facebookmetapixel
Advertisement
महंगा कच्चा माल… फिर भी रिकॉर्ड कमाई! आखिर कंपनियां कर क्या रही हैं?Gold, Silver Price Today: सोना ₹757 चढ़ा, चांदी ₹2266 चमकी; क्रूड की नरमी ने दिया सपोर्टएक के बाद एक संकट झेलने वाली Gopal Snacks की वापसी? ब्रोकरेज को दिखी 64% तेजीजुलाई में IPO की बरसात, ₹9,275 करोड़ का Manipal Health इश्यू आखिरी बड़ा दांवGIFT City में पड़े लावारिस पैसों के लिए बनेगा खास फंड, जानिए किसे मिलेगा पैसाTCS-Infosys से Wipro तक… 5 दिग्गज IT कंपनियों की रिपोर्ट ने बढ़ाई निवेशकों की चिंताIndiGo का राजस्व 19% बढ़ा, फिर भी ₹240 करोड़ का नुकसान क्यों हुआ?विदेशी निवेशक लौटे तो इन शेयरों में आ सकती है बड़ी तेजी, PGIM की रिपोर्टशेयर बाजार के नियमों में होगा बड़ा बदलाव, संसदीय समिति ने SMC Bill पर लगाई मुहरAI के दौर में बदला IT बिजनेस! Mphasis ने अपनाया ऐसा मॉडल, ग्राहकों को भी आ रहा पसंद

MGNREGS: धन की कमी, मगर मनरेगा में बनी हुई है काम की मांग

Advertisement

हाल के वित्तीय बयान के मुताबिक देश के करीब 80 प्रतिशत राज्यों में मनरेगा के तहत आवंटित राशि से ज्यादा खत्म हो चुका है।

Last Updated- November 03, 2023 | 6:16 AM IST
MNREGA

अक्टूबर में मौसमी मंदी के बावजूद महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम की मांग तेज बनी रही। यह आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब मनरेगा में आवंटित धन का आवंटन खत्म होने वाला है।

हाल के वित्तीय बयान के मुताबिक देश के करीब 80 प्रतिशत राज्यों में मनरेगा के तहत आवंटित राशि से ज्यादा खत्म हो चुका है।

वेबसाइट से एकत्र किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस योजना के तहत व्यय करीब 77,634 करोड़ रुपये है, जबकि कुल उपलब्ध राशि 68,014 करोड़ रुपये है। इस तरह से करीब 9,619.53 करोड़ रुपये की कमी है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 24 के बजट अनुमान में मनरेगा के लिए महज 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किया था।

उधर रिपोर्टों में कहा गया है कि पूरक अनुदान मांग के माध्यम से इस योजना में करीब 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये डाले जाने की संभावना है, जिससे साल के शेष महीनों में योजना को आसानी से चलाया जा सके।

वेबसाइट के आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर में करीब 18.37 करोड़ परिवारों ने मनरेगा के तहत काम की मांग की है। यह मांग सितंबर की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन यह पिछले साल के समान महीने की तुलना में 18.5 प्रतिशत ज्यादा है।

साथ ही अगर कोविड प्रभावित वर्षों 2020-21 और 2021-22 को छोड़ दें तो यह मांग 2014-15 वित्त वर्ष से अब तक की सबसे बड़ी काम की मांग में से एक है।

Advertisement
First Published - November 3, 2023 | 6:16 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement