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बिजली उत्पादन में दिख रही भारी कमी

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Last Updated- December 12, 2022 | 4:42 AM IST

महामारी की दूसरी लहर की शुरुआत होते ही लोग सड़कों से दूर हैं और बिजली का कम इस्तेमाल करने के साथ ही सामान खरीदने या मनोरंजक गतिविधियों का आनंद लेने के लिए बाहर कम निकल रहे हैं। कोरोनावायरस की दूसरी लहर की वजह से रिटेल दुकानों में और मनोरंजन के लिए बाहर जाने वाले लोगों की तादाद घटकर पिछले साल जून के स्तर तक आ गई है। पिछले साल जून में लॉकडाउन से थोड़ी छूट दिए जाने के बाद लोगों की यात्राएं बढ़ रही थीं। लेकिन इस बार इसमें गिरावट के रुझान हैं। सर्च इंजन गूगल लोकेशन डेटा के आधार पर लोगों की आवाजाही का जायजा लेता है।
बिजली उत्पादन में इसी तरह की गिरावट का रुझान दिखा। साल 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के पहले सप्ताह में बिजली उत्पादन में तेजी से गिरावट आई थी और फिर मार्च के अंत से सितंबर तक इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी क्योंकि अधिक से अधिक उद्योगों को काम करने की अनुमति दी गई थी।

इसके विपरीत, इस साल महाराष्ट्र में लॉकडाउन की घोषणा से ठीक पहले अप्रैल के पहले सप्ताह में बिजली उत्पादन शीर्ष स्तर पर रहा लेकिन उसके बाद से इसमें गिरावट के रुझान हैं। कई राज्यों ने संक्रमण की दूसरी लहर के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन की घोषणा की है जिसकी वजह से बिजली की खपत में कमी पिछले साल की तुलना में 2021 में और लंबे समय तक चल सकती है। भारत में रविवार को संक्रमण के 2.8 लाख मामले दर्ज किए गए जिसका अंदाजा कोविड19इंडिया डॉट ओआरजी से मिलता है।
वैश्विक लोकेशन तकनीक कंपनी टॉमटॉम इंटरनैशनल के डेटा से पता चलता है कि नई दिल्ली में यातायात की तादाद में कमी आई है। इसमें मुंबई की 81 फीसदी गिरावट की तुलना में 88 फीसदी की कमी है। दोनों शहरों ने संक्रमण के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबंध लगाए हैं। हाल के दिनों में दिल्ली संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। दोनों शहरों की यातायात की तादाद पिछले तीन हफ्तों से 80 फीसदी से भी कम है।

दोनों शहरों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के सापेक्ष स्तर में भी अंतर है। ये प्रदूषक तत्व औद्योगिक गतिविधि और वाहनों की वजह से होता हैं। बांद्रा इलाके के आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो मुंबई का उत्सर्जन बढ़ रहा है। दिल्ली में उत्सर्जन का स्तर अब भी 2019 के स्तर के आधे से भी कम हैं। पिछले साल के लॉकडाउन में भारतीय रेलवे के परिचालन पर काफी असर पड़ा था। इससे चालू वर्ष के आंकड़े को अनुकूल आधार मिलेगा। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 16 मई को खत्म हुए सप्ताह में माल ढुलाई की मात्रा में 42.6 फीसदी तक की तेजी रही। माल ढुलाई की आमदनी में 59.3 फीसदी तक की बढ़ोतरी है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड इन संकेतकों का जायजा लेता है। आधिकारिक वृहद आर्थिक डेटा अक्सर एक अंतराल के साथ जारी किए जाते हैं। साप्ताहिक संकेतक इस बात का अंदाजा देते हैं कि अर्थव्यवस्था का आगे का प्रदर्शन कैसा है। वैश्विक स्तर पर विश्लेषक इन्हीं आंकड़ों से अंदाजा लगाते रहे हैं क्योंकि कोविड-19 पर नियंत्रण करने के लिए विभिन्न देशों में लॉकडाउन लगाया गया। गूगल अपने मोबिलिटी डेटा को एक अंतराल के साथ जारी करता है। नए डेटा 12 मई का है और बाकी सभी डेटा 16 मई के हैं।

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First Published - May 18, 2021 | 12:41 AM IST

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