facebookmetapixel
Advertisement
आरबीआई की विदेशी मुद्रा अदला-बदली योजना जारी रहेगी, 41 अरब डॉलर जुटाए गएStock Market: RBI के फैसले के बाद शेयर बाजार में तेजी! Sensex-Nifty क्यों चढ़े?RBI बदलने जा रहा है Loan Rules! EMI पर क्या पड़ेगा असर?FY28 की शुरुआत में आ सकते हैं पॉलिमर नोट, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया पूरा प्लान₹100 से रियल एस्टेट में निवेश का मौका, Edelweiss ने लॉन्च किया देश का पहला REITs फोक्स्ड फंड; समझें टैक्स नियमRepo Rate नहीं बदली, लेकिन RBI ने दे दिए बड़े इशारे! जानिए 10 बड़ी बातेंMeta ने मानी गलती, सरकार के सामने सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी; सेफ हार्बर’ पर भी मिला सख्त संदेशFranklin India NFO: कम जोखिम वाले डेट फंड में निवेश का मौका, SIP ₹500 से शुरूRBI MPC Meet: ब्याज दरें, बॉन्ड मार्केट, महंगाई और ग्रोथ पर क्या कहतें हैं म्युचुअल फंड्स?177.9 मिलियन डॉलर के साथ शाहरुख नंबर 1, जानें टॉप 5 रैंकिंग में कौन से सेलिब्रिटी हैं शामिल?

ऊपरी श्रेणी में 15 NBFC, RBI के मुताबिक उन्हें पूरी करनी पड़ेंगी ज्यादा नियामकीय जरूरतें

Advertisement

ऊपरी श्रेणी में रखी गई NBFC में एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस, बजाज फाइनैंस और टाटा संस शामिल हैं।

Last Updated- September 14, 2023 | 10:04 PM IST
nbfc, RBI
BS

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज 15 गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के नाम घोषित कर दिए, जिन्हें चालू वित्त वर्ष में आकार आधारित नियमों के अंतर्गत ऊपरी श्रेणी में रख दिया है। इसके बाद इन कंपनियों को अधिक नियामकीय जरूरतें पूरी करनी होंगी।

ऊपरी श्रेणी में रखी गई एनबीएफसी में एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस, बजाज फाइनैंस और टाटा संस शामिल हैं। मगर आरबीआई ने टीएमएफ बिजनेस सर्विसेज लिमिटेड (पुराना नाम टाटा मोटर्स फाइनैंस लिमिटेड) को इसमें शामिल नहीं किया है। हालांकि आकार के आधार पर इसे भी ऊपरी श्रेणी में होना चाहिए मगर उसके कारोबार का ढांचा बदल रहा है, इसलिए उसे सूची से बाहर रखा गया।

पिछले कुछ साल में एनबीएफसी का आकार काफी बढ़ा है और एक दूसरे के साथ उनका संपर्क भी गहरा हुआ है। इसी कारण केंद्रीय बैंक को नवंबर 2021 में इनके लिए आकार पर आधारित नियम (एसबीआर) घोषित करने पड़े। इसमें एनबीएफसी के नियमन के लिए कई तरह के पहलू शामिल किए जाते हैं। इनमें पूंजी की जरूरत, संचालन के पैमाने, दूरदर्शी नियमन आदि लिए गए हैं।

इस व्यवस्था के अनुसार एनबीएफसी को उनके आकार, गतिविधि और संभावित जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों में बांट दिया गया है। सबसे नीचे वाली यानी आधार श्रेणी में जमा नहीं लेने वाली वे एनबीएफसी हैं, जिनकी संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये से कम है और जो पीयर-टु-पीयर लेंडिंग (एक जैसे दो लोगों के बीच कर्ज का लेनदेन), अकाउंट एग्रीगेटर जैसी गतिविधियों में शामिल रहती हैं तथा नॉन-ऑपरेटिव फाइनैंशियल होल्डिंग कंपनी हैं।
1,000 करोड़ रुपये से अधिक आकार वाली सभी एनबीएफसी को बीच वाली श्रेणी में रखा गया है। इनमें ग्राहकों से जमा लेने वाली और नहीं लेने वाली कंपनियां शामिल हैं।

ऊपर की श्रेणी में उन एनबीएफसी को जगह दी गई है, जिन्हें आरबीआई ने अधिक नियामकीय जरूरत बताई है। बैंकिंग नियामक खास पैमानों तथा स्कोरिंग विधि से इन कंपनियों की पहचान करता है। सबसे बड़े आकार वाली 10 शीर्ष कंपनियां हमेशा ऊपरी श्रेणी में ही रहती हैं। आरबीआई कह चुका है कि इन दस कंपनियों पर किसी अन्य बात का कोई असर नहीं होगा और इन्हें ऊपरी श्रेणी में रखा ही जाएगा।

जब किसी एनबीएफसी को ऊपरी श्रेणी में रख दिया जाता है तो उसे इस श्रेणी में आने के बाद से कम से कम पांच साल तक अधिक नियामकीय जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं। बाद में वह ऊपरी श्रेणी के पैमानों पर बेशक खरी नहीं उतरे, पांच साल की शर्त उसे पूरी करनी ही पड़ती है। रिजर्व बैंक ने कहा था कि शीर्ष श्रेणी खाली ही रहेगी।

2021 के नियमों में कहा गया था, ‘यदि रिजर्व बैंक को लगता है कि ऊपरी श्रेणी की कुछ खास एनबीएफसी से पूरे तंत्र को खतरा बढ़ गया है तो उन्हें शीर्ष श्रेणी में रखा जा सकता है। उस सूरत में एनबीएफसी को फौरन शीर्ष श्रेणी में डाल दिया जाएगा।’

Advertisement
First Published - September 14, 2023 | 10:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement