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स्टील की तरह लैपटॉप-पीसी आयात पर होगी पैनी नजर!

Laptop-PC Import: निगरानी तंत्र विकसित करने की तैयारी, मंत्रालय विदेश व्यापार महानिदेशालय के अ​धिकारियों के साथ इस महीने के अंत में करेगा बैठक

Last Updated- September 17, 2023 | 10:48 PM IST
Like steel, laptop-PC imports will be closely monitored!

सरकार ने लैपटॉप और अन्य आईटी हार्डवेयर के आयात पर नजर रखने तथा उसके बारे में पहले से ही जानकारी हासिल करने के लिए स्टील आयात निगरानी तंत्र की तरह ही व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है। इस मामले के वाकिफ लोगों ने इसकी जानकारी दी।

सरकार ने 1 नवंबर से लैपटॉप, टैबलेट, पर्सनल कंप्यूटर, सर्वर आदि जैसे इले​क्ट्रॉनिक उपकरणों के आयात पर बंदिश लगाने का निर्णय किया है। इसके प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय हितधारकों के साथ इसके गुण-दोषों पर गहनता से विचार-विमर्श कर रहा है।

इस मामले के जानकार एक शख्स ने बिज़नेस स्टैंडर्ड ने कहा, ‘इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस बारे में अंतिम निर्णय लेगा और इसे प्रभावी तरीके से लागू करने की रूपरेखा तय करने में लगा है। मंत्रालय विदेश व्यापार महानिदेशालय के साथ भी इस बारे में इस माह के अंत तक बैठक करेगा।’

सरकार ने पिछले महीने इस तरह की वस्तुओं का आयात लाइसेंस के जरिये करने के निर्णय के पीछे नागरिकों के सुरक्षा जो​खिम को प्राथमिक वजह बताया था। इसके अलावा अगस्त के इस निर्णय के पीछे सरकार का मकसद चीन से आयात घटाना और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना भी है।

स्टील आयात निगरानी तंत्र एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसके तहत देश में बाहर से आने वाले सभी तरह के इस्पात उत्पादों को आयात करने से पहले पंजीकरण कराना होता है। इस व्यवस्था के तहत आयातकों को ऑनलाइन वेब पोर्टल के जरिये पंजीकरण नंबर प्राप्त करने के लिए आयात की वास्तविक ति​थि से कम से कम 60 दिन पहले ऑनलाइन सिस्टम में अग्रिम में जानकारी देनी होती है। यह व्यवस्था पिछले 4 साल से लागू है।

उक्त शख्स ने बताया, ‘इस सिस्टम के तहत, एक ऑनलाइन प्रक्रिया होगी, जहां आयातक को सीमा शुल्क विभाग को संबं​धित उत्पाद के प्रवेश के बिल (बिल ऑफ एंट्री) जमा करने से पंजीकरण कराना होगा।’

इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के आयात पर बंदिश के निर्णय का उद्योग के साथ-साथ अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे व्यापारिक भागीदारों के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। उद्योग के प्रतिनिधि सरकार से नई आयात नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने इसे लागू करने की समयसीमा को 1 नवंबर से आगे बढ़ाने की भी मांग की है ताकि उद्योग को इस तरह के बदलाव के लिए तैयारी करने के वास्ते पर्याप्त समय मिल सके।

अमेरिका की पीसी और सर्वर विनिर्माताओं ऐपल, डेल, एचपी और सिस्को आदि ने भी इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वे चीन तथा द​क्षिण- पूर्व ए​शियाई देशों में अपने बड़े विनिर्माण केंद्रों के जरिये भारतीय बाजार में उत्पादों की आपूर्ति करते हैं।

बीते कुछ दशक से तकनीकी फर्मों ने काफी जटिल और आपस में जुड़ी वै​श्विक आपूर्ति श्रृंखला विकसित की है। आईसीटी क्षेत्र में डिजाइन और नवोन्मेष में अमेरिका अग्रणी है जबकि मूल कंपनियां ऐसे उत्पादों का ज्यादातर विनिर्माण चीन की विनिर्माण सेवा कंपनियों से कराती हैं।

मामले के जानकार शख्स ने कहा, ‘हितधारकों के साथ परामर्श के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस बारे में निर्णय करेगा कि नए आयात नियम को लागू करने की समयसीमा और आगे बढ़ाई जाए या नहीं।’

First Published - September 17, 2023 | 10:48 PM IST

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