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आरबीआई ने दी लाभांश को मंजूरी

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Last Updated- December 15, 2022 | 3:27 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) वित्त वर्ष 2019-20 के लिए केंद्र सरकार को 57,128 करोड़ रुपये का लाभांश देगा। आरबीआई ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। इससे पिछले वर्ष केंद्रीय बैंक ने लाभांश के रूप में सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये दिए थे।
सरकार ने राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए लाभांश मद में आरबीआई से 60,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था। हालांकि राजस्व में कमी की चोट से कराह रही सरकार को लग रहा था कि केंद्रीय बैंक संभवत: उसे बजट अनुमान से अधिक ही रकम देगा। कोविड-19 संकट और सुस्त आर्थिक गतिविधियों के कारण सरकार का राजस्व संग्रह प्रभावित हुआ है। हाल में जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 के पहले तीन महीनों में केंद्र का राजकोषीय घाटा 6.62 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पूरे वर्ष के अनुमानित आंकड़े का 83 प्रतिशत है। आरबीआई से अधिक रकम मिली होती घाटा थोड़ा कम करने में मदद मिली होती, लेकिन लाभांश के रूप में जितनी रकम आई है, वह सरकार के बजट अनुमान से भी कम है।
शुक्रवार को आरबीआई के निदेशक मंडल की बैठक हुई, जिसके बाद सरकार को अधिशेष रकम देने का निर्णय लिया गया। रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि कोविड-19 संकट से कर एवं गैर-कर राजस्व स्रोतों और विनिवेश से मिली रकम के मुकाबले राजकोषीय घाटा कहीं अधिक पहुंच गया है। मोटे तौर पर इन स्रोतों से प्राप्त रकम भारत सरकार के वित्त वर्ष 2020-21 के अनुमान के मुकाबले 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक रह सकती है। वैसे अर्थशास्त्रिों ने इस वर्ष आरबीआई से अपेक्षाकृत कम लाभांश मिलने का अनुमान जताया था, लेकिन मिली रकम मोटे तौर पर अनुमानों के अनुरूप ही कही जा सकती है।
आईडीएफसी फस्र्ट बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान ने कहा, ‘इस बार आरबीआई ने विदेशी मुद्रा की लिवाली अधिक की है। जब आरबीआई अपने पास जमा डॉलर ऐतिहासिक कीमतों, माने लें 45 रुपये, पर बेचता है तो इसे अधिक मुनाफा मिलता है। हालांकि इस वर्ष आरबीआई ने बिकवाली के बजाय विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ाने पर जोर दिया। इससे काफी हद तक के आरबीआई के मुनाफे में कमी आई होगी।’ इस वर्ष 7 अगस्त तक आरबीआई का विदेशी मुद्रा भंडार 538 अरब डॉलर था, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 100 अरब डॉलर अधिक है।
केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘जिस वर्ष केंद्रीय बैंक नकदी समायोजन व्यवस्था (एलएएफ) पर अधिक जोर देता है उसमें वह अधिक रकम अर्जित करता है। वित्त वर्ष 2021 में आरबीआई ने रिवर्स रीपो के मोर्चे पर अधिक सक्रियता दिखाई है, इसलिए शुद्ध आय कम रह सकती है। इसकी वजह यह है कि रीपो जैसे टारगेटेड लॉन्ग टर्म रीपो ऑपरेशंस (टीएलटीआरओ) से प्राप्त कमाई के मुकाबले भुगतान के मद में आरबीआई के खजाने से अधिक रकम बाहर जाएगी। इस महीने के अंत में सालाना रिपोर्ट जारी होने के बाद ही बारीक बातें सामने आएंगी, लेकिन अधिक लाभांश अंतरण का प्रावधान किए जाने की गुंजाइश आगे कम ही लग रही है।

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First Published - August 14, 2020 | 11:06 PM IST

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