facebookmetapixel
Advertisement
कमजोर मॉनसून के अनुमान से FMCG कंपनियां सतर्क; बेचेंगी ज्यादा माल, कम बढ़ाएंगी दामएयरटेल को बड़ी राहत! ट्राई के शुरुआती रुख में नेट-न्यूट्रैलिटी नियमों के उल्लंघन से इनकारमारुति की छोटी कारों की बिक्री में 147% की जबरदस्त उछाल, उत्पादन सुधार और CNG मांग से बढ़तमोबिस इंडिया प्लांट में आग से ह्युंडै-किया के उत्पादन पर होगा असर! एक हफ्ते तक सप्लाई बाधित होने की आशंकावॉकहार्ट को जैयनिच से 1.5 अरब डॉलर की बिक्री की उम्मीद, शेयर में 21% की छलांगमई में यात्री वाहनों की बिक्री में 25.4% की जोरदार बढ़ोतरी, SUV और EV मांग में तेजी जारीब्याज दर बढ़ाना नहीं है समाधान, रुपया संभालने के लिए RBI को आजमाने कुछ नए विकल्पभारतीय बैंकों में बढ़ा अमीरों का दबदबा, टर्म डिपॉजिट जमा में बड़े जमाकर्ताओं की हिस्सेदारी हुई एक-तिहाईमई में GST संग्रह ने पकड़ी रफ्तार, 3.3% की बढ़त के साथ 1.67 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा राजस्व संग्रहEditorial: डिजिटल क्रांति के बीच RBI का प्लास्टिक नोट लाने का फैसला

LRS: पहली तिमाही में तेजी से विदेश भेजा गया धन

Advertisement

RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक LSR के तहत वित्त वर्ष 24 की पहली तिमाही में 9.1 अरब डॉलर भेजा गया

Last Updated- August 23, 2023 | 11:12 PM IST
RBI Dividend: What is the reason for Reserve Bank of India giving huge dividend to the government? economists explained RBI Dividend: रिजर्व बैंक के सरकार को भारी लाभांश देने की क्या है वजह? अर्थशास्त्रियों ने समझाया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत वित्त वर्ष 24 के अप्रैल-जून के दौरान 9.1 अरब डॉलर विदेश भेजा गया, जिसमें वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही की तुलना में 50.64 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। मुख्य रूप से इक्विटी व डेट में निवेश, जमा और अंतरराष्ट्रीय यात्राएं सामान्य होने की वजह से ऐसा हुआ है।

रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक एलआरएस के तहत वित्त वर्ष 24 की पहली तिमाही में 9.1 अरब डॉलर भेजा गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में 6.05 अरब डॉलर भेजा गया था। 2022-23 की अंतिम तिमाही की तुलना में विदेश धनप्रेषण 17 प्रतिशत बढ़ा है।

एलआरएस योजना 2004 में आई थी। इसमें सभी भारतीयों को व्यक्तिगत रूप से एक वित्त वर्ष में 2,50,000 डॉलर भेजने की अनुमति मिली थी, जो किसी भी अनुमति प्राप्त चालू या पूंजी खाते या दोनों खातों से मिलाकर बगैर किसी शुल्क भेजा जा सकता है। शुरुआत में इस योजना के तहत 25,000 डॉलर भेजने की अनुमति थी, जिसे बाद में बढ़ाया गया।

पिछले साल की तुलना में इक्विटी व डेट निवेश बढ़ने, अचल संपत्ति खरीदने व जमा की वजह से विदेश धनप्रेषण बढ़ा है। वित्त वर्ष 24 की पहली तिमाही में इक्विटी व डेट में निवेश बढ़कर 50.373 करोड़ डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 22.374 करोड़ डॉलर था।

इसी तरह अचल संपत्ति में निवेश 122 प्रतिशत बढ़कर 8.994 करोड़ डॉलर हो गया है। विदेश में जमा करीब 62 प्रतिशत बढ़कर 43.059 करोड़ डॉलर हो गया है।

इन क्षेत्रों में धनप्रेषण में तेजी की एक वजह यह है कि एलआरएस पर स्रोत पर कर संग्रह 1 अक्टूबर 2023 तक के लिए टाल दिया गया है।

Advertisement
First Published - August 23, 2023 | 11:12 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement