facebookmetapixel
Advertisement
Upcoming NFOs: जियोब्लैकरॉक, श्रीराम और अल्टिवा के नए फंड होंगे लॉन्च, देखें पूरी जानकारीGST Council Meeting: जीएसटी परिषद की बैठक टली, अब 7 अक्टूबर को होने की संभावनाBS Roundtable: बंगाल बेकन्स में सोमवार को स्वपन दासगुप्ता रखेंगे पश्चिम बंगाल के विकास की दिशाडिजिटल पहुंच और लागत की जागरूकता से बढ़ा डायरेक्ट प्लान का रुझान, रिटेल निवेशक आगेUN में भारत का साफ रुख: नक्शा सुधारें, लेकिन जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के आधिकारिक नक्शे से छेड़छाड़ मंजूर नहींबॉन्ड यील्ड बढ़ने से डेट फंड निवेशकों की बढ़ी चिंता, जानें किस अवधि के लिए कौन-सा फंड सहीम्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने IPO में लगाए 12,944 करोड़ रुपये, 52 फीसदी निवेश तीन फंड हाउस का35 रुपये किलो वाली सरकारी प्याज की भारी मांग, कांदा एक्सप्रेस से 17 शहरों में पहुंची खेपअगले हफ्ते शेयर बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, इन संकेतों पर निवेशकों की रहेगी नजर₹50 का मोटा डिविडेंड! गुरखा बनाने वाली कंपनी का बड़ा तोहफा, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्ते

एमएपी पर सीबीडीटी का दिशानिर्देश नोट

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 3:35 AM IST

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा है कि जिन देशों के साथ भारत की कर संधियां हैं, उनके साथ स्थायी प्रतिष्ठान, स्थानांतरण मूल्य समायोजन को लेकर करदाता और देशों के कर अधिकारियों के बीच सीमा पार कर विवादों का समाधान आपसी समझौता प्रक्रिया (म्युचुअल एग्रीमेंट प्रोसीजर) नाम की एक वैकल्पिक समाधान व्यवस्था के माध्यम से किया जा सकता है। इसके अलावा अगर व्यय या आय के रूप में वर्गीकृत कुछ आयटम, जिन पर कर लगता है, को लेकर उठने वाले विवाद का समाधान भी इस व्यवस्था के तहत किया जा सकता है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने एमएपी पर हाल के विस्तृत दिशानिर्देश में यह कहा है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के बेस इरोजन ऐंड प्रॉफिट शिफ्टिंग (बीईपीएस) पर कार्ययोजना आने के बाद सीबीडीटी के दिशानिर्देश आए हैं।
एमएपी, भारत और जिन देशों के साथ दोहरे कराधान से बचाव समझौता (डीटीएए) हुआ है, उनके बीच सीमा पार कर विवाद सुलझाने के लिए द्विपक्षीय बातचीत की प्रक्रिया है।
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि भले ही एमएपी के माध्यम से विवाद का समाधान हो जाए, आयकर अपीली न्यायाधिकरण (आईटीएटी) के पहले के नियम लागू रहेंगे। दिशानिर्देशों में कहा गया है, ‘भारत के अधिकृत प्राधिकारी (सीए) संबंधित साल के लिए आईटीएटी के आदेशों से नहीं हटेंगे।’ इसमें कहा गया है कि जिन मामलों का समाधान घरेलू तरीकों से कर दिया गया है, ऐसे एमएपी मामले बंद कर दिए जाएंगे।
बहरहाल ऐसे मामले में, जहां आईटीएटी विवादों का समाधान नहीं करता है, बल्कि उसे स्थगित रखा गया है, ऐसे में सीए द्वारा करदाता के कहने पर एमएपी तक पहुंच मुहैया कराई जाएगी।
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि भारत और डीटीएए देशों के सीए कर अधिकारियों द्वारा किए गए सभी समायोजन वापस ले सकते हैं। बहरहाल जो भारत में हैं, वे करदाता द्वारा दाखिल किए गए आयकर रिटर्न से नीचे नहीं जा सकते हैं। बहरहाल एमएपी मामलों में, जहां समायोजन डीटीएए देशों के कर अधिकारियों द्वारा समायोजन किया गया है, भारत में सीए रिटर्न में दाखिल की गई आमदनी के नीचे जा सकते हैं, जैसा कि संधि में प्रावधान किया गया है।  कंसल्टेंसी फर्म एकेएम ग्लोबल में टैक्स पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, ‘एमएपी दिशानिर्देशों से करदाताओं और भारत व संधि के साझेदार देशों के अधिकृत प्राधिकारियों को भारत की स्थिति समझने में मदद मिलेगी।’  राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के केंद्र के दो अधिकारियों को अधिकृत प्राधिकारी के रूप में एमएपी मामले देखने का काम सौंपा गया है।  नांगिया ऐंड कंपनी में पार्टनर शैलेश कुमार ने कहा, ‘एमएपी आवेदन लेने और बाचचीत करने के लिए दो समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति से भारत के कर अधिकारियों ने करदाताओं के मामलों के त्वरित समाधान को लेकर इरादा साफ किया है।’

Advertisement
First Published - August 9, 2020 | 11:45 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement