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आर्थिक समीक्षा में जीडीपी के अनुमानित आंकड़े और हकीकत में अंतर

Last Updated- December 12, 2022 | 9:06 AM IST

अगर नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल के आर्थिक वृद्धि के अनुमानों पर वित्त मंत्रालय के सलाहकारों की रेटिंग की जाए तो संभवत: सभी समीक्षक उन्हें 10 में से 5 अंक देंगे। मोदी के कार्यकाल के दौरान 7 समीक्षा पेश की गई, जिसमें 3 के अनुमान सही आए या वास्तविक वृद्धि को कम आंका गया। एक समीक्षा के आंकड़े नहीं आ पाए, क्योंकि आधार वर्ष बदल गया था। शेष 3 समीक्षा, जो पिछले 3 साल से पेश की जा रही है, उसके आंकड़े हकीकत से दूर रहे हैं।
2020-21 की समीक्षा शुक्रवार को संसद में पेश होने जा रही है, आइए देखते हैं कि इन समीक्षा की क्या स्थिति रही है।
आर्थिक समीक्षा 2013-14): यह समीक्षा अरविंद मायाराम के नेतृत्व वाली टीम ने लिखी थी, जो उस समय आर्थिक मामलों के सचिव थे। इसमें आर्थिक वृद्धि को कम करके आंका गया था। बहरहाल जब जीडीपी के वास्तविक आंकड़े आए तो गणना का तरीका बदल गया था। अब जीडीपी की गणना बाजार भाव पर होती है , जबकि पहले फैक्टर कॉस्ट के मुताबिक अनुमान लगाया जाता था। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि , उद्योग, सेवा के मूल्यवर्धन की भी गणना की जाती है।
आर्थिक समीक्षा 2014-15 : यह आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के नेतृत्व में तैयार की गई पहली समीक्षा थी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से प्रेरणा लेते हुए इसके ढांचे में बदलाव किया गया और इसे दो खंडों में पेश किया गया।
पहले खंड में परिदृश्य और पहलुओं की चर्चा के साथ नीतिगत बातों को लेकर विश्लेषण था।
दूसरे खंड में अर्थव्यवस्था में हर क्षेत्रों में हाल के बदलावों पर चर्चा की गई थी और सांख्यिकीय तालिकाएं व आंकड़े थे। इस तरह से खंड 1 जहां आगे की स्थिति के बारे में था, जबकि खंड 2 में हाल के पहलुओं के बारे में चर्चा थी। यह समीक्षा सही जीडीपी वृद्धि के अनुमान के निकट थी। इसमें 8.1 से 8.5 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया गया था, वास्तविक वृद्धि 8 प्रतिशत रही।  
आर्थिक समीक्षा 2015-16 : इसमें 2016-17 में 7 से 7.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था, जबकि नोटबंदी के बावजूद वास्तविक वृद्धि 8.3 प्रतिशत रही। इस समीक्षा में वृद्धि को कम आंका गया था।
आर्थिक समीक्षा 2016-17: 2017-18 की वास्तविक आर्थिक वृद्धि इस समीक्षा में लगाए गए अनुमान की सीमा के बीच रही। इसमें वाल्यूम 1 और वाल्यूम 2 को पेश करने की तिथि अलग अलग थी।
वॉल्यूम 1 सरकार द्वारा नवंबर 2016 में नोटबंदी की घोषणा के बाद फरवरी 2017 में पेश किया गया। वहीं वाल्यूम 2  जीएसटी लागू किए जाने के एक महीने बाद अगस्त 2017 में पेश किया गया।
आर्थिक समीक्षा 2017-18: इस साल और उसके बाद से समीक्षा में आर्थिक वृद्धि का सही अनुमान नहीं लगाया गया और बड़े अंतर से बढ़ा हुआ अनुमान लगाया गया। इस साल 7 से 7.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया, लेकिन 2018-19 में आर्थिक वृद्धि दर महज 6.1 प्रतिशत रही।
आर्थिक समीक्षा 2018-19: यह मौजूदा आर्थिक सलाहकार कृ ष्णमूर्ति समुब्रमण्यन के नेतृत्व में लिखी गई पहली समीक्षा थी। इसमें जीडीपी की वास्तविक वृद्धि और अनुमान में कोई तालमेल ही नहीं रहा। आर्थिक वृद्धि महज 4.2 प्रतिशत रही, जबकि समीक्षा में 7 प्रतिशत का अनुमान लगाया गया था। संभवत: अर्थव्यवस्था पर मंदी के प्रभाव के और कोविड-19 के शुरुआती असर के कारण ऐसा हुआ।
आर्थिक समीक्षा 2019-20: कैलेंडर वर्ष 2020 की शुरुआत से ही किसी के लिए आंकड़ों का अनुमान लगाने के हिसाब से 2020-21 एक कठिन वर्ष है। जनवरी के अंत में संसद में पेश समीक्षा में 7 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। अब आधिकारिक रूप से अनुमान लगाया गया है कि इस वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 7.7 प्रतिशत संकुचन आएगा।
2013-14 की आर्थिक समीक्षा के मुख्य लेखकों में से एक इला पटनायक ने कहा कि वित्त मंत्रालय को क्षमताओं के मॉडलिंग व अनुमान पर संसाधन लगाने और इसे ढांचागत और नियमित कवायद के रूप में किए जाने की जरूरत है।
एक अर्थशास्त्री ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि तमाम देशों में यह कवायद अन्य विशेषज्ञ संगठनों द्वारा की जाती है, जो यह काम ज्यादा संगठित और पारदर्शी तरीके से करते हैं।

First Published - January 28, 2021 | 11:14 PM IST

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