वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच अक्टूबर 2008 से मांग में कमी के चलते भारतीय निर्यात में मार्च के दौरान 33.3 फीसदी की गिरावट आई है। गौरतलब है कि निर्यात में लगातार छठे महीने गिरावट दर्ज हुई। वित्त वर्ष 2008-09 में देश का कुल निर्यात 168.70 अरब डॉलर रहा। निर्यात में वृध्दि की दर 3.4 रही। […]
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यह 2007 की बात है जब देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो होंडा ने ग्रामीण बाजार के लिए अपना केंद्र खोला था। इसके लिए 500 से ज्यादा सेल्स रिप्रेजेंटेटिव गांवों में लगाए गए। उन्हें गांवों में पंचायत सदस्यों, प्रधानाध्यापक और डाकिए से मिलने को कहा गया। उन्हें ग्रामीण मेलों में अपने उत्पादों […]
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जगदीप कपूर की समसिका मार्केटिंग कंसल्टेंट्स के पास कैरियर, ओटिस, सिंथॉल, फेविकोल, रिलायंस और गोदरेज जैसे क्लाइंट हैं। 1983 में एमबीए के बाद वोल्टास से करियर शुरू करने वाले कपूर जीटीसी इंडस्ट्रीज और पार्ले एग्रो समेत कई कंपनियों के लिए काम कर चुके हैं। कपूर से भैरवी अय्यर की बातचीत के अंश। क्या आपको लगता […]
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मंदी से हिचकोले खा रही अर्थव्यवस्था को मिली जुली खबरें मिल रही हैं। आयात और निर्यात के मोर्चे से आई खबरों ने अर्थव्यवस्था को कुछ खुश किया, तो कहीं मायूस भी किया। पिछले कुछ महीनों के दौरान देश में संवेदनशील उत्पादों के आयात में 30.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। सबसे अधिक तेजी ऑटो कलपुर्जों […]
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यद्यपि उधारी देने में तेजी आ रही है लेकिन जोखिम न उठाने का मामला अभी भी दिख रहा है। गैर-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियां (एनबीएफसी) अब ऋण देने के लिए अधिक कोलेटरल (जमानत) की मांग कर रही हैं। एनबीएफसी के सूत्रों ने बताया कि कुछ खास मामलों, जैसे प्रवर्तकों की फंडिंग, में एनबीएफसी ने न केवल जमानत […]
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भारत में संवेदनशील उत्पादों के आयात वित्त वर्ष 2008-09 की अप्रैल से फरवरी की अवधि के दौरान 30.5 फीसदी बढ़कर 43,000 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 32 953 करोड़ रुपये का आयात हुआ था। संवेदनशील उत्पादों में वे चीजें शामिल हैं, जिनकी घरेलू उद्योग पर पड़ने वाले असर के […]
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महंगाई की दर 18 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान बढ़कर 0.57 फीसदी हो गई। यह इसके पिछले सप्ताह में 0.26 फीसदी के स्तर पर थी। थोक मूल्य सूचकांक 0.6 फीसदी चढ़कर 230 अंक पर आ गया। प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक भी बढ़कर 1.7 फीसदी हो गई है, जबकि विनिर्मित वस्तुओं के सूचकांक में […]
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हर कोई इस वक्त मंदी के दौर के जल्द से जल्द बीतने की दुआ कर रहा है। वैसे तो कोई भी इस बात को पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि मंदी का काला साया आखिर कब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था को बेहाल करके रखेगा। लेकिन यूबीएस के ताजा सूचकांक के मुताबिक मंदी का दौर इसी […]
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दुनिया भर में फैली हुई आर्थिक मंदी और नकदी की किल्लत ने भारतीय कंपनियों की वित्तीय सेहत भी बिगाड़ कर रख दी है। खास तौर पर अक्टूबर 2008 से इन पर ज्यादा बोझ पड़ा है। इसीलिए पहले से कहीं ज्यादा कंपनियां अपने कर्ज के भूत का इलाज ढूंढने पर जुट गई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक […]
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जीवन बीमा कंपनियों ने साल 2007-08 में 4,172.01 करोड रुपये की अतिरिक्त पूंजी जोड़ी है। 31 मार्च 20078 को जीवन बीमा कंपनियों की कुल पूंजी 12,196.42 करोड रुपये थी। साल 2007-08 में बीमा कंपनियों ने देश में अपनी उपस्थिति में 65 प्रतिशरत का इजाफा भी किया। भातीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के साल […]
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