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बैंकों पर संकट का पूरा प्रभाव अगले 12-18 महीनों में दिखेेगा

Last Updated- December 12, 2022 | 12:37 AM IST

बीएस बातचीत
मैकिंजी एंड कंपनी में सीनियर पार्टनर आकाश लाल का कहना है कि ऑनलाइन जानकारी तक पहुंच और सौदों की प्रक्रिया आसान बनने से परिसंपत्तियों के वित्तीयकरण में इजाफा हुआ है। उन्होंने ऐश्ली कुटिन्हो के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि बैंकों को मुनाफ के लिहाज से कोविड-पूर्व स्तरों पर पहुंचने के लिए उत्पादकता में 25-30 प्रतिशत तक का इजाफा करने की जरूरत होगी। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
वर्ष 2020 में भारत मैकिंजी के एशियन कैपिटल मार्केट इंडेक्स में 9वें पायदान पर पहुंच गया था। इस सूचकांक के संदर्भ में देश के प्रदर्शन में सुधार के लिए कौन से कारक जिम्मेदार हैं?
हमने ऐसे कुछ प्रमुख रुझानों की पहचान की है जिनका सुधार में योगदान रहा है। पहला, निजी इक्विटी निवेश पिछले पांच साल में तीन गुना हुआ है, और सालाना सौदों की संख्या 2016 के 588 से बढ़कर 2020 में 917 हो गई। दूसरा, भारतीय बॉन्ड बाजार, जहां वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम विकसित है, वहीं 2020 में इसने 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया। ऑनलाइन जारकारी तक पहुंच और सौदों की प्रक्रिया आसान होने से भी परिसंपत्तियों के वित्तीकरण को मदद मिली म्युचुअल फंडों और इक्विटी बाजारों में वृद्घि की रफ्तार मजबूत हुई।  2020 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों से इक्विटी प्रवाह मजबूत बना रहा और दिसंबर 2019 से दिसंबर 2020 के बीच 23.7 अरब डॉलर का निवेश हुआ, भले ही अन्य उारते बाजारों में बिकवाली दर्ज की गई। एफपीआई निवेश आकर्षित करने के लिहाज से भारत पसंदीदा बना हुआ है।

भारत अपने पूंजी बाजार को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठा सकता है?
वर्ष 2019 में, भारतीयों के पास अपनी 63 प्रतिशत निजी वित्तीय परिसंपत्तियां नकदी, जमा और बचत खातों के तौर से संबंधित थीं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 16 और यूरोप में 35 प्रतिशत था। भारत को खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में एमएफ वितरण मजबूत बनाकर, म्युचुअल फंडों की दीर्घावधि वृद्घि को बरकरार रखना चाहिए। निजी इक्विटी का योगदान बढ़ाया जा सकता है।
देश को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश की रफ्तार बढ़ानी होगी।

मैकिंजी के विश्लेषकों ने इस साल के शुरू में कहा था कि भारतीय बैंक अगले कुछ वर्षों में करोड़ रुपये के ऋण और राजस्व नुकसान का सामना कर सकते हैं। अब इस सेक्टर के लिए आपका क्या आकलन है?
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने कोविड-19 संकट के दौरान अपनी मजबूत क्षमता को साबित किया है। हालांकि ऋण नुकसान और संबद्घ राजस्व नुकसान के संदर्भ में इस संकट का पूरा प्रभाव अगले 12-18 महीनों में ही स्पष्ट तौर पर दिखेगा। लगातार कम ब्याज दरों से भी बैंकों के शुद्घ ब्याज मार्जिन पर प्रभाव पड़ेगा। बैंकों को कोविड से पहले जैसे मुनाफे की राह पर लौटने के लिए उत्पादकता में 25-30 प्रतिशत तक का इजाफा करने की जरूरत होगी।
आप पीई क्षेत्र में क्या रुझान देख रहे हैं?
भारत पीई पूंजी हासिल करने वाले सबसे बड़े बाजारों में से एक रहा है। वर्ष 2020 में पिछले पांच साल में यहां यह निवेश तीन गुना बढ़कर 37 अरब डॉलर हो गया। इसमें से, करीब 10 अरब डॉलर उद्यम पूंजी निवेश के तौर पर आए। यूनिकॉर्न की संख्या भी इस अवधि में 10 से बढ़कर 36 हुई, और भारत-केंद्रित ड्राई पाउडर 8 अरब डॉलर पर मजबूत बना रहा। इन सबसे यह संकेत मिलता है कि पूंजी अच्छी गुणवत्ता के सौदों के लिए उपलब्ध है और यह वृद्घि के लिए एक मुख्य कारक हो सकता है।

महामारी के दौरान छोटे निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। आप इस रुझान के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
इक्विटी बाजारों में रिटेल भागीदारी में वृद्घि एक वैश्विक घटनाक्रम है, जिसमें महामारी के दौरान तेजी आई। यह ध्यान देना दिलचस्प है कि डेट फंडों के जरिये छोटे निवेशकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।

First Published - September 30, 2021 | 11:37 PM IST

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