facebookmetapixel
Advertisement
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का रिकॉर्ड पैकेज, FY26 में मिले 158.66 करोड़ रुपयेStock Market: RBI-Fed बैठक से पहले बाजार में सन्नाटा! निवेशकों को क्या करना चाहिए?चीनी कीमतों में तेजी पर सरकार सख्त, डीलरों पर लगाई स्टॉक लिमिट; क्या अब सस्ती होगी चीनी?WazirX ने लॉन्च किया फ्री क्रिप्टो टैक्स रिपोर्टिंग टूल Taxlyst, निवेशकों के लिए आसान होगी ITR फाइलिंगPresumptive Taxation Scheme के तहत ITR File कर रहे हैं? टैक्स के नियम पहले जान लेंअब डॉलर में मिलेगा इंश्योरेंस क्लेम का पैसा! Policybazaar ने शुरू की नई सर्विस, जानें किसे मिलेगा फायदाL&T Q1FY27 results: मुनाफा 14% बढ़कर ₹4,123 करोड़; ऑर्डर इनफ्लो ₹1 लाख करोड़ के पारक्या 8वें वेतन आयोग के साथ ‘Old Pension Scheme’ भी होगी लागू? सरकार ने संसद में दिया जवाबहाई वैल्यूएशन भी नहीं रोक पाया मिड और स्मॉल-कैप फंड्स का क्रेज, दो साल में जुड़े करीब 2 करोड़ नए फोलियोExplainer: क्या UPI, NEFT या RTGS से पैसे भेजने पर भी आ सकता है टैक्स का नोटिस? समझें पूरा नियम

भारत में FDI सालाना आधार पर 21% घटा, अप्रैल-जून में $4.9 अरब का निवेश; Q1 में निकासी ने बढ़ाई मुश्किल

Advertisement

आरबीआई आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही में भारत का शुद्ध एफडीआई 21 प्रतिशत घटा, जबकि सकल आवक बढ़ी और अमेरिका, साइप्रस व सिंगापुर से सबसे ज्यादा निवेश आया

Last Updated- August 29, 2025 | 9:55 PM IST
FDI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में सालाना आधार पर 21.1 प्रतिशत घटकर 4.91 अरब डॉलर हो गया है, जो अप्रैल-जून 2024 के दौरान 6.22 अरब डॉलर था। शुद्ध एफडीआई देश में सकल आवक और सकल निकासी का अंतर होता है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि देश से ज्यादा धन निकासी और विनिवेश के कारण ऐसा हुआ है। 

 वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सकल एफडीआई 25.17 अरब डॉलर था, जो एक साल पहले की समान अवधि के 22.77 अरब डॉलर की तुलना में ज्यादा है। सकल एफडीआई अधिक होने से संकेत मिलता है कि भारत निवेश का आकर्षक केंद्र बना हुआ है। 

अप्रैल-जून 2025 के दौरा विदेश में धन लगाए में तेज वृद्धि हुई और आउटवार्ड एफडीआई बढ़कर 7.87 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 4.38 अरब डॉलर था। विदेश में एफडीआई के आंकड़ों से भारतीय इकाइयों द्वारा विदेश में लगाए जा रहे धन का पता चलता है। 

प्रत्यावर्तन/विनिवेश पिछले वर्ष की इसी अवधि के 12.17 अरब डॉलर से बढ़कर 12.38 अरब डॉलर हो गया। रिजर्व बैंक का कहना है कि प्रत्यावर्तन में वृद्धि एक परिपक्व बाजार का संकेत है जहां विदेशी निवेशक आसानी से प्रवेश करते हैं और निकासी कर सकते हैं।

जून 2025 में शुद्ध एफडीआई घटकर आधे से कम 1.07 अरब डॉलर रह गया है, जो जून 2024 में 2.24 अरब डॉलर था। सकल प्रत्यक्ष निवेश 9.26 अरब डॉलर रहा है, जो जून 2024 में 7.61 अरब डॉलर था। जून 2025 में सकल इनवार्ड एफडीआई 4 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका, साइप्रस और सिंगापुर से कुल एफडीआई आवक में से तीन चौथाई से ज्यादा आया है। रिजर्व बैंक के बुलेटिन के मुताबिक कंप्यूटर सेवाओं, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में सबसे ज्यादा धन आया है। 

Advertisement
First Published - August 29, 2025 | 9:45 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement