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‘समुराई’ के सामने समर्पण कर सिंह ने कहा- सायोनारा

Last Updated- December 07, 2022 | 5:02 AM IST

रैनबैक्सी मेरी जिंदगी है, मेरा खून है। मगर अब वक्त आ गया था कि कुछ ऐतिहासिक किया जाए, कुछ ऐसा, जिससे मूलभूत बदलाव हो जाए – मालविंदर मोहन सिंह।


देश की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी रैनबैक्सी लैबोरेटरीज लिमिटेड के प्रवर्तक मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह ने अपनी पूरी हिस्सेदारी जापानी दवा बाजार के प्रमुख समुराई (योध्दा) डायची सांक्यो को बेचकर कंपनी के मालिकाना हक से सायोनारा (टा-टा) कर दिया है।

हालांकि मालविंदर सिंह अभी कुछ समय तक कंपनी के सीईओ बने रहेंगे। यह किसी भारतीय कंपनी में विदेशी कंपनी की ओर से की गई सबसे बड़ी खरीदारी है। इसके तहत जापानी कंपनी को कुल 34.8 फीसदी शेयर मिले, जिसके एवज में उसे करीब 10,000 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। 34.8 शेयर हासिल करने के बाद डायची रैनबैक्सी पर पूरा कब्जा जमाने के लिए अतिरिक्त 20 फीसदी शेयरों की खरीद के लिए ओपन ऑफर जारी कर सकती है।

क्यों खरीदा रैनबैक्सी को : रैनबैक्सी का न सिर्फ भारतीय दवा बाजार पर कब्जा है बल्कि चीन, पूर्वी यूरोप और अमेरिका समेत कई और देशों के बाजार में भी इसकी अहम हिस्सेदारी है। रैनबैक्सी को हथियाने के बाद जापानी कंपनी को खुद-ब-खुद इन बाजारों में अहम हिस्सेदारी मिल जाएगी। इसके अलावा, डायची की तीन प्रमुख प्रतिद्वंद्वी जापानी कंपनियां ताकेदा, एस्टेलास और आइसाई की आक्रामक अधिग्रहण नीति ने भी कंपनी को कोई बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

क्या है रैनबैक्सी का इतिहास

तकरीबन 60 साल पहले मालविंदर सिंह के दादा भाई मोहन सिंह ने यह कंपनी बनाई थी, जिसे मालविंदर के पिता परविंदर सिंह ने नए मुकाम पर पहुंचाया। मालविंदर ने 1994 में कंपनी बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया था। मालविंदर और उनके भाई शिविंदर दुनिया के 20 अमीर भारतीयों में शामिल हैं।

कितना है कारोबार

गुड़गांव स्थित मुख्यालय वाली इस भारतीय कंपनी का सालाना कारोबार लगभग 74.3 अरब रुपये का है। कारोबार के लिहाज से यह भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी है, जो कि 125 देशों में उत्पादों का निर्यात भी करती है। दुनिया की 10 शीर्ष जेनेरिक कंपनियों की सूची में भी यह शामिल है।

कौन है डायची सांक्यो

जापान की यह तीसरी सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी 2005 में दो अलग-अलग कंपनियों डायची और सांक्यो के विलय से अस्तित्व में आई थी। कंपनी की हाई ब्लड प्रेशर की दवा बेनीकार दुनियाभर में काफी चर्चित है। रैनबैक्सी की खरीद से पहले डायची ने भी ढाई साल में सात कंपनियों को अपनी झोली में डाला है।

First Published - June 12, 2008 | 12:32 AM IST

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