कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर थमने से देश के वाहन विनिर्माताओं में बिक्री जल्द सुधरने की उम्मीद जगी है। इसमें बेहतर ग्रामीण रुझान, कम ब्याज दरों, वित्त उपलब्धता में सुधार और कारोबार एवं आर्थिक गतिविधियों में धीरे-धीरे तेजी से मदद मिलेगी। असल में कंपनियां पहले ही उत्पादन बढ़ा चुकी हैं। वे ज्यादा ऑर्डर और ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में संक्रमण से बचने के लिए निजी परिवहन के साधनों को प्राथमिकता से उत्साहित हैं।
इस साल अप्रैल की शुरुआत में वाहन उद्योग में उत्साह का माहौल था क्योंकि मार्च के बिक्री रुझान ने दर्शाया था कि कोविड-19 महामारी का असर पीछे छूट चुका है। मार्च में कुल वाहन बिक्री निम्न आधार पर ही सही मगर 77 फीसदी बढ़ी थी और पिछले कुछ महीनों से बिक्री लगातार तीन लाख इकाइयों से ऊपर बनी हुई थी।
उस समय उम्मीद से लबरेज देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजूकी ने कहा था कि बाजार में ज्यादा नकदी की उपलब्धता और कर्ज लेने के आसान विकल्प उद्योग के लिए अनुकूल साबित होने की उम्मीद है। लेकिन महामारी की दूसरी लहर आने से पिछले कुछ महीनों की पूरी बढ़त का सफाया हो गया। देश के 80 फीसदी हिस्से में लॉकडाउन लगने से कार विनिर्माताओं को फैक्टरियां बंद करनी पड़ीं और डीलरों को अपने शोरूम बंद करने को विवश होना पड़ा।
अब फिर से हालात अनुकूल बन रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से खुलने लगी है, इसलिए उद्योग के अधिकारी दूसरी तिमाही अच्छी रहने की उम्मीद कर रहे हैं। आर्थिक गतिविधियों के रफ्तार पकडऩे से अगस्त से बिक्री में सुधार आने की संभावना है।
उद्योग के सूत्रों ने कहा कि देश की दो सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनियों- मारुति सुजूकी और हुंडई ने जून में क्रमश: 165,000 से 1,69,000 और 60,000 से 65,000 इकाइयों के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। यह अप्रैल से अधिक है। उस समय मारुति सुजूकी ने 1,57,585 और हुंडई ने करीब 57,100 वाहनों का उत्पादन किया था। इसके बाद मई में उत्पादन में भारी गिरावट आई क्योंकि देश दूसरी लहर के चरम पर पहुंच रहा था। हालांकि उसके बाद उत्पादन को तेजी से बढ़ाना मुमकिन रहा है क्योंकि पिछले साल से इतर इस बार कामगारों का पलायन कम या ना के बराबर हुआ।
मारुति सुजूकी में कार्यकारी निदेशक (विपणन एवं बिक्री) शशांक श्रीवास्तव ने कहा, ’10 राज्य पूरी तरह खुल चुके हैं, जिनका कुल बिक्री में 40.2 फीसदी हिस्सा है। अनलॉक शुरू होने के बाद हमारे डीलरों के पास पूछताछ के लिए अच्छी तादाद में लोग आ रहे हैं। मेरा अनुमान है कि अप्रैल की शुरुआत की बिक्री की 70 से 75 बिक्री जून में लौट आएगी।’ मारुति के 3,145 शोरूम हैं, जिनमें से शुक्रवार तक 2,300 खुल गए थे।
हुंडई भी उत्पादन बढ़ा रही है और इसने अपने चेन्नई संयंत्र में तीसरी पाली फिर शुरू कर दी है। हुंडई मेें बिक्री प्रमुख तरुण गर्ग ने कहा कि कंपनी का मानना है कि जून तक 75 फीसदी सामान्य मासिक बिक्री लौट आएगी। गर्ग ने कहा, ‘अभी हमारी 80 फीसदी डीलरशिप खुली हैं। हालांकि मई में 25 से 30 बिक्री हुई, लेकिन हमें उम्मीद है कि जून तक सामान्य मांग की 70 से 75 फीसदी मांग आने लगेगी।’
हालांकि दोपहिया की बिक्री सुधरने में समय लग सकता है क्योंकि ग्रामीण इलाके महामारी की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण इलाके ही दोपहिया वाहनों के प्रमुख बाजार हैं।
होंडा मोटरसाइकिल ऐंड स्कूटर इंडिया के बिक्री प्रमुख वाईएस गुलेरिया ने कहा, ‘इस बार ग्रामीण इलाके महामारी से प्रभावित हुए हैं। लेकिन एक सकारात्मक पहलू यह है कि फसल उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहा है और हम मॉनसून भी सामान्य रहने की उम्मीद कर सकते हैं। हम इसे ट्रैक्टरों की बिक्री के रुझान से साफ देख सकते हैं, जो पिछले दो सीजन में काफी अच्छी रही है। फंडामेंटल मजबूत हैं, लेकिन हमें देखना होगा कि क्या ये वास्तविक मांग में तब्दील होते हैं।’
हालांकि श्रीवास्तव ने आगाह किया कि उद्योग की मौजूदा उम्मीद अर्थव्यवस्था के मिजाज और इस बार पर निर्भर करेगा कि भारत तीसरी लहर को रोकने में सक्षम रहता है या नहीं। श्रीवास्तव ने कहा, ‘आपूर्ति में कोई अचडऩ नहीं है, लेकिन मांग में वास्तविक सुधार समग्र वृहद अर्थव्यवस्था पर निर्भर करेगा।’ गुलेरिया ने भी इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा, ‘यह भविष्यवाणी करने के समान है। हम हर सप्ताह के हिसाब से योजना बना रहे हैं।’
कंपनियां मांग में अनिश्चितता के अलावा कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी को लेकर भी चिंतित हैं। कच्चे माल की लागत बढऩे से कंपनियों का मुनाफा मार्जिन कम होगा। उदाहरण के लिए बजाज ऑटो की कच्चे माल की लागत 4-5 फीसदी बढ़ गई है, इसलिए कंपनी ने चरणबद्ध तरीके से कीमतें चार फीसदी बढ़ाई हैं। इस दोपहिया विनिर्माता का एबिटा मार्जिन चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 60 आधार अंक और तिमाही आधार पर 170 आधार अंक घटकर 17.7 फीसदी रहा। कंपनी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में 300 आधार अंक का असर और पड़ेगा, जिसके लिए इसने अप्रैल में कीमतें 1.5 से 2 फीसदी बढ़ाई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के बावजूद मांग में अनिश्चितता से कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना मुश्किल होगा। एलकेपी सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा, ‘हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021 की पहली छमाही के अत्यंत निम्न आधार पर वित्त वर्ष 2022 मजबूत रहेगा। हालांकि वृद्धि हमारे पहले के अनुमानों से कम रहेगी।