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नवंबर में निर्यात की रफ्तार पड़ी सुस्त, व्यापार घाटे में आई कमी

नबंबर में पेट्रोलियम एवं रत्न एवं आभूषण को छोड़कर अन्य वस्तुओं का निर्यात 2.8 फीसदी संकुचन के साथ 24.3 अरब डॉलर रहा।

Last Updated- December 15, 2023 | 10:09 PM IST
Export

अक्टूबर में 11 महीनों में सबसे तेज गति से बढ़ने के बाद नवंबर में भारत के वस्तु निर्यात की वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ गई। इससे वैश्विक मांग में अस्थिरता और असमान आर्थिक सुधार का संकेत मिलता है।

वाणिज्य विभाग की ओर से आज जारी आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर में निर्यात 2.8 फीसदी घटकर 33.9 अरब डॉलर और आयात 4.3 फीसदी घटकर 54.5 अरब डॉलर रह गया। इससे व्यापार घाटा 20.6 अरब डॉलर दर्ज किया गया। त्योहारी मांग के कारण सोने और चांदी के आयात में जबरदस्त वृद्धि के कारण अक्टूबर में व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 31.5 अरब डॉलर हो गया था।

वाणिज्य सचिव सुनील बड़थवाल ने जोर देकर कहा कि निर्यात में वृद्धि के संकेत अब थम गए हैं और नवंबर में निर्यात का समग्र रुझान सकारात्मक रहा। उन्होंने कहा, ‘वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है, लेकिन हम अभी भी अपनी पकड़ बनाए रखने में समर्थ हैं। व्यापार केवल एकतरफा नहीं होता। उसे वैश्विक संदर्भ के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हमने कई देशों की जीडीपी वृद्धि देखी है जो अधिक नहीं है।’

मूल्य के लिहाज से अगस्त को छोड़ दिया जाए तो इस साल अप्रैल से ही भारत से निर्यात 33 से 34 अरब डॉलर के दायरे में रहा है। यह पिछले साल अप्रैल से नवंबर के बीच भारत के निर्यात के मुकाबले काफी कम है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर की अवधि में निर्यात 7 फीसदी घटकर 278.8 अरब डॉलर रह गया, जबकि आयात में 9.5 की गिरावट आई और वह 445.1 अरब डॉलर रहा।

भारतीय निर्यातकों के संगठन फियो के अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने कहा कि निर्यात में गिरावट से बढ़ती अनिश्चितता का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक आर्थिक सुधार में सुस्ती की भी झलक मिलती है। उन्होंने कहा, ‘जिंस की कीमतों में साल 2022 के उच्च स्तर के मुकाबले नरमी ने भी गिरावट में योगदान किया। लगभग सभी देशों के निर्यात में गिरावट देखी जा रही है।

कई देशों के निर्यात में दो अंकों की गिरावट आई है। पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी दुनिया भर के कारोबारियों और बाजारों में घबराहट बढ़ा दी है।’ व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (अंकटाड) की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में वस्तुओं एवं सेवाओं के वैश्विक निर्यात में 4.5 फीसदी संकुचन दिखने के आसार हैं।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि नवंबर में भारत का वस्तु व्यापार घाटा अप्रत्याशित रूप से कम हो गया। मगर निर्यात का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहने के कारण व्यापार घाटा इक्रा के 23.5 अरब डॉलर के अनुमान के मुकाबले करीब 20 अरब डॉलर रहा।

उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि चालू वित्त वर्ष के शेष भाग में मासिक व्यापार घाटा 20 से 25 अरब डॉलर के दायरे में रहेगा। इससे वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही में चालू खाते का घाटा जीडीपी के करीब 2.5 फीसदी पर और चौथी तिमाही में जीडीपी के 1.7 फीसदी पर होगा। कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2024 के लिए चालू खाते का घाटा जीडीपी के 1.7 से 1.8 फीसदी के दायरे में रहने उम्मीद है।’

नबंबर में पेट्रोलियम एवं रत्न एवं आभूषण को छोड़कर अन्य वस्तुओं का निर्यात 2.8 फीसदी संकुचन के साथ 24.3 अरब डॉलर रहा। महीने के दौरान 30 में से 15 क्षेत्रों में भारत के वस्तुओं के निर्यात में संकुचन दिखा। इनमें पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, रेडीमेड परिधान और रसायन शामिल हैं।

कोयला, कच्चे तेल एवं कीमती पत्थर सहित कुल 30 में से 15 वस्तुओं के आयात में भी संकुचन दर्ज किया गया। महीने के दौरान सेवाओं का निर्यात 6.5 फीसदी बढ़कर 28.7 अरब डॉलर हो गया जबकि सेवाओं का आयात 12.9 फीसदी घटकर 13.4 अरब डॉलर रहा।

First Published - December 15, 2023 | 10:09 PM IST

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