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EY ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, FY26 में अब 6.7% की दर से बढ़ेगी इकॉनमी

EY ने कहा कि टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन में दिक्कतों को देखते हुए भारत को अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के पैटर्न और स्ट्रक्चर पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है

Last Updated- September 29, 2025 | 2:08 PM IST
GDP
Representational Image

EY ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की रीयल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7 फीसदी कर दिया है, जो पहले 6.5 फीसदी था। ग्रोथ अनुमान में इस बढ़ोतरी के पीछे जून तिमाही की मजबूत ग्रोथ और वस्तु एवं सेवा कर (GST) रिफॉर्म बड़ी वजह हैं।

EY ने अपने ‘इकॉनमी वॉच’ रिपोर्ट सितंबर 2025 में कहा, “FY26 की पहली तिमाही में रीयल GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। GST सुधारों से मांग में इजाफा हुआ है, जबकि वैश्विक चुनौतियां भारत के निर्यात को प्रभावित कर रही हैं। इन हालातों के बावजूद हम FY26 में भारत की सालाना रीयल GDP ग्रोथ 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाते हैं।”

जून तिमाही में 7.8 फीसदी की GDP ग्रोथ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अगस्त 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में की गई 6.5 फीसदी की ग्रोथ के अनुमान से बेहतर है।

यह भी पढ़ें: RBI MPC बैठक आज से, दिवाली से पहले मिलेगा सस्ते कर्ज का तोहफा या करना होगा इंतजार?

बाजार डायवर्सिफाई करने की जरूरत

EY ने कहा कि टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन में दिक्कतों को देखते हुए भारत को अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के पैटर्न और स्ट्रक्चर पर खासकर अमेरिका और चीन के साथ नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।

EY इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा, “भारत का निर्यात और आयात काफी हद तक अमेरिका और कुछ हद तक चीन पर निर्भर है। भारत को अपने निर्यात और आयात स्रोतों को विविध बनाना चाहिए और ब्रिक्स देशों में अवसर तलाशने चाहिए, ताकि अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम हो सके।”

GST 2.0 से ऑटो, कृषि क्षेत्र को लाभ

इस महीने लागू GST 2.0 में दरों को 5%, 18% और विशेष दर 40% पर संशोधित किया गया। इसके कई क्षेत्रों जैसे ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य और वस्त्र उद्योग को लाभ मिलने की संभावना है।

श्रीवास्तव ने कहा, “नए टैक्स स्ट्रक्चर से कुछ वस्तुओं की कीमतों में अच्छी खासी कमी आई है। जिन क्षेत्रों को बड़ा फायदा हुआ है उनमें वस्त्र, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य और अधिकांश खाद्य वस्तुएं शामिल हैं। ये रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्र हैं, जहां कम कीमत के बड़ा लाभ मिल सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “उत्पादन के आउटलुक से देखें तो उर्वरक, कृषि मशीनरी और रिन्युएबल एनर्जी क्षेत्रों को भी लाभ होगा। इन क्षेत्रों में किसानों को कम इनपुट लागत का फायदा मिलेगा। शुरुआती चरण में कुछ शार्ट टर्म असर रेवेन्यू पर दिख सकता है।” ईवाई का मानना है कि टैक्स के बाद कीमतों में पर्याप्त कमी के साथ मांग बढ़ेगी और इससे ​आ​खिरकार रेवेन्यू घाटा पूरा हो जाएगा।

First Published - September 29, 2025 | 2:08 PM IST

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