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EU के नए नियम से विकासशील देशों के निर्यात पर पड़ेगा असर

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रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर उत्पाद उपभोक्ता वस्तुओं में शामिल हैं, ऐसे में कीमत में बढ़ोतरी से यूरोपीय संघ में महंगाई बढ़ सकती है।

Last Updated- June 19, 2024 | 10:13 PM IST
Strait of Hormuz

दिल्ली के एक थिंक टैंक ने बुधवार को कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा हाल में पारित नियम इकोडिजाइन फॉर सस्टेनबल प्रोडक्ट्स रेगुलेशन (ईएसपीआर) के कारण लागत बढ़ेगी और इससे विकासशील देशों से होने वाले निर्यात पर बुरा असर पड़ेगा।

यूरोपीय आयोग के मुताबिक नए विनियमन से यूरोपीय संघ के उत्पादों की चक्रीयता (टिकाऊ रूप से इस्तेमाल), ऊर्जा प्रदर्शन और अन्य पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े पहलुओं में सुधार होगा। ईएसपीआर में 2030 तक सभी उत्पादों को शामिल किया जाएगा, लेकिन नियमन की शुरुआत कुछ वस्तुओं जैसे कपड़े, फर्नीचर, गद्दे,, टायर, डिटर्जेंट, पेंट, लुब्रीकेंट्स, लोहा व इस्पात के साथ जनवरी 2026 से होगी।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा, ‘ईएसपीआर की वजह से विकासशील देशो से होने वाला निर्यात प्रभावित हो सकता है क्योंकि इससे यूपोरीय संघ के बढ़े मानकों को हासिल करने के लिए अनुपालन लागत बढ़ेगी और इससे लागत व चुनौतियां बढ़ेंगी।’ संगठन ने कहा कि नियमन से उत्पादों की लागत बढ़ जाएगी क्योंकि उत्पादन की प्रक्रिया में बदलाव करना होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर उत्पाद उपभोक्ता वस्तुओं में शामिल हैं, ऐसे में कीमत में बढ़ोतरी से यूरोपीय संघ में महंगाई बढ़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 से यूरोपीय संघ को निर्यात किए जाने वाले भारतीय उत्पादों पर क्यूआर कोड या बार कोड जरूरी होगा, जिसमें सूचनाएं देनी होंगी कि यह उत्पाद यूरोप के टिकाऊपन मानकों को पूरा करता है।

नियमन में यह अनिवार्य किया गया है कि आयातित उत्पाद टिकाऊपन मानकों को पूरा करते हों, जिसमें इनकी पहचान के लिए डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट शामिल है। इन कदमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यूरोपीय संघ के बाजार में प्रवेश करने वाले सभी उत्पाद पर्यावरण के उच्च मानकों का पालन करें जिससे वैश्विक व्यापार के तरीके पर असर पड़े।

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First Published - June 19, 2024 | 10:13 PM IST

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