facebookmetapixel
सिगरेट पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, 10% तक टूट ITC और गोडफ्रे फिलिप्स के शेयर; 1 फरवरी से लागू होंगे नियमहोटलों को एयरलाइंस की तरह अपनाना चाहिए डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल: दीक्षा सूरीRBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट, क्रिप्टो पर सतर्कता; CBDC को बढ़ावाउभरते आर्थिक दबाव के बीच भारतीय परिवारों का ऋण बढ़ा, पांच साल के औसत से ऊपरनया साल 2026 लाया बड़े नीतिगत बदलाव, कर सुधार और नई आर्थिक व्यवस्थाएंसरकार ने 4,531 करोड़ रुपये की बाजार पहुंच समर्थन योजना शुरू कीअनिश्चित माहौल में सतर्कता नहीं, साहस से ही आगे बढ़ा जा सकता है: टाटा चेयरमैनपुरानी EV की कीमत को लेकर चिंता होगी कम, कंपनियां ला रही बायबैक गारंटीऑटो PLI योजना का बढ़ेगा दायरा, FY27 से 8 और कंपनियों को मिलेगा प्रोत्साहनLPG Price Hike: नए साल की शुरुआत में महंगाई का झटका, LPG सिलेंडर ₹111 हुआ महंगा

चीन के मुकाबले बढ़ रहा है भारत का व्यापार शुल्क

Last Updated- December 11, 2022 | 10:01 PM IST

महामारी के आरंभ से पहले के दो वर्ष तक भारत का व्यापार शुल्क चीन के मुकाबले बढ़ रहा है। 2019 में सभी उत्पादों पर भारत का औसत प्रभावी लागू टैरिफ 10.21 फीसदी था जबकि चीन के लिए यह 5.39 फीसदी था। यह जानकारी विश्व बैंक के ताजा आंकड़ों से सामने आई है। सहस्त्राब्दी से दोनों देश टैरिफ में कमी ला रहे हैं लेकिन 2019 तक दो वर्ष के लिए उपलब्ध आंकड़ों के  मुताबिक दोनों देशों ने अलग अलग रुझान दर्शाए हैं।
भारत ने हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में विकासशील देश के तौर पर आसान नियमों के चीन के दावे संबंधी मुद्दे को उठाया। भारत ने इंगित किया कि चीन अब एक उच्च मध्य आय वाला देश है। ऐसे में उसके द्वारा विकासशील देश की पहचान के तहत लाभ उठाने पर प्रश्चनचिह्नï खड़ा होता है। चीन ने कहा कि विकासशील देश की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। वह अपने को अभी भी विकासशील देशों के समूह में इसलिए रखता है कि उसकी स्थिति विश्व के कई सारे विकसित देशों से पीछे है। चीन ने दिसंबर में डब्ल्यूटीओ के सदस्य के तौर पर 20 वर्ष पूरे किए।

मौजूदा अमेरिकी डॉलर के सदर्भ में चीन का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 2001 के 1,053.1 डॉलर से बढ़कर 2020 में 10,434.8 डॉलर हो गया। इसी दौरान भारत 451.6 डॉलर से बढ़कर 1,927.7 डॉलर पर पहुंचा है। डब्ल्यूटीओ सदस्य के तौर पर चीन के 20 वर्ष को चिह्नित करने के लिए जारी किए गए एक वक्तव्य में डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो इवेला ने कहा था कि वैश्विक व्यापार एकीकरण ने चीन की वृद्घि और विकास को बढ़ाने में मदद की। 
वैश्विक निर्यात आंकड़ों का बिजनेस स्टैंडर्ड की ओर से किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि विगत 20 वर्षों में चीन वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा कब्जाने में सफल रहा है। उसने 2017 में ही अमेरिका को इस मामले में पीछे छोड़ दिया था। 

2019 में अमेरिका की 10.2 फीसदी की हिस्सेदारी के मुकाबले चीन की हिस्सेदारी 10.6 फीसदी थी। वहीं 2020 में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 12.1 फीसदी हो गई जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी कम होकर 9.5 फीसदी पर आ गई।
चीन की बढ़ती व्यापारिक प्रतिस्पर्धा ने विगत 20 वर्षों में भारत के मुकाबले अधिक संख्या में श्रमबल को रोजगार में बनाए रखा है। 2001 में चीन में श्रमबल की भागीदारी दर 76.66 फीसदी थी जो कि भारत के 57.64 फीसदी से अधिक है। 2020 में चीन में यह संख्या 66.82 फीसदी पर आ गई और भारत में 46.29 फीसदी पर। 

ईरान की शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्रोलॉजी से सैयद अली मदनीजादेह और इंग्लैंड की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से हनिफा पीलवर द्वारा फरवरी 2019 में द इंपैक्ट ऑफ ट्रेड ओपननेस ऑन लेबर फोर्स पार्टीसिपेशन रेट शीर्षक से लिखे गए पेपर के मुताबिक श्रम बल की भागीदारी में सुधार कारोबार को खोलने से हो सकता है।

First Published - January 16, 2022 | 11:15 PM IST

संबंधित पोस्ट