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भारत बनेगा सौर ऊर्जा मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब, FY28 तक ₹69,000 करोड़ निवेश का अनुमान

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CareEdge Advisory के मुताबिक वित्त वर्ष 28 तक घरेलू सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 220 गीगावॉट के पीक तक जा सकती है। इसमें 30% तक निर्यात की होगी हिस्सेदारी 

Last Updated- November 03, 2025 | 4:09 PM IST
Solar Industry
Representational Image

भारत में सौर ऊर्जा का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही भारत के अगले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की संभावना है। केयरएज एडवाइजरी (CareEdge Advisory) ने भारत में सौर ऊर्जा के परिदृश्य पर एक रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें सौर ऊर्जा मॉड्यूल उत्पादन क्षमता, पैनल निर्यात और निवेश के बारे में जानकारी के साथ इसके भविष्य और चुनौतियों के बारे में बताया गया है।

भारत में 10 साल में सौर ऊर्जा की क्षमता 32 गुना बढ़ी

केयरएज की इस रिपोर्ट के अनुसार भारत की सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता वित्त वर्ष 15 में 3.9 गीगावॉट (GW) थी, जो सितंबर 2025 में बढ़कर 127.3 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है, यानी इन 10 सालों में इसकी क्षमता में 32 गुना वृद्धि हुई। सिर्फ वित्त वर्ष 25 में ही इस क्षमता में 23.83 गीगावॉट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। इस समय सौर ऊर्जा का भारत की कुल विद्युत क्षमता में योगदान 25 फीसदी से अधिक है और अगस्त 2025 तक बिजली उत्पादन में इसका हिस्सा 8.5 फीसदी तक पहुंच गया।

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FY28 तक 200 GW पार करेगी उत्पादन क्षमता

केयरएज एडवाइजरी के अनुसार भारत अब सौर ऊर्जा के मामले में इसके आयात पर निर्भरता घटाकर आत्मनिर्भर सौर निर्माण हब बनने की दिशा में बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 28 तक सौर ऊर्जा की मॉड्यूल क्षमता बढ़कर 215 से 220 गीगावॉट होने की संभावना है। इस अवधि तक इसकी बिक्री क्षमता 100 गीगावॉट तक जा सकती है।

केयरएज की वरिष्ठ निदेशक तन्वी शाह ने कहा कि भारत सिर्फ ऊर्जा उत्पादन नहीं कर रहा, बल्कि नवाचार, रोजगार और निर्यात के नए अवसर भी बना रहा है। वित्त वर्ष 28 तक 215 से 220 गीगावॉट क्षमता भारत को वैश्विक सौर आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनाएगी। इतनी क्षमता के लिए 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी। इसी अवधि के दौरान घरेलू सेल उत्पादन क्षमता 100 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें पूंजीगत व्यय 55,000 करोड़ रुपये से अधिक होगा।

केयरएज को उम्मीद है कि मॉड्यूल उत्पादन निर्यात पर अधिक निर्भर करेगा, जबकि मध्यम अवधि में सेल उत्पादन भी घरेलू मांग से अधिक रहने की संभावना है। यह दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में भारत का मॉड्यूल और सेल उत्पादन घरेलू आवश्यकताओं से अधिक होगा, जिससे निर्यात इस क्षेत्र के विकास के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित होगा। मॉड्यूल और सेल उत्पादन पर कुल 6,9000 करोड़ रुपये के निवेशक की आवश्यकता होगी।

36 से 47 करोड़ सौर पैनलों की होगी आवश्यकता

वित्त वर्ष 28 तक 215 से 220 गीगावॉट सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता को प्राप्त करने के लिए करोड़ों सौर पैनलों की जरूरत होगी। केयरएज की इस रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि तक भारत को अपनी ऊर्जा मांग पूरी करने के लिए 36 से 47 करोड़ सौर पैनलों (500 वॉटपावर यानी Wp) की आवश्यकता होगी। वर्तमान में 1 मेगावाट सौर क्षमता के लिए 1,700–2,200 पैनल उपयोग में लाए जाते हैं।

निर्यात में 10 गुना उछाल, अमेरिका सबसे बड़ा बाजार

भारत से सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) का निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है। केयरएज की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019 और 2025 के बीच भारत से सौर पीवी उत्पादों का निर्यात मुख्य रूप से अमेरिका को 10 गुना से ज़्यादा बढ़ा है। वित्त वर्ष 25 में यह निर्यात 9,460 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा आयातक रहा।

पीएलआई, बीसीडी और एएलएमएम जैसी सरकारी पहलों ने घरेलू सौर मॉड्यूल क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाने में मदद की है। केयरएज ने वित्त वर्ष 28 तक 215 से 220 गीगावॉट सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता में 25 से 30 फीसदी पैनल निर्यात किए जाने की संभावना है।

भविष्य की दिशा: आयातक से निर्यातक की ओर बढ़ते कदम

केयरएज का कहना है कि भारत अब तेजी से आयातक से निर्यातक बनने की ओर बढ़ रहा है। अगले 4–5 वर्षों में देश पूर्ण बैकवर्ड इंटीग्रेशन (polysilicon से मॉड्यूल तक) हासिल कर सकता है, जिससे भारत वैश्विक सौर निर्माण में अग्रणी बन जाएगा। केयरएज की एसोसिएट डायरेक्टर नीतू सिंह ने कहा कि भारत सिर्फ सौर क्षमता नहीं बढ़ा रहा, बल्कि एक स्वच्छ और आत्मनिर्भर भविष्य की नींव रख रहा है। घरेलू सेल निर्माण क्षमता 100 GWp तक पहुंचने से देश दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ेगा। भारत का सौर क्षेत्र अब न सिर्फ ऊर्जा संक्रमण का इंजन है, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ का ग्लोबल प्रतीक भी बन रहा है।

केयरएज एडवाइजरी की रिपोर्ट बताती है कि आने वाले वर्षों में भारत सौर विनिर्माण का वैश्विक केंद्र (Global Solar Manufacturing Hub) बन सकता है, जहां रोजगार, निवेश और निर्यात तीनों में समानांतर वृद्धि देखने को मिलेगी।

चुनौतियां अब भी बरकरार

भारत में सौर ऊर्जा उद्योग भले तेजी से बढ़ रहा हो। लेकिन इस उद्योग के सामने चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। केयरएज की रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ महत्वपूर्ण जोखिम और चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। इन चुनौतियों में पॉलीसिलिकॉन उत्पादन में कमी, चीनी सप्लाई चेन पर निर्भरता, निर्यात बढ़ने के स्तर पर अनिश्चितता, नवीकरणीय परियोजनाओं में क्रियान्वयन की धीमी रफ्तार आदि शामिल हैं। हालांकि बड़े एकीकृत संयंत्रों के विकास से इन बाधाओं को धीरे-धीरे दूर किया जा रहा है।

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First Published - November 3, 2025 | 4:09 PM IST

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