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Windfall Tax Hike: सरकार ने कच्चे तेल पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, जानें प्रति टन के हिसाब से क्या है रेट

भारत सरकार ने एक अधिसूचना में कहा कि पेट्रोलियम कच्चे तेल पर Windfall Tax को 4 अप्रैल से 4,900 रुपये से बढ़ाकर 6,800 भारतीय रुपये ($ 81.43) प्रति मीट्रिक टन कर दिया है।

Last Updated- April 04, 2024 | 10:08 AM IST
Windfall tax on crude oil and petrol-diesel exports abolished, relief to oil producers कच्चे तेल एवं पेट्रोल-डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स खत्म, तेल उत्पादकों को राहत
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Windfall Tax Hike: सरकार ने देश में उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर (WindFall Tax) को बढ़ाने का फैसला लिया है। इस बात की जानकारी सरकार ने बुधवार देर शाम को दी।

क्या है नए रेट?

भारत सरकार ने एक अधिसूचना में कहा कि पेट्रोलियम कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स को 4 अप्रैल से 4,900 रुपये से बढ़ाकर 6,800 भारतीय रुपये ($ 81.43) प्रति मीट्रिक टन कर दिया है। ये नई दरें 4 अप्रैल से प्रभावी हो गई हैं। यह अप्रत्याशित लाभ कर घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चा तेल के लिए है।

वहीं दूसरी ओर सरकार ने डीजल, पेट्रोल और एटीएफ (Aviation fuel) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को शून्य पर बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि अभी डीजल, पेट्रोल और ATF के एक्सपोर्ट को मिल रही छूट आगे भी जारी रहेगी।

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पहले भी बढ़ा था विंडफॉल टैक्स

सरकार ने 15 मार्च को कच्चे पेट्रोलियम पर विंडफॉल टैक्स 4,600 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 4,900 रुपये प्रति टन कर दिया था।

भारत ने पहली बार जुलाई 2022 को विंडफॉल टैक्स लगाया

केंद्र ने 1 जुलाई, 2022 को पेट्रोलियम उत्पादों पर विंडफॉल टैक्स लगाने का ऐलान किया था। उस समय पेट्रोल के साथ डीजल और एटीएफ पर यह टैक्स लगाया गया था। हालांकि इसके बाद की समीक्षा में Petrol को इस टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया गया। विंडफाल टैक्स ऐसी परिस्थितियों में लगाया जाता है जब किसी बाहरी वजह के चलते किसी कंपनी या इंडस्ट्री एकाएक मुनाफा अचानक से बढ़ जाए। जैसे कि विदेशों में किसी क्राइसिस के दौरान वहां तेल महंगा हो जाए तो इससे कंपनियों का मुनाफा एकाएक बढ़ जाता है।

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क्या होता है Windfall Tax?

विंडफॉल टैक्स सरकार द्वारा तब लगाया जाता है जब कोई उद्योग अप्रत्याशित रूप से पर्याप्त मुनाफा कमाता है, जिसका श्रेय आमतौर पर किसी अभूतपूर्व घटना को दिया जाता है।

जब ग्लोबल बेंचमार्क की दरें 75 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाती हैं तो घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स लगाया जाता है। डीजल, एटीएफ और पेट्रोल के निर्यात के लिए, लेवी तब लागू होती है जब मार्जिन 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाता है।

First Published - April 4, 2024 | 9:49 AM IST

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