facebookmetapixel
Advertisement
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें स्थिर रखीं, सख्त रुख से बाजार की चिंता बढ़ीविदेशी निवेशकों की खरीदारी से लगातार दूसरे दिन चढ़ा शेयर बाजार, सेंसेक्स 274 अंक मजबूतबजाज फाइनैंस का पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन, प्रॉफिट 29% बढ़ा, एसेट क्वालिटी में सुधारAI पर बड़ा दांव, बजाज फाइनैंस ने 10 साल में ₹40 लाख करोड़ AUM का रखा लक्ष्यRBI की मौद्रिक नीति से पहले जियो क्रेडिट, हीरो फिनकॉर्प समेत कंपनियों ने बॉन्ड से ₹2,520 करोड़ जुटाएदेशभर में केवल E-20 पेट्रोल बिक्री के लिए उपलब्ध, रसीद पर एथनॉल प्रतिशत दिखाना जरूरी नहीं: गडकरीप्राकृतिक आपदाओं से अनाज का नुकसान 77% घटा, FCI ने भंडारण व्यवस्था को बताया सुरक्षितGSTN ने नई E-Way Bill सुविधाएं वापस लीं, फिलहाल पुराने नियम ही रहेंगे लागूNEP 2020 के 6 साल बाद भी अधूरे लक्ष्य, फंडिंग और ढांचागत कमी बनी सबसे बड़ी चुनौतीHurun India Women Leaders 2026: प्रिया नायर टॉप पर, 117 महिला लीडर्स की लिस्ट में बढ़ी भारतीय बेटियों की मौजूदगी

दरें बढ़ने के दौर में काम नहीं आता आगे का अनुमान: पात्र

Advertisement

मौद्रिक नीति संचार में संतुलन पर जोर, गलत संदेश से बाजार में भ्रम की चेतावनी

Last Updated- November 22, 2024 | 11:24 PM IST
ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप मार्केट में FPI निवेश सीमा की होगी समीक्षाRBI reviewing foreign investment limit in OIS market: RBI Dy Guv Patra

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्र ने गुरुवार को मौद्रिक नीति संचार पर अपने भाषण में कहा कि दरों में बढ़ोतरी के दौरान केंद्रीय बैंकों द्वारा अग्रिम मार्गदर्शन उतना प्रभावी नहीं हो सकता जितना कि कमी किए जाने के दौरान होता है। रिजर्व बैंक द्वारा आयोजित ‘ग्लोबल साउथ में केंद्रीय बैंकों के उच्च-स्तरीय नीति सम्मेलन’ के दौरान भाषण में पात्र ने यह कहा, जिसे शुक्रवार को वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

पात्र ने कहा, ‘बहुत कम नीतिगत दरों की स्थिति में अग्रिम मार्गदर्शन निस्संदेह प्रभावी साबित हुआ है, लेकिन उच्च दरों की स्थिति में इसका प्रभाव सवालों के घेरे में है। यह असममिक प्रकृति के अनुरूप है। नीचे की ओर जाने का निचला दायरा है, लेकिन ऊपरी सीमा तय नहीं है।’

सम्मेलन में बोलते हुए 21 नवंबर को पात्र ने कहा, ‘संचार का उच्चतम स्तर सभी केंद्रीय बैंकरों के लिए सर्वोच्च मानक बना हुआ है। बहुत ज्यादा होने पर सिगनल एक्सट्रैक्शन की समस्या हो सकती है, जबकि बहुत कम होने पर इससे बाजार अमंजस में रह सकता है।’

पात्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि मौद्रिक नीति 98 प्रतिशत बातचीत और सिर्फ 2 प्रतिशत कार्रवाई में हो सकती है, लेकिन गलत संदेश भेजने की कीमत बहुत भारी पड़ सकती है। मौद्रिक नीति को महंगाई दर की उम्मीदों के प्रबंधन की जरूरत है, लेकिन वृहद स्तर पर इसे प्रबंधित करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। पात्र ने कहा, ‘ऑडिएंस को लक्षित करने के मामले में केंद्रीय बैंक अभी यह सीख रहे हैं कि व्यापक स्तर पर जनता के साथ कैसे संवाद स्थापित किया जाए।’

Advertisement
First Published - November 22, 2024 | 11:24 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement