मौजूद कुल जमा रकम बढ़ जाती है। इसके अलावा जमा पत्र से बैंकों को परिपक्वता अदायगी में भी मदद मिलती है। इस प्रकार जमा पत्र तरलता प्रबंधन को बेहतर करने में मदद करता है।

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First Published - March 31, 2025 | 11:02 PM IST

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