facebookmetapixel
Advertisement
विकसित भारत के लिए युवाओं को कौशल और डिजिटल ट्रेनिंग देने पर जोरहोर्मुज में जंग के बीच नाविकों के सामने दो विकल्प, सुरक्षित रहें या ज्यादा कमाएंPM मोदी से मिले 20 स्पेस स्टार्टअप के CEO, निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोरबांग्लादेश के पीएम का भारत दौरा अटका, ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने पर भी संशयउदारीकरण के 35 साल: ​1991 के बाद टेलीविजन ने कैसे बदला भारतीय मीडियाEPFO का जिला स्तर पर विस्तार प्लान, रोजगार योजना की रियल टाइम निगरानी होगीभारतीय बैंकों की डॉलर बॉन्ड में दौड़ तेज, आरबीआई की सस्ती स्वैप विंडो का उठा रहे फायदासौर परियोजनाओं की अटकी डील सुलझाएगा मंत्रालय, डिस्कॉम से PPA पर बातचीतपरमाणु बिजली के लिए पारदर्शी शुल्क ढांचा चाहता है उद्योग, 8 रुपये प्रति यूनिट की सीमा की मांगछोटी कंपनियों पर म्युचुअल फंड्स का बड़ा दांव, एंकर निवेश के बाद भी लंबी अवधि तक बने रहते हैं

भारत का वैश्विक चालू खाते का संतुलन खराब

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 1:51 PM IST

चालू खाते के असंतुलन के मामले में भारत का प्रदर्शन कई अन्य उभरते बाजार की तुलना में खराब रहा है। व्यापार व अन्य साधनों से किसी देश से बाहर जाने वाले धन और इस तरह के माध्यमों से आने वाले धन से चालू खाते का संतुलन पता चलता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का अनुमान है कि 2022 में भारत के चालू खाते का घाटा उसके सकल घरेलू उत्पाद के 3.5 फीसदी के बराबर रह सकता है। यह अब तक का सबसे बड़ा घाटा होगा।
मंगलवार को जारी आईएमएफ के विश्व आर्थिक आउटलुक के विश्लेषण से पता चलता है कि अन्य उभरते बाजारों का चालू खाते का संतुलन हाल की आर्थिक अस्थिरता से उतनी बुरी तरह प्रभावित नहीं हुई है। लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के अलावा भारत का चालू खाते का संतुलन ब्राजील, चीन, रूस और एशिया और यूरोप के विकासशील देशों से काफी खराब है।
विश्व बैंक के अतिरिक्त डेटा के अनुसार, वर्ष 2012 में टैपर टैंट्रम से पहले भारत का चालू खाते का घाटा करीब 5 फीसदी तक पहुंच चुका था। कोविड-19 के दौरान वैश्विक चालू खाते का संतुलन बढ़ गया। हाल ही में जिंसों की कीमतों में अस्थिरता के कारण भी इसमें तेजी आई है। आईएमएफ की रिपोर्ट में बताया गया, ‘जहां वैश्विक व्यापार वृद्धि में घट रही है, वहीं वैश्विक व्यापार संतुलन व्यापक हो गया है।
2011-19 के दौरान संकुचन के बाद वैश्विक चालू खाता शेष-सभी अर्थव्यवस्थाओं का चालू खाता घाटा और अधिशेष का योग-कोविड-19 के दौरान बढ़ गया और उम्मीद की जा रही है कि 2022 में और बढ़ेगा। 2022 में दर्शाया गया है कि यूक्रेन में युद्ध से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, जिसने तेल के शुद्ध निर्यातकों के लिए संतुलन बढ़ा दिया है और शुद्ध आयातकों के लिए कम कर दिया है।’
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भी अन्य देशों की तुलना में भारत पर बुरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यह अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80 फीसदी आयात करता है। इससे मुद्रास्फीति पर भी असर पड़ती है। 2022 में भारत में उपभोक्ता कीमतों में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। हालांकि, अन्य देशों में मुद्रास्फीति की संख्या अधिक है।
आईएमएफ को उम्मीद है कि 2023 में मुद्रास्फीति में गिरावट शुरू हो जाएगी। हालांकि, यह कहा गया है कि यह ऊर्जा या खाद्य कीमतों में किसी भी वृद्धि से प्रभावित हो सकता है।
 

Advertisement
First Published - October 11, 2022 | 10:35 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement