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मार्च में बढ़ी खुदरा महंगाई

Last Updated- December 12, 2022 | 6:00 AM IST

मार्च में खुदरा मूल्य पर आधारित महंगाई दर 4 महीने के उच्च स्तर 5.52 प्रतिशत पर पहुंच गई है। प्रमुख वस्तुओं के साथ मोटे अनाज व सब्जियों को छोड़कर खाने के सामान की दरों में वृद्धि के कारण ऐसा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह से भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) नीतिगत दरों में कटौती करने से परहेज कर सकती है, जब तक कि 2021-22 में क्षेत्रीय स्तर पर लॉकडाउन के कारण वृद्धि पर वास्तव में असर न पडऩे लगे।
फरवरी, 2021 में खुदरा मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 5.03 प्रतिशत और मार्च 2020 में 5.84 प्रतिशत थी।
2020-21 में औसत महंगाई दर में 6.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले साल इसमें 4.76 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। एमपीसी के अनुमान के मुताबिक औसत महंगाई दर चालू वित्त वर्ष में घटकर 5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है।
मार्च महीने में खाद्य महंगाई दर 4.94 प्रतिशत हो गई, जो इसके पहले महीने में 3.87 प्रतिशत थी। हालांकि इस दौरान सब्जियों व मोटे अनाज के दाम गिरे हैं। मार्च में सब्जियों के दाम में पिछले महीने के 6.27 प्रतिशत के मुकाबले 4.83 प्रतिशत की कमी आई है। मार्च में फलों के दाम 7.86 प्रतिशत बढ़े हैं।
वहीं मांसाहारी खाद्यों के दाम बढ़े हैं, जबकि अंडों के दाम कम हुए हैं। मांस और मछली की दरें मार्च में 15.09 प्रतिशत बढ़ी हैं, जो पहले के महीने में 11.34 प्रतिशत थीं। चीनी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति  नैयर ने कहा, ‘खाद्य वस्तुओं के दाम में हर माह गिरावट के बावजूद मार्च में महंगाई बढ़ी है, जिसकी वजह आधार है।’
ईंधन और बिजली की महंगाई दर 3.53 प्रतिशत से बढ़कर 4.50 प्रतिशत हो गई है। मार्च, 2020 के सूचकांक न होने के कारण पेट्रोल व डीजल की महंगाई दर जानना कठिन है। बहरहाल ऐसा लगता है कि फरवरी 2021 की तुलना में मार्च 2021 में इनके दाम बढ़े हैं। फरवरी 2021 में पेट्रोल की महंगाई दर बढ़कर 20.67 प्रतिशत हो गई थी, जो इसके पहले महीने में 12.53 प्रतिशत थी।

First Published - April 12, 2021 | 11:37 PM IST

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