विभिन्न संकटों का सामना कर रही एडटेक फर्म बैजूस के संस्थापक बैजू रवींद्रन की कानूनी टीम ने बताया है कि डेलावेयर अदालत ने इस साल 20 नवंबर को दिए गए फैसले को पलट दिया है। अदालत ने रवींद्रन की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके द्वारा प्रस्तुत नए आवेदनों को ध्यान में रखकर 1 अरब डॉलर के हर्जाने के फैसले को पलट दिया है।
उनकी टीम ने कहा कि अदालत इस बात से सहमत है कि हर्जाने का निर्धारण नहीं किया गया था और रवींद्रन के खिलाफ दावों से संबंधित किसी भी हर्जाने का निर्धारण करने के लिए जनवरी 2026 की शुरुआत में एक नया चरण शुरू करने का आदेश दिया है।
कानूनी टीम ने आरोप लगाया कि ग्लास ट्रस्ट और ऋणदाताओं ने जानकारी छिपाई अथवा उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने अदालत और आमलोगों को गुमराह किया, जिससे एडटेक फर्म के कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा। नतीजतन, करीब 85,000 लोगों की नौकरियां चली गईं, जिसका असर सीधे 25 करोड़ विद्यार्थियों पर पड़ा और अरबों डॉलर का उद्यम मूल्य बरबाद हो गया। बताया जा रहा है कि बैजू रवींद्रन अब इस आचरण के खिलाफ ग्लास ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ आगे की कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं।
बैजू रवींद्रन के मुकदमा सलाहकार माइकल मैकनट ने कहा, ‘न्यायालय के फैसला पलटने को कम करके नहीं आंका जा सकता है। बैजू रवींद्रन को वादी (ग्लास ट्रस्ट कंपनी एलएलसी) को एक भी डॉलर का हर्जाना देने के लिए उत्तरदायी नहीं पाया गया है।’