facebookmetapixel
Advertisement
Stocks To Watch Today: आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर! Airtel से Coal India तक 9 कंपनियों के बड़े अपडेटभारत-फ्रांस आर्थिक रिश्तों को नई गति देने 4 दिवसीय दौरे पर रवाना हुईं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणशांति समझौते के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य नहीं हुई जहाजों की आवाजाही, पूरी बहाली में लग सकते हैं तीन महीनेखामेनेई की अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए ईरान का कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण‘विजय’ मंत्र के साथ सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने संभाली कमान, कहा- भारतीय सेना हर चुनौती के लिए तैयाररंगमंच के आकाश से टूटा सितारा: विजया मेहता नहीं रहीं, कला जगत में शोक की लहर Editorial: कच्चा तेल सस्ता, लेकिन वैश्विक वित्तीय जोखिम अब भी भारत के लिए चुनौतीम्युचुअल फंड बनाम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर बहस और जमीनी हकीकतश्रम आय को नहीं, तो पूंजीगत लाभ को भी विशेष कर रियायत क्यों?सेबी का शिकंजा: पंप-एंड-डंप स्कीम में 222 इकाइयों पर प्रतिबंध, ₹47.7 करोड़ का जुर्माना

Fitch Ratings: दूसरी छमाही में कम होगी बिजली की मांग

Advertisement
Last Updated- December 20, 2022 | 11:39 PM IST
power

वित्त वर्ष 23 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 11.3 प्रतिशत की दमदार वृद्धि के बाद मार्च 2023 को समाप्त होने वाले इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान देश की बिजली मांग (Power demand) की वृद्धि धीमी होने के आसार हैं। फिच रेटिंग्स (Fitch ratings) ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई है।

फिच द्वारा जताए गए अनुमानों और जिन बिजली विश्लेषकों से बिजनेस स्टैंडर्ड ने बात की, उनका कहना है कि साल की दूसरी छमाही में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में बिजली की मांग में सात से आठ फीसदी के दायरे में बढ़ोतरी दिख सकती है। संपूर्ण वित्त वर्ष 23 के मामले में फिच की विश्लेषक गीतिका गुप्ता और गिरीश मदान का कहना है कि वित्त वर्ष 22 के 8.2 प्रतिशत के मुकाबले बिजली की मांग आठ प्रतिशत के दायरे में बढ़ेगी।

गुप्ता और मदन ने कहा कि हालांकि मांग में कमी बिजली कंपनियों के लिए मुश्किल से ही अच्छा संकेत होगा, लेकिन अच्छी बात यह है कि बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों (जेनकोस) की प्राप्तियों में इस साल सुधार होगा क्योंकि बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) अपना बकाया चुकाना शुरू कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि सितंबर 2020 से जेनकोस का डिस्कॉम पर कुल बकाया एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। सरकार को उम्मीद है कि डिस्कॉम विलंब भुगतान शुल्क (एलपीएस) नियमों के तहत वर्ष 2026 तक सभी बकाया राशि का भुगतान कर देंगी।

यह भी पढ़े: सूचीबद्ध-गैर सूचीबद्ध निवेश के बीच कर समानता हो

अगर ऊर्जा मंत्री आरके सिंह का मंगलवार को राज्यसभा में दिया गया लिखित जवाब इस बात का संकेत है, तो यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सिंह ने सदन को सूचित किया है कि जेनकोस का डिस्कॉम पर कुल बकाया, जो 3 जून, 2022 तक 1.37 लाख करोड़ रुपये था, अब 29,857 करोड़ रुपये घटकर 1.08 रुपये रह गया है।

Advertisement
First Published - December 20, 2022 | 9:24 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement