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WPI: थोक महंगाई दर सितंबर में घटकर 0.13% पर; खाने-पीने की वस्तुओं, फ्यूल की कीमतों में नरमी का असर

WPI आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में महंगाई दर सितंबर में शून्य से (Deflation)  5.22 फीसदी नीचे रही

Last Updated- October 14, 2025 | 1:09 PM IST
India WPI Inflation November 2025
Representational Image

WPI September: खाने-पीने की वस्तुओं, ईंधन और मैन्यूफैक्चर्ड उत्पादों की कीमतों में नरमी का असर थोक महंगाई दर के आंकड़ों पर देखने को मिला। सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति घटकर 0.13 फीसदी पर आ गई। अगस्त में थोक महंगाई दर 0.52 फीसदी थी, जबकि पिछले साल सितंबर में यह 1.91 फीसदी दर्ज की गई थी। सरकार की ओर से मंगलवार को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए गए।

उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा कि सितंबर 2025 में थोक महंगाई की दर पॉजिटिव रही। खाद्य उत्पादों, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं, अन्य परिवहन उपकरण और वस्त्र आदि की कीमतों में वृद्धि के चलते महंगाई दर पॉजिटिव दर्ज की गई।

WPI आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में महंगाई दर सितंबर में शून्य से (Deflation)  5.22 फीसदी नीचे रही। जबकि अगस्त में यह 3.06 फीसदी था। सब्जियों की कीमतों में विशेष रूप से गिरावट देखी गई।

सब्जियों में मूल्यह्रास (Deflation) सितंबर में 24.41 फीसदी रहा, जबकि अगस्त में यह 14.18 फीसदी था। विनिर्मित वस्तुओं में मुद्रास्फीति 2.33 फीसदी रही, जो अगस्त में 2.55 फीसदी थी। ईंधन और बिजली में मूल्यह्रास या नेगेटिव महंगाई दर सितंबर में 2.58 फीसदी रही, जबकि पिछले महीने यह 3.17 फीसदी थी।

महंगाई पर रहती है RBI की नजर 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों पर फैसला करते समय महंगाई दर को भी ध्यान में रखता है। रिजर्व बैंक खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों को देखता है। रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में बेंचमार्क पॉलिसी दर (रीपो रेट) 5.5 फीसदी पर स्थिर रखी।

अक्टूबर की मौद्रिक समीक्षा में RBI ने 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान अगस्त के 3.1 फीसदी से घटाकर 2.6 फीसदी कर दिया। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही के लिए महंगाई के आउटलुक के बारे में RBI ने कहा कि मॉनसून की अच्छी प्रगति, अधिक खरीफ बुआई, पर्याप्त जलाशय स्तर और खाद्य अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक खाद्य कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद करेगा।

खुदरा महंगाई दर 8 साल के निचले स्तर पर 

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में घटकर 1.54 फीसदी रह गई जो अगस्त में 2.07 फीसदी थी। खुदरा मुद्रास्फीति दर जून 2017 के बाद से सबसे कम है। यानी, खुदरा महंगाई दर का यह आंकड़ा 8 साल में सबसे कम रहा। इस साल यह दूसरा मौका है जब खुदरा मुद्रास्फीति 2 फीसदी से नीचे रही है। खुदरा महंगाई में आई कमी की मुख्य वजह सब्जियों और दालों सहित खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई सितंबर 2024 में 5.49 फीसदी थी।

First Published - October 14, 2025 | 12:54 PM IST

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