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वित्त मंत्रालय के अधीन आएगा डीपीई!

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Last Updated- December 12, 2022 | 6:37 AM IST

वित्त मंत्रालय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर बेहतर नियंत्रण के लिए सार्वजनिक उपक्रम विभाग (डीपीई) को अपने अधीन लेने के बारे में विचार कर रहा है। मंत्रालय अपनी महत्त्वाकांक्षी निजीकरण की योजना को अमलीजामा पहचाने की तैयारी कर रहा है।
सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक आर्थिक मामलों के विभाग ने निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) को पत्र लिखकर इस बारे में विचार करने को कहा है कि क्या सार्वजनिक उपक्रम विभाग (डीपीई) को वित्त मंत्रालय के तहत लाया जा सकता है क्योंकि दीपम और डीपीई का कुछ कार्यों में एक-दूसरे में दखल होता है। इस समय डीपीई भारी उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय के तहत आता है। यह विभाग पीएसयू के प्रदर्शन, लाभांश, सरकारी स्वामित्व वाले उपक्रमों के पूंजीगत व्यय के स्तर पर प्रदर्शन, शेयरों के बायबैक की संभावना और कर्म चारियों के वेतन पैकेज की निगरानी रखता है। अधिकारी ने कहा कि ये सभी मुद्दे परस्पर संबंधित हैं और दीपम को आवंटित कुुछ कामकाज में दखल देते हैं। डीपीई को वित्त मंत्रालय के तहत लाने के कदम का एक मकसद विभागों के बीच प्रशासनिक कुशलता भी लाना है। ऐसे किसी प्रस्ताव को लागू करने से पहले कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की मंजूरी लेनी होगी।
इस बारे में चर्चा पहली बार नहीं हो रही है। वर्ष 2017 में भी सरकार दीपम और डीपीई के विलय के बारे में विचार कर रही थी, लेकिन वह प्रस्ताव जमीन पर नहीं उतर पाया। अब सरकार की निजीकरण योजना से पहले डीपीई को वित्त मंत्रालय के अधीन लाने का प्रस्ताव अहम हो गया है। इसके तहत रणनीतिक क्षेत्रों में पीएसयू में ‘मामूली’ मौजूदगी रखी जाएगी और शेष सरकारी कंपनियों का निजीकरण, विलय होगा या बंद होंगी।

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First Published - March 26, 2021 | 12:55 AM IST

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